Social Media Ban: अब इस देश में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगने वाला है प्रतिबंध, संसद से पास हो गया बिल
Social Media Ban: अब तुर्किये भी दुनिया के उन देशों की सूची में शामिल होने जा रहा है, जहां बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है. तुर्किये की संसद ने बुधवार देर रात एक विधेयक पारित किया, जिसमें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म तक पहुंच पर पाबंदी लगाने के प्रविधान शामिल हैं.
यह कदम बच्चों और किशोरों को खतरनाक आनलाइन गतिविधियों से बचाने की वैश्विक प्रवृत्ति के मद्देनजर उठाया गया है.यह विधेयक ऐसे समय पारित किया गया, जब हफ्तेभर पहले दक्षिणी तुर्किये के काहरामानमारस में एक स्कूल में गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें नौ छात्रों और एक शिक्षक की मौत हो गई थी.
इस घटना को 14 वर्षीय बच्चे ने अंजाम दिया था और उसकी भी मौत हो गई थी. पुलिस हमले की वजह जानने के लिए हमलावर की आनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है.
सरकारी न्यूज एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, संसद से पारित विधेयक के कानून बनने पर इंटरनेट मीडिया कंपनियों को आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी, पैरेंटल कंट्रोल टूल उपलब्ध कराने होंगे और हानिकारक मानी जाने वाली सामग्री पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी. अब इस विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की मंजूरी की आवश्यकता है, जिन्हें 15 दिनों के अंदर इस पर निर्णय लेना होगा.
सारे रिकॉर्ड ध्वस्त: बंगाल में 93% और तमिलनाडु में 85% ऐतिहासिक वोटिंग; ममता बोलीं- 'SIR के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा'
भारतीय चुनावी इतिहास में 23 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण और तमिलनाडु की सभी सीटों पर मतदाताओं ने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना राजनीतिक पंडितों ने भी नहीं की थी।
देर रात आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पहले फेज में रिकॉर्ड 93.12% और तमिलनाडु के इतिहास में सबसे ज्यादा 85.13% मतदान दर्ज किया गया है, बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बंपर वोटिंग को 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के जरिए वोट काटे जाने के विरोध में जनता का जवाब बताया है।
भारी गर्मी और छिटपुट हिंसा के बावजूद बंगाल की 152 सीटों और तमिलनाडु की 234 सीटों पर हुई यह वोटिंग सत्ता के गलियारों में बड़े उलटफेर की आहट दे रही है।
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 152 सीटों पर हुई 93% वोटिंग ने 2011 के 84.7% के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है, इस ऐतिहासिक वोटिंग के पीछे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' का मुद्दा सबसे बड़ा रहा, दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा करीब 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' बताया था।
मतदान के बाद ममता ने हुंकार भरते हुए कहा कि "SIR के जरिए बंगाल के लोगों का लोकतांत्रिक हक छीनने की कोशिश की गई, लेकिन जनता ने बूथों पर टूटकर पड़ते हुए भाजपा और आयोग की साजिश को नाकाम कर दिया है," मुर्शिदाबाद, कूचबिहार और बीरभूम जैसे जिलों में तो मतदान का प्रतिशत 94% के भी पार निकल गया है।
तमिलनाडु ने भी इस बार अपनी लोकतांत्रिक ताकत का लोहा मनवाया है, राज्य की सभी 234 सीटों पर एक साथ हुए मतदान में 85.13% लोगों ने भागीदारी की, जो 1951 के बाद से अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक युवाओं और महिलाओं का ऐसा जोश दिखा कि शाम 6 बजे के बाद भी हज़ारों लोग कतारों में खड़े थे।
तमिलनाडु में इस बार एमके स्टालिन की 'द्रविड़ मॉडल' और भाजपा-एआईएडीएमके गठबंधन की 'परिवर्तन की लहर' के बीच अभिनेता विजय की पार्टी (TVK) की एंट्री ने मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया, भारी मतदान के इस आंकड़े ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु की जनता इस बार निर्णायक फैसला सुनाने के मूड में है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों राज्यों में इस बार महिला मतदाताओं का प्रतिशत पुरुषों से 3 से 4 फीसदी अधिक रहा है, बंगाल में 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं और तमिलनाडु में महिला केंद्रित वादों ने साइलेंट वोटरों को घर से बाहर निकाला, वहीं 18-22 साल के करोड़ों युवा मतदाताओं ने बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों पर अपना फैसला ईवीएम में बंद किया है।
बंगाल में कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में सुबह 7 बजे से ही 2-2 किलोमीटर लंबी लाइनें लग गई थीं, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों के बढ़ते भरोसे और गुस्से दोनों का प्रतीक हैं।
भारी मतदान के बीच बंगाल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, फिर भी सिलीगुड़ी और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हुईं, पुलिस ने राज्य भर में चुनाव संबंधी हिंसा के लिए 41 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।
तमिलनाडु में मतदान प्रक्रिया तुलनात्मक रूप से शांतिपूर्ण रही, हालांकि कुछ जगहों पर ईवीएम खराब होने की शिकायतें मिलीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े स्तर पर मतदान होना यह दर्शाता है कि सुरक्षा बलों ने जनता के बीच विश्वास पैदा किया, जिसके कारण लोग बेखौफ होकर वोट डालने पहुँचे।
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