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पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ खेल चुके हैं सचिन तेंदुलकर, कम ही लोग जानते हैं ये बात

Sachin Tendulkar Birthday Special: भारतीय पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर 24 अप्रैल को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं. सचिन के जन्मदिन पर उन्हें हर तरफ से बधाई मिल रही है और सोशल मीडिया पर तो मानो बधाईयों का तांता लगा हुआ है. मास्टर-ब्लास्टर सचिन जब मैदान पर उतरा करते थे, तो लोग एक टक उन्हें देखते थे और अब उन्हें संन्यास लिए एक सदी से भी अधिक वक्त बीत चुका है, लेकिन आज भी उनकी पॉपुलैरिटी में कोई कमी नहीं आई है बल्कि वक्त के साथ बढ़ती ही जा रही है. ऐसे में आइए दिग्गज के जन्मदिन पर हम आपको एक दिलचस्प किस्से के बारे में बताते हैं कि सचिन तेंदुलकर पाकिस्तान की ओर से मैदान पर उतर चुके हैं.

पाकिस्तान के खिलाफ ही किया था इंटरनेशनल डेब्यू

इंटरनेशनल क्रिकेट में सैंकड़ों ऐसे रिकॉर्ड हैं, जो आज भी सचिन तेंदुलकर के नाम पर दर्ज हैं. उन्हें क्रिकेट के भगवान के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि आज भारतीय क्रिकेट जिस मुकाम पर है, उसे यहां तक पहुंचाने में मास्टर-ब्लास्टर का काफी योगदान रहा है. भारत के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने वर्ष 1989 में कराची में कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल डेब्यू किया था, लेकिन बहुत कम लोगों खो को मालूम होगा कि सचिन को एक बार पाकिस्तान टीम के लिए भी मैदान पर उतरना पड़ा था, वो भी भारतीय टीम के खिलाफ.  

पाकिस्तान की ओर से सचिन तेंदुलकर कब मैदान पर उतरे?

अब आप सोच रहे होंगे कि भला सचिन तेंदुलकर पाकिस्तान की ओर से क्रिकेट क्यों खेलेंगे? दरअसल, ये बात साल 1987 की है, जब सचिन तेंदुलकर का इंटरनेशनल डेब्यू भी नहीं हुआ था. उस साल पाकिस्तानी टीम पांच टेस्ट मैच और छह वनडे खेलने भारत दौरे पर आई हुई थी.

53 वर्षीय सचिन तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' में 1987 में भारत में पदार्पण से दो साल पहले पाकिस्तान के लिए मैदान में उतरने की घटना को याद किया.  तेंदुलकर लिखते हैं, मुझे नहीं पता कि इमरान खान को यह बात याद है. मुझे इस बात का अंदाजा है कि मैंने एक बार उनकी पाकिस्तान टीम के लिए फील्डिंग की थी. मास्टर ब्लास्टर आगे याद करते हैं कि पाकिस्तान के क्रिकेटर जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर लंच ब्रेक के दौरान मैदान से चले गए थे. स्टैंडबाय फील्डर के तौर पर सचिन को मेहमान टीम के लिए फील्डिंग करने को कहा गया.

कपिल देव का कैच लेने के लिए भी भागे

सचिन तेंदुलकर ने एक घटना का भी जिक्र किया है कि कैसे उन्होंने उस मैच में भारतीय क्रिकेटर कपिल देव का कैच लपकने की कोशिश की थी और उसके लिए दौड़ लगाई थी, लेकिन काफी दूर तक दौड़ने के बावजूद गेंद तक नहीं पहुंच सके. इस बात में कोई दोराय नहीं है कि सचिन पाकिस्तान के लिए खेले हैं, इस बारे में कम ही लोगों को मालूम है.

सचिन तेंदुलकर करते हैं सैकड़ों रिकॉर्ड्स पर राज

इंटरनेशनल क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के नाम आज भी सैकड़ों रिकॉर्ड्स दर्ज हैं. उन्होंने 100 शतक लगाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, जिसमें 51 टेस्ट और 49 वनडे शतक शामिल हैं. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 200 मैच खेलकर 15,921 रन बनाए, जो आज भी एक रिकॉर्ड है। वहीं वनडे में उन्होंने 18,426 रन बनाए, जो इस फॉर्मेट का सबसे बड़ा स्कोर है. सचिन तेंदुलकर वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज़ भी बने। उन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 200* रन बनाए. उनका करियर 24 साल तक चला, जो उनकी फिटनेस और निरंतरता को दर्शाता है.

उन्होंने 6 वर्ल्ड कप खेले और 2011 में भारत को विश्व कप जिताने वाली टीम का हिस्सा रहे. 2003 वर्ल्ड कप में उन्होंने 673 रन बनाकर टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. दिग्गज को भारत रत्न, पद्म विभूषण और पद्म श्री जैसे बड़े सम्मान से नवाजा गया है.

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विश्व मलेरिया दिवस : 'अब हम कर सकते हैं… अब हमें करना ही होगा' मलेरिया का उन्मूलन

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। एक ऐसी लड़ाई, जो दशकों से जारी है और अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। 25 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व मलेरिया दिवस इस बार सिर्फ जागरूकता का दिन नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक अवसर है, जहां विज्ञान, रणनीति और वैश्विक इच्छाशक्ति एक साथ खड़ी हैं। अभूतपूर्व गति से हो रही वैज्ञानिक प्रगति ने पहली बार यह भरोसा पैदा किया है कि हमारे ही जीवनकाल में मलेरिया का उन्मूलन संभव है।

नए टीके, प्रभावी उपचार, आधुनिक नियंत्रण उपकरण और मच्छरों के आनुवंशिक संशोधन जैसी उन्नत तकनीकें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इंजेक्शन जैसे नवाचार भी विकास के चरण में हैं, जबकि 25 देश पहले ही हर साल एक करोड़ बच्चों को टीकों के जरिए सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण के मोर्चे पर अगली पीढ़ी की मच्छरदानियां (नेक्स्ट जेनरेशन मॉसक्विटो नेट) अब 84 प्रतिशत वितरण में शामिल हैं और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम जमीनी बदलाव ला रहे हैं। यह वह क्षण है, जब उम्मीद पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आ रही है।

इसी पृष्ठभूमि में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने साझेदारों के साथ मलेरिया का उन्मूलन करने के लिए प्रतिबद्ध: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा। अभियान की शुरुआत की है, जो केवल एक नारा नहीं बल्कि एक वैश्विक आह्वान है। यह दुनिया को याद दिलाता है कि समय हमारे पक्ष में है, लेकिन निर्णायक कदम उठाने की जरूरत अभी है। पिछले दो दशकों में मिली सफलताएं इस विश्वास को और मजबूत करती हैं। वर्ष 2000 से अब तक लाखों मामलों और करोड़ों मौतों को टाला जा चुका है।

47 देशों को मलेरिया-मुक्त घोषित किया जा चुका है, जिनमें हाल के वर्षों में भी नए देश शामिल हुए हैं। कई देशों में मामलों की संख्या हजार से नीचे आ गई है और ग्रेटर मेकांग उपक्षेत्र ने यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों और दवा प्रतिरोध के बावजूद भी लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट हासिल की जा सकती है। फिर भी, यह तस्वीर पूरी तरह आश्वस्त करने वाली नहीं है। 2000 से 2024 के बीच मलेरिया-ग्रस्त देशों की संख्या में गिरावट जरूर आई है और कम मामलों वाले देशों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्थिति ठहरी हुई सी है।

2024 में अनुमानित 282 मिलियन मामले और 6 लाख 10 हजार मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी वृद्धि को दर्शाती हैं। यह संकेत है कि प्रगति के बावजूद खतरा टला नहीं है। विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2025 इस बात को और स्पष्ट करती है कि उपलब्धियां खतरे में हैं और चुनौतियां जटिल होती जा रही हैं।

दवा प्रतिरोध एक गंभीर चिंता बनकर उभर रहा है, जहां अफ्रीका के कई देशों में आर्टेमिसिनिन के प्रति आंशिक प्रतिरोध सामने आया है और इसके फैलने का खतरा बना हुआ है। कीटनाशकों के प्रति मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। वित्तीय संसाधनों की भारी कमी, वैश्विक स्वास्थ्य सहायता में कटौती और जलवायु परिवर्तन, संघर्ष तथा मानवीय संकट जैसी परिस्थितियां इस लड़ाई को और कठिन बना रही हैं।

इसके बावजूद उम्मीद के कई उजले बिंदु सामने हैं। नई पीढ़ी के अधिक प्रभावी मच्छरदानियों का तेजी से विस्तार हुआ है, टीकाकरण अभियान लाखों बच्चों को सुरक्षा दे रहे हैं और मौसमी तथा बारहमासी रासायनिक रोकथाम कार्यक्रम करोड़ों बच्चों तक पहुंच चुके हैं। अब पहले की तुलना में ज्यादा बच्चों का समय पर परीक्षण हो रहा है और उन्हें प्रभावी दवाएं मिल रही हैं, जिससे मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिल रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व और स्थानीय जरूरतों के अनुसार रणनीतियों का निर्माण इस लड़ाई की नींव है। वैश्विक साझेदारों के बीच स्थिर और समन्वित सहयोग ही दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित कर सकता है, जबकि अनुसंधान और नवाचार में निवेश नई चुनौतियों से निपटने का रास्ता खोलता है। सबसे अहम भूमिका समुदायों की है, जिन्हें सशक्त बनाकर इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाना होगा।

आज जब हमारे पास साधन, तकनीक और ज्ञान मौजूद हैं, तो यह सवाल और भी प्रासंगिक हो जाता है कि आखिर मलेरिया से किसी की जान क्यों जाए। विश्व मलेरिया दिवस 2026 इसी सोच को केंद्र में रखता है, यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक निर्णायक संदेश है कि अगर हम अभी नहीं जागे, तो यह अवसर हाथ से निकल सकता है। लेकिन अगर हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो मलेरिया का अंत केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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38.295 करोड़... सचिन की आईपीएल में कितनी थी सैलरी, एक मैच से कितनी करते थे कमाई, आइकन प्लेयर के बाद बने मेंटर

Sachin Tendulkar Earn Per IPL Match: आईपीएल के 'आइकन प्लेयर' से लेकर 'क्रिकेट के भगवान' बनने तक, सचिन तेंदुलकर की विरासत आज भी बेमिसाल है. साल 2008 से 2013 के बीच मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हुए सचिन ने न केवल करोड़ों का अनुबंध हासिल किया, बल्कि वानखेड़े के मैदान पर रनों का अंबार भी लगाया. 34,357 इंटरनेशनल रनों और 100 शतकों के ऐतिहासिक सफर के साथ, जानिए उनकी मैच फीस, आईपीएल की कमाई और उस महान करियर के दिलचस्प आंकड़े जिसने क्रिकेट की परिभाषा बदल दी. Fri, 24 Apr 2026 17:04:01 +0530

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