Baglamukhi Jayanti 2026: आज है मां पीतांबरा का पावन दिन, जानें बगलामुखी जयंती का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Baglamukhi Jayanti 2026: सनातन धर्म के अनुसार, हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर बगलामुखी जयंती मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां बगलामुखी प्रकट हुईं थी. 10 महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी को आठवां स्थान प्राप्त है. इन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, बगलामुखी जयंती के दिन शास्त्र विधि से मां बगलामुखी का अभिषेक और पूजा करनी चाहिए. इनकी पूजा करने से वाणी सिद्ध हो जाती है. शत्रु और विरोधियों पर विजय प्राप्त होती है. हर तरह का दुख और रोग समाप्त हो जाते हैं.
मां बगलामुखी की पूजा क्यों करनी चाहिए?
मां बगलामुखी की कृपा से किसी तरह का भय नहीं रहता है. मां बगलामुखी तंत्र विद्या की देवी हैं. इन्हें ब्रह्मास्त्र विद्या भी कहा जाता है. मां बगलामुखी ने ही ब्रह्मा जी की बनाई हुई सृष्टि को अपने बल से स्तभन ( रोकना ) कर रखा है. ज्योतिष शास्त्र में इन्हें नवग्रह की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है. इनकी पूजा करने से कुंडली के सभी अशुभ ग्रह शुभ फल देने लगते हैं. आइए जानते हैं पूजा मुहूर्त और विधि.
बगलामुखी जयंती पूजा मुहूर्त
- आज लाभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 24 मिनट से सुबह 09 बजकर 02 मिनट तक रहेगा.
- अमृत मुहूर्त सुबह 09 बजकर 03 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा.
- शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक रहेगा.
- प्रदोष काल मुहूर्त शाम 06 बजकर 06 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
- लाभ मुहूर्त रात 09 बजकर 37 मिनट से रात 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा.
इन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होगा.
बगलामुखी की पूजा विधि
24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती के दिन आपको सूर्योदय से पहले स्नान कर व्रत संकल्प लेना है. इसके बाद स्वच्छ, शुद्ध पीले वस्त्र पहनकर पूजा करें. पीले रंग के आसन पर बैठकर पूजा करने बेहद शुभ होता है. मां बगलामुखी की पूजा में शुद्धि का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें. उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाएं, चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. चौकी पर मां बगलामुखी की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें. अब गंगाजल से उनका अभिषेक करें. हल्दी से तिलक लगाएं. पीले फूलों की माला पहनाएं. पीले फल, पपीता और बेसन के लड्डूओं का भोग लगाएं. अंत में श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. आरती के बाद बगलामुखी चालीसा और उनके स्तोत्र का पाठ करें. मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करें. आज के दिन ब्राह्मण और गरीबों को दान जरूर करें. पूरा दिन शांत भाव से व्यतीत करें. शाम को प्रदोष काल में फिर से मां बगलामुखी की पूजा करें.
मां बगलामुखी के मंत्र जाप करने की विधि
मां बगलामुखी के मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना बेहद शुभ होता है. हल्दी की माला न हो तो रुद्राक्ष की माला से जाप कर सकते हैं. इसके साथ ही मंत्र का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए. अशुद्ध उच्चारण के साथ मंत्र जाप करने से अशुभ फल प्राप्त होगा. इसलिए, उच्चारण में अशुद्धि की जरा भी शंका हो तो पहले किसी योग्य आचार्य के साथ बैठकर उच्चारण शुद्ध अवश्य करें.
बगलामुखी मूल मंत्र
ऊं ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशाय ह्रीं ऊं स्वाहा
बगलामुखी गायत्री मंत्र:
ऊं बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्
मां बगलामुखी की पूजा में भूलकर न करें ये गलती
- मां बगलामुखी की पूजा में शुद्धि का अवश्य ध्यान रखें.
- बगलामुखी जयंती के दिन क्रोध और गुस्सा करने से बचें.
- मांस-मदिरा का सेवन न करें.
- लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन करने से बचें.
- मंत्र जाप या स्तोत्र के पाठ का उच्चारण शुद्ध अवश्य होना चाहिए.
- अशुद्ध उच्चारण से पाठ या मंत्र जाप करने से अशुभ फल प्राप्त होगा.
- बाल और नाखून न काटें.
- ब्रह्मचर्य का पालन करें.
बगलामुखी जयंती का महत्व
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को माता बगलामुखी का जयंती पर्व मनाया जाता है. इस दिन विधि-विधान के साथ उनकी पूजा करना बेहद शुभ होता है. मां बगलामुखी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसके साथ ही ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं पर विजय मिलती है. नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त हो जाता है. वाणी सिद्ध हो जाती है. इनकी कृपा से हर तरह के संकट और कष्टों से छुटकारा मिल जाता है. ग्रहों की पीढा शांत होती हैं. साधक को सभी तरह के भय और डर से मुक्ति मिल जाती है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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