दुनिया के दो सबसे ताकतवर देश अमेरिका और चाइना इन दिनों एक बेहद रहस्यमई और चिंताजनक ट्रेंड से जूझ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में करीब 20 टॉप वैज्ञानिक जो अचानक गायब हो गए या तो किसी संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी जान चली गई। ये कोई आम वैज्ञानिक नहीं थे। ये वो लोग थे जो एआई, हाइपरसोनिक मिसाइल, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और स्पेस डिफेंस जैसे हाई प्रोफाइल और संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है ना कि क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश छिपी है? सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका की। तो रिपोर्ट जो आ रही हैं वह बता रही हैं कि अमेरिका में कम से कम 11 ऐसे मामले सामने आए जहां वैज्ञानिक या तो रहस्यमई तरीके से गायब हुए या फिर उनकी संदिग्ध हालात में जान चली गई। इस मामले की जांच खुद फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी कि एफबीआई कर रही है।
एफबीआई ऊर्जा विभाग, रक्षा विभाग और लोकल एजेंसियों के साथ मिलकर इन केसों के बीच कोई कड़ी तलाशने की कोशिश कर रही है। अब कुछ बड़े केस देख लीजिए। विलियम नील मैकसलैंड रिटायर्ड मेजर जनरल न्यू मेक्सिको से अचानक गायब। मोनिका रेजा एरोस्पेस इंजीनियर ट्रैकिंग के दौरान लापता मेलिसा केसियास लॉस एलामोस से जुड़ी कर्मचारी साल 2025 से गायब। इसके अलावा कुछ और भी मामले हैं जिनमें साइंटिस्टों की जान चली गई। जैसे कि नूनो लुरेरो एमआईटी प्रोफेसर घर के बाहर गोली मारकर उनकी जान ले ली गई। कार्ल ग्रिल मायर कैलटेक के वैज्ञानिक संदिग्ध हालात में उनकी जान चली गई। इसके अलावा इन घटनाओं ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे गंभीर मामला बताया। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह महज संयोग हो सकता है।
वहीं रिपब्लिकन नेता एरिक ने इसे संभावित विदेशी ऑपरेशन करार दिया है। तो अभी तक आपने सुना कि कुल कितने वैज्ञानिक या तो रहस्यमई हालात में गायब हुए या फिर उनकी जान चली गई। लेकिन अब जो सबसे बड़ी खबर वो यह है कि 29 वर्षीय नासा के एरोस्पेस टेक्नोलॉजीस जोशुआ लेबल के मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। जिसके बाद एफबीआई के होश उड़ गए। और यह रिपोर्ट हम आपको न्यूयॉर्क पोस्ट के हवाले से बता रहे हैं। जिसमें बताया गया है कि जोशुआ की कार स्थानीय समय अनुसार दोपहर लगभग 2:45 पर रेलिंग और कई पेड़ों से टकराने के बाद बुरी तरह जलकर पहचान से परे हो गई और इससे पहले सुबह उनके परिवार ने उनके लापता होने की सूचना दी थी क्योंकि वह अपने काम पर नहीं पहुंचे थे। परिवार ने उस समय दावा किया था कि जोशुआ का अपहरण हो गया होगा क्योंकि वह अपना फोन और बटुआ घर पर छोड़कर गए थे।
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल इन दिनों कुछ ऐसा है कि वह इसकी टोपी उसके सर वाली रणनीति पर काम कर रहा है और उधार लेकर उधार चुकाने का कारनामा पाकिस्तान इन दिनों करता दिख रहा है और यह कोई मजाक नहीं बल्कि आधिकारिक जानकारी है। हाल ही में पाकिस्तान ने यूनाइटेड अरब एमिरेट्स यानी यूएई को लगभग 2 बिलियन का कर्ज वापस लौटा दिया है। सुनने में कितना अच्छा लगता है कि पाकिस्तान ने कर्ज चुका दिया। लेकिन इसकी असली कहानी यहीं शुरू होती है। दरअसल पाकिस्तान के पास कर्ज चुकाने के लिए इतने पैसे थे ही नहीं। कर्ज चुकाने के लिए उसे कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब से 2 बिलियन का नया कर्ज लेना पड़ा है। यानी एक जेब से पैसा आया और दूसरी जेब में चला गया। इस नए कर्ज को मांगने के लिए खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपना कटोरा लेकर सऊदी अरब पहुंचे और वहां पर मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की। इसके साथ ही इस मुलाकात में पाकिस्तान ने ना सिर्फ पैसे मांगे बल्कि इससे पहले जो कर्ज ले रखा है सऊदी अरब से उसको चुकाने के लिए मोहलत बढ़ाने की भी मांग कर दी। यानी कि नया कर्ज तो मांगा ही मांगा। पुराना चुकाने के लिए वक्त भी मांगा है शबाज शरीफ।
पहले सऊदी अरब से पाकिस्तान को पैसे मिले। फिर पाकिस्तान ने उसी पैसे से यूएई का कर्ज चुका है और इन सब की जानकारी स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने खुद दी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बताया कि कुल $3.45 बिलियन डॉलर यूएई को वापस कर दिए गए हैं। इसमें से 1 बिलियन 23 अप्रैल को और बाकी पिछले हफ्ते चुका दिया गया था। पाकिस्तान के पास इस वक्त पैसों की इतनी कमी है कि पाकिस्तान ने $500 मिलियन यूरो बॉन्ड जारी करके भी कुछ पैसे जुटाए हैं। यानी हालात ऐसे हैं कि जहां से अभी मौका बन पा रहा है पाकिस्तान वहां से पैसे उठाए जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान इस वक्त कर्ज घुमाओ योजना पर चल रहा है और इसी की वजह से वो इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लागू कर रहा है। यानी एक तरफ उसने सऊदी अरब से कर्ज मांगा और कर्ज मांगते ही उसे तुरंत यूएई को लौटा दिया। यह ठीक क्रेडिट कार्ड वाले स्कैम की तरह नजर आता है। जहां कुछ लोग क्रेडिट कार्ड तो ले लेते हैं, लेकिन उसका पैसा दे नहीं पाते, तो वह क्या करते हैं? वह एक नया क्रेडिट कार्ड लेते हैं और क्रेडिट कार्ड के इस लूप में ही घूमते रहते हैं।
पुराने क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए नए क्रेडिट कार्ड से लोन लेंगे। फिर उसका कर्ज चुकाएंगे और यह लूप जारी रहेगा और पाकिस्तान इस लूप का अंतरराष्ट्रीय लेवल पर इस्तेमाल कर रहा है। आपको बता दें कि पाकिस्तान में इस वक्त विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है और ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय दायित्व पूरा करने के लिए पाकिस्तान को बार-बार बाकी देशों से मदद मांगनी पड़ती है। मदद क्या इसे भीख ही कहिए। अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान आखिर कब तक ऐसे ही उधार लेकर सिस्टम को चलाता चलेगा। क्या वो कभी अपने दम पर भी अपने आप को आर्थिक स्थिरता दिला पाएगा? खैर ऐसा होता तो दिख नहीं रहा है। पर क्या यह एक फाइनेंशियल मैनेजमेंट है? आप पाकिस्तान के इस इसकी टोपी उसके सर वाली स्कीम को लेकर क्या राय रखते हैं? हमें अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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