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वर्ल्ड 10के बेंगलुरु के 18वें संस्करण को हरी झंडी दिखाएंगे राज्यपाल थावरचंद गहलोत

बेंगलुरु, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। वर्ल्ड 10के बेंगलुरु के 18वें संस्करण का आयोजन रविवार को किया जाएगा, जिसमें भारतीय एलीट एथलीटों की मजबूत लाइन-अप हिस्सा लेगी। इस प्रतिष्ठित दौड़ को कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत हरी झंडी दिखाएंगे।

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Investment Tips: क्यों एसेट एलोकेशन अच्छे फंड से ज्यादा जरूरी, निवेश के वक्त किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

Investment Tips: निवेश करने वाले ज्यादातर लोग इस बात पर ज्यादा समय लगाते कि कौन सा म्यूचुअल फंड सबसे अच्छा, कौन सा शेयर सबसे ज्यादा रिटर्न देगा या कौन सा निवेश विकल्प बेहतर। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट चुनना ही सफलता की गारंटी नहीं। लंबे समय में सही एसेट एलोकेशन यानी संपत्ति का सही बंटवारा ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होता।

एसेट एलोकेशन का मतलब है अपने पैसे को अलग-अलग निवेश वर्गों में बांटना। इसमें इक्विटी, बॉन्ड, नकदी, रियल एस्टेट और अन्य विकल्प शामिल हो सकते। यही तय करता है कि आपका पोर्टफोलियो बाजार चढ़ने, गिरने, महंगाई बढ़ने या आर्थिक दबाव के समय कैसा प्रदर्शन करेगा।

अलग-अलग निवेश सेक्टर में पैसा लगाएं
विशेषज्ञ मानते हैं कि अच्छा निवेश प्रोडक्ट रिटर्न को बेहतर बना सकता लेकिन पूरे पोर्टफोलियो का व्यवहार एसेट एलोकेशन तय करता। अगर पोर्टफोलियो का ढांचा गलत है, तो बेहतरीन प्रोडक्ट भी उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं दे पाएंगे।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई निवेशक बहुत सुरक्षित पोर्टफोलियो रखता है, तो लंबे समय में उसके लक्ष्य पूरे नहीं हो सकते। वहीं अगर कोई जरूरत से ज्यादा आक्रामक निवेश करता है, तो बाजार गिरने पर भारी उतार-चढ़ाव झेलना पड़ सकता।

हर निवेशक के लिए एलोकेशन अलग
हर निवेशक के लिए एसेट एलोकेशन अलग होना चाहिए। यह व्यक्ति की आयु, लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता, नकदी जरूरत और समय अवधि पर निर्भर करता है। जैसे रिटायरमेंट के लिए निवेश कर रहे युवा निवेशक की योजना अलग होगी, जबकि तीन साल में घर खरीदने वाले व्यक्ति की रणनीति अलग होगी।

कई लोग निवेश उत्पादों के बीच छोटे फर्क को बहुत बड़ा मान लेते हैं। जबकि एक ही श्रेणी के दो फंडों में लंबे समय में अंतर सीमित हो सकता है। लेकिन 30 प्रतिशत इक्विटी और 70 प्रतिशत इक्विटी वाले पोर्टफोलियो के नतीजे बिल्कुल अलग हो सकते हैं।

सही एसेट एलोकेशन निवेशक को अनुशासित भी बनाता है। यदि पोर्टफोलियो जोखिम क्षमता के अनुसार बना है, तो बाजार गिरने पर घबराकर गलत फैसले लेने की संभावना कम होती है। कई बार लोग अच्छे निवेश चुनने के बाद भी घबराकर बीच में पैसा निकाल लेते हैं और नुकसान उठा लेते हैं।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि एसेट एलोकेशन एक बार का फैसला नहीं है। समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंसिंग जरूरी है। बाजार बढ़ने या गिरने से अलग-अलग निवेश वर्गों का अनुपात बदल जाता है, जिसे दोबारा संतुलित करना चाहिए।

निष्कर्ष साफ है कि सिर्फ अच्छा फंड या शेयर चुनना काफी नहीं है। मजबूत पोर्टफोलियो संरचना और सही एसेट एलोकेशन ही लंबे समय में बेहतर और स्थिर रिटर्न की असली कुंजी है।

(प्रियंका कुमारी)

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