'स्टार्टअप इंडिया' से एमएसएमई सेक्टर को मिली नई रफ्तार, भारत बना दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। एमएसएमई स्टार्टअप इनोवेशन समिट के 5वें संस्करण में उद्योग जगत और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान पीएचडीसीसीआई के महासचिव रणजीत मेहता ने भारत में स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर की तेजी से हो रही प्रगति को रेखांकित किया और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए रणजीत मेहता ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। क्रेडिट गारंटी स्कीम, जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के जरिए मार्केट एक्सेस और एनएसआईसी व अन्य संस्थाओं के माध्यम से बनाए गए टेक्नोलॉजी हब्स ने स्टार्टअप्स को मजबूत आधार दिया है।
उन्होंने बताया कि जब 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी, तब देश में लगभग 400 स्टार्टअप्स थे। आज यह संख्या बढ़कर 1.5 लाख से ज्यादा हो गई है। इस तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम के चलते भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है।
मेहता ने एमएसएमई सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश में 1.1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां पैदा करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इस सेक्टर का लगातार मजबूत होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उनका प्रभाव तभी दिखेगा जब उन्हें जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू किया जाए। एमएसएमई केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जिले और ब्लॉक स्तर तक फैले हुए हैं। इसलिए राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को मिलकर इन उद्यमों को सहयोग देना होगा।
मेहता ने आगे बताया कि एमएसएमई सेक्टर के विकास के लिए जागरूकता अभियान चलाने और एमएसएमई क्लस्टर्स में मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत है। इससे छोटे उद्योगों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
उन्होंने समिट के आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम स्टार्टअप्स और एमएसएमई को प्रेरित करते हैं। आने वाले समय में यह सेक्टर और अधिक मजबूत होगा और भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कैपिटल हिल में पहलगाम हमले के पीड़ितों को याद किया गया
वॉशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। कैपिटल हिल में पहलगाम आतंकी हमले की घटना को याद किया गया, जहां भारत ने इस घटना की पहली बरसी पर एक प्रमुख प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने भाग लिया।
यह प्रदर्शनी 22 अप्रैल को भारतीय दूतावास द्वारा कैनन कॉकस कक्ष में आयोजित की गई। इसमें पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में हुए उस आतंकी हमले को याद किया गया, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी।
यह आयोजन कैपिटल हिल पर भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक था। इसमें अमेरिका की कांग्रेस के दोनों दलों के 19 सदस्य शामिल हुए, साथ ही 60 से अधिक कांग्रेस कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
इस कार्यक्रम में विदेशी मामलों, खुफिया, सशस्त्र सेवाएं, न्यायपालिका और होमलैंड सिक्योरिटी जैसी प्रमुख समितियों से जुड़े सांसदों की भागीदारी रही। इसके अलावा अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय मूल के लोग, छात्र, मीडिया प्रतिनिधि और थिंक टैंक से जुड़े लोग भी मौजूद थे।
प्रदर्शनी में इंटरैक्टिव डिस्प्ले, वीडियो और व्यक्तिगत अनुभवों को शामिल किया गया था, जिनके माध्यम से आतंकवाद के कारण व्यक्तियों, परिवारों और समाज पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को दर्शाया गया।
यह आयोजन पीड़ितों और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर संकल्प को मजबूत करने का भी प्रयास था।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने अपने संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा, “भारत किसी भी प्रकार के आतंक के आगे कभी नहीं झुकेगा,” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराया।
अमेरिकी सांसदों ने भारत के प्रति मजबूत एकजुटता व्यक्त की और आतंकवाद से निपटने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
दोनों दलों के सांसदों की भागीदारी ने आतंकवाद को लेकर साझा चिंता और समन्वित वैश्विक कार्रवाई की जरूरत पर व्यापक सहमति को दर्शाया।
भारतीय दूतावास ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए आतंकवाद के खिलाफ अधिक प्रभावी कदम उठाने का आह्वान भी है।
भारत लगातार वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदमों की मांग करता रहा है, जिसमें आतंक के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। आतंकवाद-रोधी सहयोग भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।
--आईएएनएस
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