भारत के बदलाव की ताकत आर्थिक विकास, समृद्धि और सुरक्षा पर जोर: राजदूत क्वात्रा
वॉशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत में बदलाव की असली ताकत आर्थिक विकास, समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा से आ रही है।
वॉशिंगटन में द न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुख्य फोकस आर्थिक विकास और समृद्धि पर है… साथ ही हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी हैं, जैसे सीमा पार आतंकवाद।”
उन्होंने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ रही है। इसके साथ-साथ देश में कई बड़े बदलाव एक साथ हो रहे हैं।
क्वात्रा ने कहा कि पहला बड़ा बदलाव शासन (गवर्नेंस) में हो रहा है। उनके मुताबिक, सरकार पूरी तरह बदल रही है ताकि विकास का फायदा हर आम आदमी तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, बिना बैंक वाले लोगों को बैंकिंग से जोड़ना और उन्हें वित्तीय सुविधाएं देना, ये सब इस बदलाव का हिस्सा है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अब सुरक्षा के अलग-अलग पहलुओं पर एक साथ काम कर रही है जैसे ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा पर ताकि सीधे लोगों तक इसका फायदा पहुंचे।
दूसरा बड़ा बदलाव इंफ्रास्ट्रक्चर में है, जिसमें सड़कें, पुल जैसे फिजिकल ढांचे के साथ-साथ डिजिटल सिस्टम भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एक तरफ विकास का फायदा लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है, और दूसरी तरफ खुद विकास को आगे बढ़ाने का काम भी करता है।”
तीसरा बड़ा बदलाव तकनीक, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग में है। उन्होंने इसे एक ऐसा चक्र बताया जिसमें नई तकनीक से उत्पादन बढ़ता है और उत्पादन से फिर नई तकनीक को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हो रही प्रगति का जिक्र किया और कहा कि आज जो फैसले लिए जा रहे हैं, वो आने वाले दस साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर हैं।
क्वात्रा ने यह भी कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। अब चीजें पहले जितनी स्थिर नहीं रहीं, सप्लाई चेन में रुकावटें आ रही हैं, और कई देश टेक्नोलॉजी और संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “अब सिर्फ सस्ता होना काफी नहीं है… जरूरी है कि चीजें भरोसेमंद तरीके से मिलती भी रहें।”
इस माहौल में उन्होंने भारत-अमेरिका के रिश्ते को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में समान सोच है और इससे दोनों को फायदा होता है।
उन्होंने बताया कि रक्षा, तकनीक और व्यापार में सहयोग बढ़ रहा है। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 200 अरब डॉलर सालाना है, और इसे इस दशक के अंत तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईयू ने यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो का लोन मंजूर किया
ब्रुसेल्स, 23 अप्रैल, (आईएएनएस)। यूरोपीय संघ (ईयू) ने गुरुवार को यूक्रेन के लिए 90 बिलियन यूरो का लोन अंतिम रूप से मंजूर कर दिया है। ऐसा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने गुरुवार को बताया।
यूरोपीय परिषद ने कहा कि यह लोन दिसंबर 2025 में यूरोपीय परिषद की ओर से पहले ही तय कर दिया गया था। इसका इस्तेमाल 2026 और 2027 में यूक्रेन की सबसे जरूरी बजट और रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। इस लोन के साथ सख्त शर्तें भी जुड़ी हैं। यूक्रेन को कानून के शासन का पालन करना होगा, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाना भी शामिल है।
साइप्रस के वित्त मंत्री माकिस केरावनोस ने कहा कि इस लोन को लागू करने के लिए सभी जरूरी काम पूरे कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही पैसे मिलना शुरू हो जाएंगे, जिससे यूक्रेन की जरूरी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। यूरोपीय संघ यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में पूरी तरह खड़ा है।
यह पैसा यूक्रेन की जरूरतों के हिसाब से धीरे-धीरे दिया जाएगा, जिसे यूक्रेन खुद तय करेगा।
काउंसिल के मुताबिक, इसमें से 30 अरब यूरो सामान्य आर्थिक मदद के तौर पर दिए जाएंगे, जिससे सरकार अपने जरूरी खर्च चला सके। बाकी 60 अरब यूरो रक्षा उद्योग के लिए दिए जाएंगे, जिससे हथियार और रक्षा सामान खरीदा जा सकेगा।
एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि यूक्रेन में शांति लाने की ईयू की रणनीति दो हिस्सों पर आधारित है—एक, यूक्रेन को मजबूत करना और दूसरा, रूस पर दबाव बढ़ाना। उन्होंने कहा कि आज हमने दोनों दिशाओं में कदम आगे बढ़ाया है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप पूरी तरह एकजुट होकर यूक्रेन के साथ खड़ा है।
साथ ही परिषद ने रूस पर 20वां प्रतिबंध पैकेज भी मंजूर किया है, जिससे उसकी युद्ध करने की क्षमता कम होगी।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, इस 90 अरब यूरो के लोन का खर्च ईयू खुद उठाएगा, और यूक्रेन को इसे वापस चुकाने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि वह अभी कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 21 अप्रैल को एंटोनियो कोस्टा के साथ इस आर्थिक मदद को लेकर बातचीत भी की थी।
जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने मध्य पूर्व और खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा समझौतों पर भी चर्चा की है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन का ड्रोन आधारित सुरक्षा सिस्टम काफी खास है और कई यूरोपीय देशों के साथ इस पर सहयोग शुरू हो चुका है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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