भारतीय कंपनियों की आय वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 8.5 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान: रिपोर्ट
मुंबई, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय कंपनियों की आय वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8-8.5 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में दी गई।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में आय वृद्धि सालाना आधार पर 8.5-9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इसकी वजह जीएसटी में कटौती के कारण ऑटोमोबाइल और व्हाइट गुड्स की मजबूत वॉल्यूम होना है।
रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही की अपेक्षा वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में आय में अनुमानित कमी की वजह पश्चिम एशिया में तनाव होना है, जिससे कीमत बढ़ने के कारण मांग पर असर हो सकता है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के दौरान इस क्षेत्र से सीधे जुड़े सेक्टर्स में संघर्ष का प्रभाव पहले से ही दिखाई दे रहा था।
इस संघर्ष का प्रभाव आने वाली तिमाही विशेषकर वित्त वर्ष 27 की पहली दो तिमाही में और अधिक देखने को मिलेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए, ऊर्जा, व्यापार और रेमिटेंस चैनलों के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है, जिससे अर्थव्यवस्था लंबे समय तक चलने वाले व्यवधानों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 89 प्रतिशत आवश्यकताओं का आयात करता है, जिसमें से लगभग 46 प्रतिशत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।
देश अपनी लगभग आधी जरूरतों के लिए एलपीजी के आयात पर भी निर्भर है, जिसमें से आधे से अधिक इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के मामले में संवेदनशीलता और भी अधिक है, जहां आयात घरेलू मांग का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पूरा करता है और अधिकांश खेप होर्मुज से होकर गुजरती है।
ऊर्जा के अलावा, पश्चिम एशिया भारत के लिए एक प्रमुख आर्थिक गलियारा है, जो वस्तुओं के निर्यात का लगभग 13 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रत्न और आभूषण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्र, साथ ही चावल और मांस जैसी प्रसंस्कृत खाद्य श्रेणियां, इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर हैं।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिका ने ग्लोबल स्वास्थ्य फंडिंग में की भारी कटौती, फैमिली प्लानिंग के लिए मदद खत्म; महिलाओं पर पड़ा बुरा असर
वाशिंगटन, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका ने 2025 और 2026 में स्वास्थ्य सुविधाओं की फंडिंग में काफी कटौती की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएआईडी) ने 5300 से ज्यादा अनुदानों और अनुबंधों को समाप्त कर दिया। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, इसका असर महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में एचआईवी से संबंधित सेवाओं की फंडिंग में भी कटौती की है।
अमेरिकी मीडिया सीएनएन के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी देश की नर्स केफिन ओजुंगा ने कहा कि पिछले साल अमेरिका सहायता प्रोग्राम में भारी कटौती के कारण वहां महिलाओं के लिए हालात काफी खराब हो गए।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी फंडिंग की वजह से मोबाइल क्लीनिक के जरिए मुफ्त बर्थ कंट्रोल, मैटरनिटी चेकअप और इससे संबंधित अन्य दूसरी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में आसानी होती थी। चूंकि ट्रंप सरकार के आदेश पर यूएसएआईडी ने अचानक से फंडिग को खत्म कर दिया। इसके साथ ही फैमिली प्लानिंग के लिए जो फंड दिए जाते थे, उनमें भी कटौती की जाने लगी।
सीएनएन ने पिछले छह महीनों में छह देशों में कई मेडिकल प्रोवाइडर्स और नॉन-प्रॉफिट्स से बात की है। इन लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों की छंटनी, बर्थ कंट्रोल की बहुत ज्यादा कमी और सप्लाई चेन की लगातार चुनौतियों को हालात को और खराब करने वाले फैक्टर्स बताया। दूर-दराज के इलाकों में महिलाओं के पास बहुत कम विकल्प हैं। ऐसे में अमेरिकी फंडिंग में कटौती का बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
अमेरिका की इस कटौती का असर फैमिली प्लानिंग से जुड़ी दवाओं के लिए भी एक संकट है। इंटरनेशनल प्लांड पेरेंटहुड फेडरेशन का अनुमान है कि फंडिंग में कटौती की वजह से दुनिया भर में करीब 1,400 मेडिकल क्लिनिक बंद हो गए हैं, जिससे 2025 में 9 मिलियन लोगों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाएंगी।
इस कटौती करने के बाद ट्रंप सरकार ने अब वित्तीय वर्ष 2027 के लिए बजट अपील में विश्व स्वास्थ्य कार्यक्रम में और भी कटौती का प्रस्ताव दिया है। इससे फंडिंग में अरबों डॉलर की कमी आएगी और खास तौर पर सभी रिप्रोडक्टिव हेल्थ प्रोग्राम खत्म हो जाएंगे।
बजट प्रस्ताव में कहा गया है कि व्हाइट हाउस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी फंडिंग बर्थ कंट्रोल तक बिना रोक-टोक के पहुंच का समर्थन न करे। राष्ट्रपति ट्रंप की बजट अपील मानने लायक नहीं है, क्योंकि कांग्रेस फंडिंग को मंजूरी देती है, लेकिन यह सरकार की खर्च की प्राथमिकता का संकेत है।
--आईएएनएस
केके/एएस
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