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पीयूष गोयल ने कतर के विदेश व्यापार मामलों के मंत्री से बातचीत की, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर हुई चर्चा

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कतर के विदेश व्यापार मामलों के राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन मोहम्मद अल सईद से वर्चुअल बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर फोकस किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गोयल ने कहा, कतर के विदेश व्यापार मामलों के राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन मोहम्मद अल सैयद के साथ एक सार्थक वर्चुअल वार्ता आयोजित की गई।

हमने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। हम आने वाले समय में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए तैयार हैं।

गोयल की ओर यह बातचीत ऐसे समय पर की गई है, जब अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही पूरी तरह से बंद है और इससे बड़े स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान पैदा हुआ है। इसके कारण कतर समेत कई खाड़ी देश अपने पेट्रोलियम और अन्य उत्पादों का निर्यात नहीं कर पा रहे हैं।

दुनिया में होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।

हाल ही में इस पर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।

अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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हैदराबाद पुलिस कमिश्नर ने बैंकों से 'म्यूल अकाउंट' की संख्या शून्य सुनिश्चित करने का आग्रह किया

हैदराबाद, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर वी. सी. सज्जनार ने गुरुवार को बैंकों से कहा कि वे म्यूल अकाउंट (अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) की संख्या शून्य सुनिश्चित करके साइबर धोखाधड़ी को रोकने पर ध्यान केंद्रित करें।

हैदराबाद पुलिस प्रमुख ने एक ट्विन-चैलेंज फ्रेमवर्क (दोहरी चुनौती वाली रूपरेखा) शुरू करने की सिफारिश की, ताकि बैंक शाखाओं की प्राथमिकताओं को खाता खोलने के लक्ष्यों से हटाकर नागरिकों की सुरक्षा और संस्थागत ईमानदारी की ओर मोड़ा जा सके।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दोनों चुनौतियों को शाखा स्तर पर औपचारिक मुख्य प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) के रूप में शामिल किया जाना चाहिए; जो शाखाएं इनका पालन करेंगी, उन्हें बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा औपचारिक रूप से मान्यता दी जाएगी और पुरस्कृत किया जाएगा।

पुलिस कमिश्नर ने बैंक खातों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने और साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम को मजबूत करने के लिए बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक (कॉन्क्लेव) आयोजित की।

यह बैठक ऑपरेशन ऑक्टोपस के बाद आयोजित की गई थी। यह हैदराबाद सिटी पुलिस की एक समन्वित और दो-चरणों वाली पहल थी, जिसका उद्देश्य संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क को खत्म करना था, और इसके बाद उन बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था, जो म्यूल अकाउंट (अवैध खातों) को खोलने में कथित तौर पर शामिल पाए गए थे।

इस बैठक की अध्यक्षता कमिश्नर ने की, और इसमें अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (अपराध और एसआईटी) एम. श्रीनिवासुलु और भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक चिन्मय कुमार भी शामिल हुए।

इस समन्वय बैठक में 45 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के 75 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कमिश्नर ने कहा कि कोई भी ग्राहक साइबर अपराध का शिकार नहीं बनना चाहिए। साइबर अपराध के पीड़ितों की संख्या शून्य हो, यही हमारा मापने योग्य लक्ष्य है, जिसकी निगरानी शाखा से जुड़े एनसीआरपी शिकायत डेटा के माध्यम से की जाएगी।

उन्होंने कहा, शाखा में कोई भी म्यूल अकाउंट (अवैध खाता) नहीं खोला जाना चाहिए। सख्त केवाईसी नियमों का पालन, गहन जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस), और वास्तविक समय की निगरानी, ये ही इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिचालन जरूरतें हैं।

कमिश्नर ने इस बात पर जोर दिया कि बैंक प्रबंधन को खाता खोलने की संख्या को ही प्रदर्शन का एकमात्र पैमाना नहीं मानना ​​चाहिए। जो शाखाएं सावधानी और सतर्कता के बजाय केवल लक्ष्यों को प्राथमिकता देती हैं, वे ही धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के लिए प्रवेश का मुख्य द्वार बन जाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षित ग्राहक और शून्य म्यूल अकाउंट, ये दो परिणाम ही शाखा के प्रदर्शन को परिभाषित करने चाहिए, न कि केवल खोले गए खातों की संख्या।

उन्होंने बैंकों से कहा कि उन्हें संगठन के हर स्तर पर, चाहे वह फ्रंटलाइन स्टाफ हो या वरिष्ठ प्रबंधन, साइबर अपराध के प्रति शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शाखाओं के लिए निर्धारित मुख्य प्रदर्शन संकेतकों (कपीआई) में, उस शाखा से संबंधित एनसीआरपी शिकायतों की निगरानी को भी शामिल किया जाना चाहिए, और यह अपेक्षा की जाती है कि उन शिकायतों का सक्रियता से समाधान किया जाए।

बैंक कर्मचारियों को सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए और साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए ग्राहकों को तत्काल और व्यवस्थित सहायता प्रदान करनी चाहिए, जिसमें पीड़ितों को राष्ट्रीय हेल्पलाइन (1930) और साइबर अपराध पोर्टल (साइबरक्राइमडॉटगॉवडॉटइन) के बारे में जानकारी देकर उनका मार्गदर्शन करना भी शामिल है।

धोखाधड़ी से खाते खोलने में शामिल पाए जाने वाले केवाईसी सत्यापनकर्ताओं के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, साथ ही संदिग्ध अधिकारियों द्वारा खोले गए खातों की समय-समय पर फोरेंसिक जांच भी की जानी चाहिए। साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत करने वाले किसी भी कर्मचारी को बैंकिंग और वित्तीय सेवा तंत्र में पूरी तरह से ब्लैकलिस्ट कर दिया जाना चाहिए।

वास्तविक समय में फर्जी खाता गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए उन्नत तकनीकी उपकरणों, जिनमें म्यूल हंटर जैसे समाधान शामिल हैं, को अपनाया जाना चाहिए।

सज्जनार ने कहा कि समय से पहले सावधि जमा बंद करने के इच्छुक ग्राहकों को सक्रिय रूप से सतर्क किया जाना चाहिए और उनकी जांच की जानी चाहिए, विशेष रूप से धन हस्तांतरण के मामलों में, ताकि चल रही साइबर धोखाधड़ी को रोका जा सके।

आयुक्त ने भारत भर में सक्रिय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों की कार्यप्रणाली पर विस्तृत जानकारी दी। इन गिरोहों का मुख्यालय मुख्य रूप से कंबोडिया, वियतनाम और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में है, और ये भारत में मध्यस्थों के माध्यम से बैंक अधिकारियों, विशेष रूप से केवाईसी सत्यापनकर्ताओं, के साथ मिलीभगत करके बैंक खाते प्राप्त करते हैं, ताकि भारतीय पीड़ितों से धन की हेराफेरी की जा सके।

इस प्रेजेंटेशन में इन नेटवर्कों के अंतरराष्ट्रीय और संगठित स्वरूप पर जोर दिया गया, साथ ही यह भी बताया गया कि इनमें अंदरूनी मिलीभगत से सक्षम होने में कितनी अहम भूमिका होती है।

--आईएएनएस

एससीएच

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