EC के नोटिस का कांग्रेस ने दिया जवाब:कहा- चुनाव आयोग की कार्रवाई दुर्भावना से प्रेरित, खड़गे ने मोदी को आतंकी कहा था
कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आतंकवादी बयान पर चुनाव आयोग को जवाब दिया है। पार्टी ने कहा कि इस मामले में न तो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन हुआ है और न ही किसी कानून का। कांग्रेस ने अपने जवाब में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का नोटिस “दुर्भावना से प्रेरित” है और इसे बिना सही जांच के जारी किया गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में कहा कि पार्टी को एक ही नंबर के दो अलग-अलग नोटिस मिले, जिन पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कहा कि एक नोटिस में शिकायतकर्ता के तौर पर TMC नेता डेरेक ओ ब्रायन का नाम है, जबकि दूसरे नोटिस में यह नाम हटा दिया गया है। इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। चुनावी व्यस्तता के बीच भी सिर्फ 24 घंटे का समय दिया कांग्रेस ने यह भी आपत्ति जताई कि जवाब देने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया, जो चुनावी व्यस्तता के बीच पर्याप्त नहीं है। पार्टी ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। पत्र में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों को भी MCC का उल्लंघन बताया और कहा कि इन मामलों में चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस का कहना है कि आयोग का रवैया “प्राकृतिक न्याय” के सिद्धांतों के खिलाफ है और वह इस मामले में निष्पक्षता नहीं दिखा रहा। खड़गे ने कहा था- मोदी आतंकवादी की तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में मंगलवार को कहा था ‘मोदी एक आतंकवादी की तरह हैं जो समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती।’ उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी लोगों और राजनीतिक पार्टियों को डरा रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह आतंकवादी हैं। मेरा मतलब है कि मोदी हमेशा धमकी देते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि PM मोदी लोगों और राजनीतिक पार्टियों को डरा रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह आतंकवादी हैं। मेरा मतलब है कि मोदी हमेशा धमकी देते हैं। चुनाव आयोग ने खड़गे से मांगा था जवाब चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था। यह नोटिस आयोग ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से शिकायतें मिलने के बाद जारी किया था। आयोग ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। ------------- ये खबर भी पढ़ें... मोदी को आतंकी कहने पर खड़गे को EC का नोटिस:कांग्रेस अध्यक्ष ने बयान पर सफाई भी दी थी चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। भाजपा ने आज पीएम मोदी को आतंकी कहने के मामले में चुनाव आयोग से खड़गे की शिकायत की थी। दरअसल खड़गे ने मंगलवार को चेन्नई में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी को आतंकी कहा था। पूरी खबर पढ़ें…
मणिपुर में मेइरा पाईबी की महिलाएं उतरीं सड़कों पर:दिन में रास्ते रोक कर धरना, रात में मशाल रैलियों से कानून-व्यवस्था संभाल रहीं
मणिपुर में बीते 7 अप्रैल को रॉकेट हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी। प्रदर्शनों में 3 मौतें हो गई थीं। तबसे विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अशांति के बीच 18 अप्रैल से पूर्ण बंद लागू है। सामान्य जीवन ठप है। इसी बीच अब मेइरा पाइबी समूह की महिलाएं सड़कों पर उतर आईं हैं। हजारों महिलाओं का यह समूह शांति-व्यवस्था के लिए न केवल सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि सामाजिक स्तर पर लोगों को भी जोड़ रहा है। ये महिलाएं दिन में रास्ते रोक रही हैं, धरना दे रही हैं। वहां से न पुलिस निकल सकती है, न कोई और। वहीं, रात में मशाल रैलियों से इलाकों की पहरेदारी भी कर रही हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया- घर संभालना, आंदोलन में जाना और रोजी-रोटी की चिंता, तीनों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और मैं हर चीज संतुलित कर रही हूं। बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी - लगातार बंद के कारण आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ख्वैरामबंद इमा मार्केट में कुछ महिला विक्रेता दुकानें खोलने को मजबूर हुई हैं। अनीता लौरेंबम ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि वे आंदोलन के खिलाफ हैं। वे इस काम के बाद आंदोलन में शामिल होंगी। - नागरिक संगठन ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ ने 25 अप्रैल को बड़े स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है। 46 सालों से सक्रिय है ‘मेइरा पाइबी’ - 80 के दशक में शराबखोरी और मादक पदार्थ की समस्या से निपटने के लिए यह आंदोलन बना। तब भी मशाल से गश्त की जाती थी। - उद्देश्य सामुदायिक भावना को बढ़ावा देना था, ताकि मुद्दे सुलझाने के लिए लोग मिलकर काम करें। - इस आंदोलन ने मानवाधिकारों के हनन, अफस्पा के तहत कार्रवाई के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया। - इरोम शर्मिला इस आंदोलन का सबसे उल्लेखनीय चेहरा रही हैं, जिनके आंदोलन ने दुनिया का ध्यान मणिपुर की ओर खींचा। अब समझें 6-7 अप्रैल को क्या हुआ… बम हमले में 2 बच्चों की मौत, फिर प्रदर्शनकारियों का CRPF कैंप पर हमला 6 अप्रैल को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मोइरांग ट्रोंगलाओबी इलाके में देर रात उग्रवादियों ने एक घर में बम फेंक दिया था। इसमें 5 साल के एक लड़के और छह महीने की बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि जब घर में बम फटा, तब बच्चे अपनी मां के साथ बेडरूम में सो रहे थे। इसके बाद भीड़ ने घटनास्थल से 100 मीटर दूर CRPF कैंप पर भी हमला कर दिया। जवाबी फायरिंग में 2 की मौत हो गई, पांच घायल हो गए। मणिपुर सरकार ने मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए, इंफाल वेस्ट, इंफाल ईस्ट, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सर्विस को 3 दिनों के लिए बंद कर दिया था। मणिपुर में एक साल तक राष्ट्रपति शासन लगा था, बाद में नए सीएम बने मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह 2025 के शुरुआती महीनों तक जारी रही। हिंसा के दौरान कई इलाकों में आगजनी, लूट और हत्याओं की घटनाएं हुईं। हजारों लोग विस्थापित हुए और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी, 2025 को इस्तीफा दे दिया था। दो साल से ज्यादा समय तक जारी हिंसा न रोक पाने के कारण उनपर लगातार राजनीतिक दबाव बन रहा था। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा था। बाद में वाई खेमचंद सिंह नए सीएम बने। ---------------------- मणिपुर से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मणिपुर में प्रदर्शनकारियों-सुरक्षा बलों में झड़प, आंसू गैस छोड़ी:मशाल रैली रोकने पर टकराव हुआ मणिपुर में शटडाउन के बीच रविवार रात कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। इंफाल ईस्ट के कोईरेंगेई, इंफाल वेस्ट के उरिपोक और कक्चिंग जिले में मशाल रैलियां निकाली गईं। कक्चिंग में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हुई। पूरी खबर पढ़ें…
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