Infosys Q4 Results: 21% उछला मुनाफा, रेवेन्यू में 13% की वृद्धि, निवेशकों को ₹25 प्रति शेयर डिविडेंड का तोहफा
मुंबई। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ साल-दर-साल आधार पर 21% बढ़कर ₹8,501 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। जबकि, पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹7,033 करोड़ था। राजस्व में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली है। कंपनी की कुल आय 13.4% बढ़कर ₹46,402 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹40,925 करोड़ थी। यह वृद्धि कंपनी के स्थिर बिजनेस मॉडल और बड़े डील्स की वजह से संभव हो पाई है।
डिविडेंड और निवेशकों के लिए बड़ी घोषणा
इंफोसिस ने अपने शेयरधारकों के लिए ₹25 प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड घोषित किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 10 जून 2026 तय की गई है, जबकि भुगतान 25 जून 2026 को किया जाएगा। यह निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अगर तिमाही-दर-तिमाही तुलना करें तो कंपनी का मुनाफा 28% बढ़ा है। तीसरी तिमाही में कंपनी का लाभ ₹6,654 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹8,501 करोड़ हो गया है। वहीं, राजस्व में भी करीब 2% की वृद्धि दर्ज की गई है।
वित्तवर्ष27 के लिए कंपनी का अनुमान
इंफोसिस ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी अपना आउटलुक जारी किया है। कंपनी को उम्मीद है कि उसकी आय में 1.5% से 3.5% तक की वृद्धि हो सकती है। ऑपरेटिंग मार्जिन 20% से 22% के बीच रहने का अनुमान है। चौथी तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 21% रहा, जो सालाना आधार पर स्थिर है, लेकिन तिमाही आधार पर इसमें सुधार हुआ है।
$5,040 मिलियन रही डॉलर इनकम
कंपनी की डॉलर में आय $5,040 मिलियन रही, जो पिछली तिमाही से 6.6% अधिक है, लेकिन सालाना आधार पर इसमें थोड़ी गिरावट देखी गई। नतीजों के बाद अमेरिकी बाजार में इंफोसिस के एडीआर (एडीआर) में गिरावट देखी गई। प्री-मार्केट ट्रेडिंग में शेयर करीब 5% तक गिर गया और लगभग $12.81 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कंपनी के सीईओ और एमडी सलील पारेख ने कहा कि FY26 में कंपनी का प्रदर्शन स्थिर और मजबूत रहा है।
स्थिर ग्रोथ जारी रखने में सफल रही कंपनी
चौथे वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने $14.9 बिलियन के बड़े सौदे हासिल किए, जो इसकी बाजार में मजबूती को दिखाते हैं। कंपनी की एआई आधारित सेवाओं की रणनीति को बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। एआई फर्स्ट फ्रेमवर्क और टोपाज जैसे प्लेटफॉर्म कंपनी को प्रतिस्पर्धा में आगे रखने में मदद कर रहे हैं। इंफोसिस के नतीजे यह दिखाते हैं कि कंपनी बदलते वैश्विक माहौल के बावजूद स्थिर ग्रोथ बनाए रखने में सफल रही है।
UPI Payments Tips: क्या UPI के लिए अलग बैंक अकाउंट जरूरी? जानिए इसके फायदे और नुकसान
UPI Payments Tips: डिजिटल भुगतान के दौर में यूपीआई ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी। अब छोटे से लेकर बड़े खर्च तक, हर लेन-देन कुछ सेकंड में हो जाता। लेकिन इसी सुविधा के साथ एक नया सवाल भी सामने आ रहा है कि क्या यूपीआई पेमेंट के लिए अलग बैंक खाता रखना जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर लोग एक ही बैंक खाते का इस्तेमाल करते, जिसमें सैलरी आती है और उसी से बिल, ट्रांसफर और यूपीआई पेमेंट भी होते। यह तरीका आसान जरूर लगता है, लेकिन इसमें जोखिम भी छिपा होता। अगर किसी वजह से फ्रॉड हो जाए या ऐप से जुड़ी कोई गड़बड़ी हो जाए, तो पूरा पैसा एक साथ खतरे में आ सकता।
यहीं पर अलग खाते का विकल्प काम आता। अगर यूपीआई के लिए अलग खाता रखा जाए, तो उसमें सिर्फ उतना ही पैसा ट्रांसफर किया जाता है, जितना रोजमर्रा के खर्च के लिए जरूरी। बाकी बचत दूसरे खाते में सुरक्षित रहती है। ऐसे में अगर कोई गड़बड़ी होती भी है, तो नुकसान सीमित रहता है और पूरा बैलेंस प्रभावित नहीं होता।
सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, यह तरीका खर्च पर नियंत्रण रखने में भी मदद करता। जब यूपीआई खाते में सीमित पैसा होता है, तो खर्च करते समय व्यक्ति को ज्यादा सतर्कता रहती। खाते में पैसा कम होने पर वह सोच-समझकर खर्च करता है, जिससे फालतू खर्च पर रोक लगती है। वहीं एक ही खाते में ज्यादा बैलेंस दिखने पर लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं।
हालांकि, अलग खाता रखने के कुछ नुकसान भी हैं। इसमें समय-समय पर पैसे ट्रांसफर करने पड़ते और दोनों खातों का बैलेंस मैनेज करना होता है। कुछ लोगों के लिए यह अतिरिक्त झंझट लग सकता है। इसलिए यह पूरी तरह व्यक्ति की जरूरत और आदत पर निर्भर करता है।
अगर आप यूपीआई का इस्तेमाल कभी-कभार करते हैं, तो अलग खाता रखने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन जो लोग रोजाना कई बार यूपीआई से भुगतान करते हैं, जैसे खाना, यात्रा या छोटी खरीदारी, उनके लिए यह तरीका ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, यह फैसला सुविधा और नियंत्रण के बीच संतुलन का है। अलग खाता रखने से जोखिम कम किया जा सकता है और खर्च पर बेहतर पकड़ बनाई जा सकती है।
(प्रियंका कुमारी)
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