ट्रंप के जन्म से नागरिकता वाले बयान पर विवाद, भारत के लिए टिप्पणी पर संगठनों ने जताई नाराजगी
वॉशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। इस पोस्ट में उन्होंने जन्म से मिलने वाली नागरिकता की आलोचना की और इमिग्रेंट्स व कुछ संगठनों पर निशाना साधा। इसके बाद भारतीय-अमेरिकी संगठनों और नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि ऐसे बयान नस्लवाद को बढ़ावा दे सकते हैं और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
अपने पोस्ट में ट्रंप ने एक लंबा संदेश शेयर किया, जिसमें उन्होंने जन्म से नागरिकता मिलने के नियम पर सवाल उठाए और कानूनी संस्थाओं, इमिग्रेंट्स और एशियाई-अमेरिकी समुदाय के कुछ हिस्सों की आलोचना की। उन्होंने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) को “गैंगस्टर आपराधिक संगठन” तक कह दिया और आरोप लगाया कि इसने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
पोस्ट में यह भी कहा गया कि जन्म से नागरिकता जैसे मुद्दे पर वकीलों के बजाय जनता को फैसला करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि “इस पर राष्ट्रीय स्तर पर वोट होना चाहिए, न कि कुछ वकील इसका फैसला करें।”
इमिग्रेशन को लेकर भी पोस्ट में कई बड़े और विवादित दावे किए गए। इसमें कहा गया कि “यहां जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है, और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या किसी और देश से यहां ले आता है।” साथ ही यह भी कहा गया कि “कैलिफोर्निया में गोरे लोगों को नौकरी नहीं मिलती, खासकर हाई-टेक कंपनियों में।”
ट्रंप के इन बयानों की तुरंत आलोचना शुरू हो गई। हिंदू अमेरिकन फ़ाउंडेशन ने कहा कि वह इस पोस्ट से “गहराई से परेशान” है। संगठन ने कहा कि इस तरह के नस्लभेदी और नफरत भरे बयान भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को निशाना बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि “अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर ऐसे बयान देना समाज में नफरत को और बढ़ाएगा, खासकर ऐसे समय में जब पहले से ही नस्लवाद और विदेशी लोगों के खिलाफ भावना बढ़ी हुई है।” संगठन ने ट्रंप से पोस्ट हटाने और एशियाई-अमेरिकियों के योगदान को समझने की अपील की।
भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब वह एक कार्यक्रम में जा रही थीं, तब उन्होंने ट्रंप का यह पोस्ट देखा। उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को ‘नरक’ कहने और ऐसे बयान देने से बचा जाए।”
हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान ठीक नहीं हैं और इन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
ट्रंप के पोस्ट में अमेरिकी कानूनी व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने कहा कि “हम देश के भविष्य का फैसला कुछ वकीलों पर नहीं छोड़ सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उस समय लिखा गया था जब न हवाई यात्रा थी और न इंटरनेट, इसलिए आज के समय में इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना चाहिए।
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत मिलता है। यह मुद्दा लंबे समय से इमिग्रेशन बहस का हिस्सा रहा है। ज्यादातर कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, उसके माता-पिता की स्थिति चाहे जो भी हो, नागरिकता का हकदार होता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत का बड़ा कदम, मालदीव को 30 अरब आईएनआर की मुद्रा विनिमय सहायता मंजूर
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने अपनी ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत मालदीव को आर्थिक रूप से समर्थन देते हुए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था’ के तहत 30 अरब आईएनआर की पहली निकासी को मंजूरी दी गई है, जिससे मालदीव की वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होगा।
मालदीव में भारतीय उच्चायोग के अनुसार, मालदीव के लोगों और सरकार को अपनी निरंतर आर्थिक और वित्तीय सहायता के हिस्से के रूप में भारत सरकार ने सार्क देशों के लिए मुद्रा विनिमय व्यवस्था के ढांचे के तहत 30 अरब आईएनआर की पहली निकासी को मंजूरी दे दी है। इस व्यवस्था के तहत मालदीव भारत से रुपये उधार लेकर अपनी आर्थिक स्थिति संभाल सकता है।
इस व्यवस्था पर भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़ू की भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
इससे पहले अक्टूबर 2024 में इसी व्यवस्था के तहत भी मालदीव ने 400 मिलियन यूएसडी लिए थे। जिसकी अवधि 23 अप्रैल 2026 को पूरी हो गई है।
2024-2027 की व्यवस्था के तहत, वर्तमान आईएनआर विनिमय सुविधा में ब्याज दरों और अन्य शर्तों के मामले में विभिन्न रियायतें शामिल हैं।
2012 में सार्क विनिमय ढांचे की शुरुआत के बाद से भारतीय रिजर्व बैंक ने मालदीव को कुल 1.1 अरब यूएसडी का विनिमय सहयोग प्रदान कर चुका है। मुद्रा विनिमय सुविधा मालदीव की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण तत्व साबित हुई है।
पिछले वर्ष भारत ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर आपातकालीन वित्तीय सहायता के रूप में मालदीव सरकार की ओर से जारी किए गए 100 मिलियन यूएसडी मूल्य के ट्रेजरी बिलों को आगे बढ़ाया (रोल-ओवर किया) था।
मालदीव भारत की पड़ोसी पहले नीति और विजन महासागर के तहत एक महत्वपूर्ण भागीदार है। एक मित्र पड़ोसी के रूप में भारत हमेशा मालदीव के लिए पहला मददगार रहा है।
इससे पहले इसी माह में मालदीव के अनुरोध पर भारत ने वर्ष 2026-27 के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को मंजूरी दे दी थी।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने एक विशेष द्विपक्षीय तंत्र के तहत वर्ष 2026-27 के लिए कुछ निश्चित मात्रा में आवश्यक वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दे चुका है। जिनमें अंडे, आलू, प्याज, चावल, गेहूं का आटा, चीनी, दालें, पत्थर की गिट्टी और नदी की रेत शामिल हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation



















