इजराइली लोगों ने 240 भारतीयों के लिए गाना गाया। इजरायली झंडों को लहराया क्योंकि इन 240 भारतीय लोगों का इजराइल के साथ एक बेहद ही खास और रहस्यमई रिश्ता है। जब यह लोग विमान में बैठकर भारत से इजराइल पहुंचे तो उस वक्त भी विमान के अंदर इजराइल के अधिकारियों ने इन भारतीय लोगों के लिए गाने गाए, झंडे लहराए और जश्न मनाया।दरअसल भारत में रहने वाले यह लोग यहूदियों के एक खास और रहस्यमई समुदाय से जुड़े हैं। इस समुदाय का नाम बनेई मिनाशे है। बनेई मिनाशे समुदाय के यहूदी सदियों पहले भारत आकर बस गए थे। बिनेई मिनाशे यहूदियों के वंशजों का जिक्र बाइबल में मिलता है। आपको बता दें कि यहूदियों के इस खास समुदाय के लोग भारत के नॉर्थ ईस्ट में आकर रहने लगे।
वहां भी खासतौर पर मणिपुर में कुछ महीनों पहले इजराइल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले इन बनेई मेनाशे समुदाय के बचे हुए 5800 यहूदियों को अपने देश वापस लाकर बसाने का फैसला किया था। इजराइल ने खास मकसद से भारत की मदद से इन यहूदियों की घर वापसी की है। इजराइल ने कहा है कि वह अगले 5 सालों में इन 5800 यहूदियों को इजराइल लेकर जाएगा। अब इन्हीं में से पहले 240 बिनेई मिनाशे समुदाय के यहूदी इजराइल पहुंच चुके हैं। यहां आपको सबसे दिलचस्प बात बता दें कि दुनिया में कहीं भी रहने वाला एक यहूदी इजराइल का नागरिक बन सकता है। इजराइल का लॉ ऑफ रिटर्न हर यहूदी को इजराइल आने और इजराइली नागरिक बनने का अधिकार देता है। आपको बता दें कि 2005 में इजराइल के धार्मिक गुरु ने बिनेई मिनाशे समुदाय को इजराइली मूल के लोगों की मान्यता दे दी थी। इसी के बाद इजराइल ने फैसला किया कि वह इन यहूदियों को अपने देश लेकर आएगा। लेकिन इजराइल ऐसा कर क्यों रहा है? उसकी दो होश उड़ा देने वाली वजह हैं। सबसे पहले तो इजराइल भारत में रहने वाले इन यहूदियों को फिलिस्तीनियों की जगह नौकरी देना चाहता है। यह लोग अपनी-अपनी योग्यता के मुताबिक अलग-अलग कामों में लगाए जाएंगे। इजराइल को अपने देश की सुरक्षा के लिए फिलिस्तीनियों की जगह यहूदियों पर विश्वास है। इन लोगों को इजराइल वापस लाने की दूसरी सबसे बड़ी वजह इजराइल की सुरक्षा ही है।
दरअसल इजराइल इन बिनई मिनाशे लोगों को अपने खास इलाके में बसाना चाहता है। इस इलाके का नाम अपरगिली है। अपरगिली इलाका इजराइल के नॉर्थ में है जो लेबनान से बॉर्डर शेयर करता है। इस इलाके में 53% आबादी फिलिस्तीनी नागरिकों और अरबों की है। यहां मूल इजराइलियों की पॉपुलेशन माइनॉरिटी में आ गई है। ऐसे में इजराइल को डर है कि लेबनान से लगते हुए अपर गिली इलाके में अगर यहूदी कम हो गए तो इजराइल के इस इलाके में लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्ला की पकड़ मजबूत हो जाएगी क्योंकि यहां रहने वाले फिलिस्तीनी हिजबुल्लाह का साथ देंगे। इस इलाके में यहूदियों की घटती आबादी के चलते यहां घर, स्कूल, दुकानें सब खाली पड़ी हैं।
Continue reading on the app
दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश अमेरिका और चाइना इन दिनों एक बेहद रहस्यमई और चिंताजनक ट्रेंड से जूझ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में करीब 20 टॉप वैज्ञानिक जो अचानक गायब हो गए या तो किसी संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी जान चली गई। ये कोई आम वैज्ञानिक नहीं थे। ये वो लोग थे जो एआई, हाइपरसोनिक मिसाइल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और स्पेस डिफेंस जैसे हाई प्रोफाइल और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है ना कि क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश छिपी है? सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका की। तो रिपोर्ट जो आ रही हैं वह बता रही हैं कि अमेरिका में कम से कम 11 ऐसे मामले सामने आए जहां वैज्ञानिक या तो रहस्यमई तरीके से गायब हुए या फिर उनकी संदिग्ध हालात में जान चली गई। इस मामले की जांच खुद फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी कि एफबीआई कर रही है।
एफबीआई ऊर्जा विभाग, रक्षा विभाग और लोकल एजेंसियों के साथ मिलकर इन केसों के बीच कोई कड़ी तलाशने की कोशिश कर रही है। अब कुछ बड़े केस देख लीजिए। विलियम नील मैकसलैंड रिटायर्ड मेजर जनरल न्यू मेक्सिको से अचानक गायब। मोनिका रेजा एरोस्पेस इंजीनियर ट्रैकिंग के दौरान लापता मेलिसा केसियास लॉस एलामोस से जुड़ी कर्मचारी साल 2025 से गायब। इसके अलावा कुछ और भी मामले हैं जिनमें साइंटिस्टों की जान चली गई। जैसे कि नूनो लुरेरो एमआईटी प्रोफेसर घर के बाहर गोली मारकर उनकी जान ले ली गई। कार्ल ग्रिल मायर कैलटेक के वैज्ञानिक संदिग्ध हालात में उनकी जान चली गई। इसके अलावा इन घटनाओं ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे गंभीर मामला बताया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह महज संयोग हो सकता है।
वहीं रिपब्लिकन नेता एरिक ने इसे संभावित विदेशी ऑपरेशन करार दिया है। तो अभी तक आपने सुना कि कुल कितने वैज्ञानिक या तो रहस्यमई हालात में गायब हुए या फिर उनकी जान चली गई। लेकिन अब जो सबसे बड़ी खबर वो यह है कि 29 वर्षीय नासा के एरोस्पेस टेक्नोलॉजीस जोशुआ लेबल के मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। जिसके बाद एफबीआई के होश उड़ गए। और यह रिपोर्ट हम आपको न्यूयॉर्क पोस्ट के हवाले से बता रहे हैं। जिसमें बताया गया है कि जोशुआ की कार स्थानीय समय अनुसार दोपहर लगभग 2:45 पर रेलिंग और कई पेड़ों से टकराने के बाद बुरी तरह जलकर पहचान से परे हो गई और इससे पहले सुबह उनके परिवार ने उनके लापता होने की सूचना दी थी क्योंकि वह अपने काम पर नहीं पहुंचे थे। परिवार ने उस समय दावा किया था कि जोशुआ का अपहरण हो गया होगा क्योंकि वह अपना फोन और बटुआ घर पर छोड़कर गए थे।
Continue reading on the app