जापान के जंगलों में तेजी से फैल रही आग, करीब 1,200 हेक्टेयर इलाका जलकर राख
टोक्यो, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। जापान के जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके इवाते में लगी जंगल की आग पर अभी भी काबू नहीं पाया जा सका है। स्थायीन समय के हिसाब से शुक्रवार सुबह तक लगभग 1,200 हेक्टेयर इलाका जल गया है।
जापान के क्योडो न्यूज के मुताबिक, ओत्सुची टाउन के पहाड़ी इलाके में बुधवार को लगी आग ने रिहायशी घरों समेत आठ बिल्डिंग्स को तबाह कर दिया है। ओत्सुची ने करीब 2,600 लोगों को खाली करने के ऑर्डर दिए हैं, जो शहर की आबादी का करीब एक चौथाई हिस्सा हैं।
आग पर काबू पाने के लिए इवाते प्रीफेक्चरल सरकार और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के हेलीकॉप्टर को जंगल में पानी गिराने के काम के लिए लगाया गया था। पूरे इलाके में अग्निशमन विभाग के लोगों को तैनात किया गया था।
होक्काइडो, यामागाटा, फुकुशिमा, तोचिगी और निगाटा इलाकों से भी आग बुझाने में मदद मांगी गई है।
इसके अलावा, सोमवार को उत्तर-पूर्वी जापान में आए 7.7 मैग्नीट्यूड के भूकंप के बाद, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इवाते समेत सात इलाकों की 182 नगर पालिकाओं के लिए एक हफ्ते का खास भूकंप अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आग पर काबू पाने के दौरान भूकंप के खतरों के लिए सावधान रहने की जरूरत है।
जापान में खास तौर पर सर्दियों के आखिर और वसंत की शुरुआत में मौसम काफी शुष्क रहता है। इस दौरान, पेड़-पौधे सूख जाते हैं, जिसकी वजह से जंगलों में बहुत ज्यादा आग पकड़ने की संभावना हो जाती है। शुष्क मौसम में नमी की मौजूदगी नाम मात्र भी नहीं होती है। इसकी वजह से जंगलों में आग के तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
जंगलों में आग लगने और तेजी से बढ़ने की एक और खास वजह जापान की जगह और पेड़-पौधे हैं। यहां का बड़ा हिस्सा जंगलों से ढका है, जिनमें से कई में देवदार और चीड़ जैसे शंकुधारी पेड़ हैं। इन पेड़ों में रेजिन होता है जो आसानी से जल जाता है, जिससे उनमें आग लगने और उसे झेलने का खतरा ज्यादा होता है। घने जंगल होने का मतलब यह भी है कि एक बार आग लगने के बाद, यह तेजी से लगातार पेड़-पौधों में फैल सकती है।
हालांकि, मानवीय चूक भी आग लगने की एक वजह हो सकती है। बिना देखरेख के कैंपफायर, खेती की चीजों में आग लगना, फेंकी हुई सिगरेट या इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण की चिंगारी भी आग लगने की वजह हो सकती है। जापान की ज्यादातर आबादी जंगल वाले इलाकों के पास रहती है, इसलिए इंसानों की बस्तियों और प्रकृति के बीच के कनेक्शन से आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
--आईएएनएस
केके/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
लगातार तीसरे दिन लाल निशान में बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसले, आईटी सेक्टर 5 प्रतिशत गिरा
मुंबई, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के बढ़ने से बाजार की भावना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 999.79 अंकों यानी 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,664.21 पर ट्रेड करते नजर आया, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 275.10 (1.14 प्रतिशत) अंक फिसलकर 23,897.95 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77,483.80 पर खुलकर 1,260 अंक या 1.6 प्रतिशत गिरकर 76,403.87 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,100.55 पर खुलकर 359 अंक या 1.5 प्रतिशत गिरकर 23,813.65 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसमें निफ्टी मिडकैप में 0.96 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जिनमें निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 5.29 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी मीडिया में 1.87 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.77 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.35 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर में 1.49 प्रतिशत निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.72 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.73 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी 50 पैक में कोल इंडिया, ट्रेंट, हिंडाल्को, नेस्ले इंडिया, श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई और आयशर मोटर के शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, सन फार्मा और एसबीआई लाइफ के शेयरों में 6.9 प्रतिशत से 3.2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, यह सप्ताह बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ है। पश्चिम एशिया में सीजफायर को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालांकि लेबनान-इजरायल सीजफायर का विस्तार और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत जैसे कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन कुल मिलाकर तनाव और बढ़ने का खतरा अभी भी बना हुआ है। घरेलू स्तर पर आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट, रुपए की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी 50 कमजोर रुख के साथ बंद हुआ। दिन के पहले हिस्से में लगातार बिकवाली के चलते यह 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे गिरावट और तेज हो गई। इसके बाद यह 23,800 के स्तर तक पहुंचा, जहां इसे कुछ सपोर्ट मिला और अंत में हल्की रिकवरी करते हुए 23,900 के आसपास बंद हुआ। तकनीकी संकेतकों के अनुसार, निफ्टी अपने 20-दिवसीय ईएमए के नीचे आ गया है, जो शॉर्ट टर्म कमजोरी का संकेत है। वहीं आरएसआई भी 60 के करीब से गिरकर 50 के नीचे आ गया है, जो बाजार में कमजोर पड़ती ताकत को दिखाता है।
एक्सपर्ट ने कहा कि आने वाले समय के लिए 23,800 का स्तर अहम सपोर्ट बना हुआ है, जबकि 24,000 अब एक मजबूत रेजिस्टेंस बन गया है। अगर निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूती से जाता है तो 24,200 तक रिकवरी संभव है, लेकिन अगर यह 23,800 के नीचे फिसलता है तो गिरावट बढ़कर 23,600 तक जा सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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