गरीबी के चलते मनोज बाजपेयी को छोड़कर चली गई थी पहली पत्नी, सुसाइड करना चाहते थे एक्टर, फिर ऐसे बदली लाइफ
Manoj Bajpayee Birthday: मनोज बाजपेयी की जिंदगी संघर्ष, जुनून और हिम्मत की ऐसी कहानी है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती. जी हां, बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने तक का उनका सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है. तो चलिए आज उनके 57वे जन्मदिन पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ चौंकाने वाली बातें बताते हैं.
घर पर बोलै था झूठ
मनोज के अंदर एक्टिंग का बीज उनके पिता राधाकांत बाजपेयी से ही पड़ा था. उनके पिता खुद एक्टर बनना चाहते थे और उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में दाखिले के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन हालात उनके पक्ष में नहीं रहे. हालांकि, वो चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने और एक स्थिर जिंदगी जिए. मगर मनोज का दिल तो सिनेमा में बसता था. उन्होंने अपने परिवार से ये कहकर दिल्ली का रुख किया कि वो UPSC की तैयारी करने जा रहे हैं, जबकि असल में उनका लक्ष्य अभिनय की दुनिया में कदम रखना था.
तीन बार किया गया रिजेक्ट
दिल्ली पहुंचकर मनोज ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिले की कोशिश की लेकिन उन्हें एक या दो बार नहीं, बल्कि तीन बार रिजेक्ट कर दिया गया. ये किसी भी युवा कलाकार के लिए बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन मनोज ने हार नहीं मानी. उन्होंने दिल्ली के मशहूर थिएटर ग्रुप Act One से जुड़कर अपने अभिनय को निखारना शुरू किया. धीरे-धीरे वो दिल्ली के रंगमंच पर छा गए. लोग उनकी तुलना दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह से करने लगे. उनका नाटक 'नेटुआ' आज भी थिएटर प्रेमियों के बीच एक मिसाल के तौर पर याद किया जाता है.
मंदिर में की थी शादी
थिएटर के दिनों में ही मनोज की मुलाकात उनकी साथी कलाकार दिव्या से हुई और दोनों के बीच प्यार पनपा. लेकिन ये रिश्ता आसान नहीं था. दिव्या एक अमीर परिवार से थीं, जबकि मनोज आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे. दिव्या के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया यहां तक कि मनोज को धमकियां भी दीं. बावजूद इसके, दोनों ने एक पत्रकार दोस्त की मदद से और पुलिस सुरक्षा के बीच लक्ष्मीनगर के एक मंदिर में शादी कर ली.
सुसाइड करने की कोशिश
शादी के बाद आर्थिक तंगी ने उनके रिश्ते पर गहरा असर डाला. महज दो महीने के भीतर ही ये शादी टूट गई और दोनों का तलाक हो गया. इस घटना ने मनोज को अंदर से झकझोर दिया. एक तरफ करियर नहीं बन रहा था और दूसरी तरफ निजी जिंदगी बिखर चुकी थी. वो इतने टूट गए कि उनके मन में आत्महत्या जैसे ख्याल आने लगे. लेकिन उनके दोस्तों ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा और हर समय उनके साथ रहकर उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकाला.
'मैडम को आपका काम पसंद नहीं आया'
इसके बाद मनोज मुंबई पहुंचे, जहां उनका संघर्ष और भी कठिन हो गया. वो एक छोटे से 8x8 फीट के कमरे में रहते थे, जिसका किराया 2000 रुपये था. ये उस समय उनके लिए बहुत बड़ी रकम थी. इस दौरान उनके साथ एक्टर सौरभ शुक्ल भी रहे. दोनों ने अपनी जमा-पूंजी जोड़कर एक साल का किराया एडवांस में दिया.
मनोज ने 'Bandit Queen' जैसी चर्चित फिल्म में काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पहचान नहीं मिली. संघर्ष इतना गहरा था कि एक दिन उन्हें तीन अलग-अलग जगहों से काम से निकाल दिया गया. एक टीवी शो की शूटिंग के दौरान तो उनसे साफ कह दिया गया- "मैडम को आपका काम पसंद नहीं आया, आप कपड़े बदलकर घर जाइए."
इस फिल्म ने बनाया रातोंरात स्टार
हालांकि, उनकी किस्मत ने करवट तब ली जब राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'सत्या' रिलीज हुई. इस फिल्म में उनके निभाए गए किरदार ‘भीखू म्हात्रे’ ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और बॉलीवुड में उनकी एक मजबूत पहचान स्थापित हो गई. इसी दौरान उनकी मुलाकात फिल्म 'करीब' की एक्ट्रेस Neha (Shabana Raza) से हुई. एक पार्टी में नेहा बिना मेकअप और सादगी भरे अंदाज में पहुंची थीं, जिसने मनोज का दिल जीत लिया. दोनों के बीच प्यार बढ़ा और करीब 8 साल तक एक-दूसरे को समझने के बाद साल 2006 में उन्होंने शादी कर ली. आज मनोज बाजपेयी बॉलीवुड के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं. उनकी कहानी ये सिखाती है कि असफलताएं चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इंसान अपने जुनून और मेहनत पर कायम रहे तो सफलता जरूर मिलती है.
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भारत के प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियां अप्रैल में बढ़ीं, रोजगार सृजन 10 महीनों के उच्च स्तर पर
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के प्राइवटे सेक्टर में अप्रैल में गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह क्षमता में विस्तार, बेहतर मांग, नए ऑर्डर्स और टेक्नोलॉजी निवेश में बढ़ोतरी होना है। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स में गुरुवार को दी गई।
यह इंडेक्स मासिक आधार पर भारत के सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गतिविधियों को दिखाता है। अप्रैल में यह 58.3 पर रहा है, मार्च में यह 57.0 पर था।
एचएसबीसी की ओर से बताया गया कि अप्रैल में नए ऑर्डर मार्च की अपेक्षा अधिक तेजी से बढ़े हैं।
सर्वेक्षण में बताया गया कि भारत में निजी क्षेत्र में रोजगार में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल में रोजगार सृजन में वृद्धि 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी बाधाओं के कारण मार्च में आई सुस्ती के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी आई है। उत्पादन और नए ऑर्डर में तेजी से वृद्धि के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने इस सुधार का नेतृत्व किया।”
सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति पक्ष के झटके की अवधि को लेकर अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर स्टॉक बना रही हैं।
भंडारी ने कहा, “खरीद की मात्रा में वृद्धि के साथ-साथ तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि हुई है। इनपुट लागत का दबाव उच्च बना हुआ है और कंपनियों ने बढ़ी हुई बिक्री कीमतों के माध्यम से इस वृद्धि का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूला।”
मुद्रास्फीति दरें ऐतिहासिक रूप से उच्च बनी रहीं, लेकिन सेवा क्षेत्र में मंदी के कारण पिछले महीने की तुलना में इनमें कुछ कमी आई।
एस एंड पी ग्लोबल द्वारा संकलित पीएमआई रिपोर्ट में कहा गया है, उत्पादन और बिक्री में मजबूत उछाल के साथ विनिर्माण क्षेत्र ने रिकवरी का नेतृत्व किया, लेकिन यहां कीमतों का दबाव बढ़ गया।
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा प्रदाताओं की तुलना में वस्तु उत्पादकों ने नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी से वृद्धि दर्ज की।
सेवा कंपनियों ने भी वृद्धि दर्ज की, हालांकि यह तुलनात्मक रूप से मामूली थी। निर्यात के रुझान क्षेत्र स्तर पर मिश्रित रहे, क्योंकि सेवा प्रदाताओं में वृद्धि की धीमी गति वस्तु उत्पादकों में तेजी से वृद्धि के विपरीत थी।
--आईएएनएस
एबीएस/
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