UP Homeguard Exam: होमगार्ड भर्ती परीक्षा को लेकर सरकार अलर्ट, CM Yogi ने की अधिकारियों के साथ बैठक
सीएम योगी आदित्यनाथ बुधवार देर शाम कई अलग-अलग मुद्दों को लेकर के उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए नज़र आए. कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई. होमगार्ड भर्ती परीक्षा और यूपी की कानून व्यवस्था सहित अलग-अलग मुद्दों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है. बैठक में उन्होंने 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 को होने वाली होमगार्ड भर्ती परीक्षा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए.
किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा
सीएम ने कहा कि होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती परीक्षा पहली बार पुलिस भर्ती एवं प्रणोती बोर्ड के माध्यम से आयोजित की जा रही है. ऐसे में सभी संबंधित अधिकारी विशेष सतर्कता बरते. जिन जनपदों में हाल ही में नए जिला अधिकारी तैनात हुए हैं, वह संबंधित मंडलायुक्त और एडीजी, आईजी स्तर के अधिकारियों के साथ समुचित समन्वय सुनिश्चित करें. सीएम योगी के निर्देश दिए कि परीक्षा की सुचिता और गोपनीयता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा.
तनाव संघर्ष भड़काने की कोशिश की जा रही है
परीक्षा में गड़बड़ी करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाए. वहीं कानून व्यवस्था को देखते हुए सीएम ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि कुछ जिलों में ऐसी सूचनाएं मिली है, जहां अराजक तत्वों की तरफ से जातीय तनाव संघर्ष भड़काने की कोशिश की जा रही है. सीएम ने कहा कि सभी अधिकारी सतर्क रहें और कानून व्यवस्था की स्थिति गड़बड़ ना हो इसके लिए पहले से जरूरी कारवाई करें. सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार देर शाम होमगार्ड भर्ती परीक्षा और यूपी की कानून व्यवस्था सहित अलग-अलग मुद्दों पर वीडियो
कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक किए.
भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रंप की विवादित टिप्पणी पर भारत ने जताई कड़ी आपत्ति
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पर दिए गए एक बयान पर उठे विवाद के बीच भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है।
विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को “बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय” बताते हुए कहा कि ये दोनों देशों के मजबूत और आपसी सम्मान पर आधारित रिश्तों को सही ढंग से नहीं दर्शातीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हमने उन टिप्पणियों को देखा है, और साथ ही उनके जवाब में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किए गए बाद के बयान को भी। ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय हैं। ये निश्चित रूप से भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को नहीं दर्शातीं; ये संबंध लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं।
भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब वह एक कार्यक्रम में जा रही थीं, तब उन्होंने ट्रंप का यह पोस्ट देखा। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को ‘नरक’ कहने और ऐसे बयान देने से बचा जाए।”
हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान ठीक नहीं हैं और इन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
अपने पोस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक लंबा संदेश शेयर किया, जिसमें उन्होंने जन्म से नागरिकता मिलने के नियम पर सवाल उठाए और कानूनी संस्थाओं, इमिग्रेंट्स और एशियाई-अमेरिकी समुदाय के कुछ हिस्सों की आलोचना की। उन्होंने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) को “गैंगस्टर आपराधिक संगठन” तक कह दिया और आरोप लगाया कि इसने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
पोस्ट में यह भी कहा गया कि जन्म से नागरिकता जैसे मुद्दे पर वकीलों के बजाय जनता को फैसला करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि “इस पर राष्ट्रीय स्तर पर वोट होना चाहिए, न कि कुछ वकील इसका फैसला करें।”
इमिग्रेशन को लेकर भी पोस्ट में कई बड़े और विवादित दावे किए गए। इसमें कहा गया कि “यहां जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या किसी और देश से यहां ले आता है।” साथ ही यह भी कहा गया कि “कैलिफोर्निया में गोरे लोगों को नौकरी नहीं मिलती, खासकर हाई-टेक कंपनियों में।”
ट्रंप के इन बयानों की तुरंत आलोचना शुरू हो गई। हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन ने कहा कि वह इस पोस्ट से “गहराई से परेशान” है। संगठन ने कहा कि इस तरह के नस्लभेदी और नफरत भरे बयान भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को निशाना बनाते हैं।
ट्रंप के पोस्ट में अमेरिकी कानूनी व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि “हम देश के भविष्य का फैसला कुछ वकीलों पर नहीं छोड़ सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उस समय लिखा गया था जब न हवाई यात्रा थी और न इंटरनेट, इसलिए आज के समय में इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना चाहिए।
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत मिलता है। यह मुद्दा लंबे समय से इमिग्रेशन बहस का हिस्सा रहा है। ज्यादातर कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, उसके माता-पिता की स्थिति चाहे जो भी हो, नागरिकता का हकदार होता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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