बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकता है जंक फूड, समझदारी से चुनें खाना
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का रोज का खाना सिर्फ उसका पेट ही नहीं भरता बल्कि उसकी सेहत, पढ़ाई की क्षमता और पूरा भविष्य भी तय करता है। बच्चे क्या खाते हैं, इसका सीधा असर उनके शरीर, दिमाग और विकास पर पड़ता है। इसलिए खानपान को हल्के में लेना एक बड़ी गलती हो सकती है।
आजकल बच्चों को जंक फूड बहुत पसंद आता है। पिज़्ज़ा, बर्गर, चिप्स, चॉकलेट, केक, बिस्कुट, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक ये सब चीजें स्वाद में तो बहुत अच्छी लगती हैं लेकिन इनके अंदर पोषण बहुत कम और नुकसान ज्यादा होता है। जंक फूड का मतलब ही है ऐसा खाना जिसमें तेल, चीनी और नमक बहुत ज्यादा हो लेकिन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व लगभग ना के बराबर हों।
धीरे-धीरे यही आदत बच्चों की सेहत को बिगाड़ने लगती है। शुरुआत में शायद फर्क न दिखे लेकिन समय के साथ मोटापा, कमजोरी, ध्यान न लगना और बीमारियां बढ़ने लगती हैं।
रोजाना खाने में संतुलन जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक दिन में लगभग 5 ग्राम (एक छोटी चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं लेना चाहिए। इसी तरह चीनी का सेवन 20 से 25 ग्राम यानी 4 से 5 छोटी चम्मच तक सीमित रखना चाहिए और तेल भी 25 से 30 ग्राम यानी 5 से 6 छोटी चम्मच से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
छोटे बच्चों के लिए तो और भी ध्यान रखना जरूरी है। दो साल से कम उम्र के बच्चों के खाने में नमक और चीनी बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए क्योंकि उनका शरीर अभी विकास की अवस्था में होता है।
ज्यादा जंक फूड खाने से बच्चों में मोटापा बढ़ सकता है। आगे चलकर यह डायबिटीज (शुगर), दिल की बीमारी और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है। इसके अलावा यह बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त पर भी असर डालता है, जिससे पढ़ाई में ध्यान कम लगने लगता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बच्चों को स्वाद से दूर कर दिया जाए। जरूरत है सही विकल्प चुनने की। जंक फूड की जगह हम बच्चों को स्वादिष्ट और हेल्दी चीजें दे सकते हैं, जैसे ताजे मौसमी फल, ड्राई फ्रूट्स, भुना चना, मूंगफली, मुरमुरा, घर की बनी शिकंजी, लस्सी, ताज़ा फलों का जूस, रागी के लड्डू और घर की बनी चटनियां। इन चीजों से बच्चों को स्वाद भी मिलेगा और पोषण भी।
सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों को शुरू से ही हेल्दी खाने की आदत डालनी चाहिए। अगर बचपन से ही सही खान-पान की आदत बन जाए, तो आगे चलकर बच्चा मजबूत, स्वस्थ और मानसिक रूप से तेज बनता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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