शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच लाल निशान में खुला, कंज्यूमर सेक्टर पर दबाव
मुंबई, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 625 अंक या 0.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,891 और निफ्टी 162 अंक या 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,215 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में गिरावट का नेतृत्व कंज्यूमर सेक्टर कर रहा था। सूचकांकों में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप लूजर था। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी भी लाल निशान में थे। वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी पीएसई हरे निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 60,035 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक की मामूली तेजी के साथ 17,832 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, इंडिगो, इटरनल, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट और टाटा स्टील लूजर्स थे। वहीं, पावर ग्रिड और सन फार्मा गेनर्स थे।
वैश्विक बाजारों से मिलेजुले संकेत मिल जुले थे। टोक्यो, बैंकॉक, सोल, जकार्ता, हांगकांग और शंघाई लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को तेजी के साथ बंद हुए, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.69 प्रतिशत और नैस्डैक 1.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण कच्चे तेल में फिर से तेजी देखने को मिल रही है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है।
कच्चे तेल में तेजी की वजह ईरान के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच अमेरिका ने रूसी तेल पर छूट का बचाव किया
वाशिंगटन, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूस के तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी होने से रोका जा सका। हालांकि, डेमोक्रेट नेताओं ने चेतावनी दी कि इससे रूस को युद्ध के लिए पैसा मिल सकता है और ईंधन महंगा बना रह सकता है।
सीनेट की एक समिति के सामने बोलते हुए बेसेंट ने कहा कि यह कदम उस समय उठाया गया जब बाजार में काफी अनिश्चितता थी, ताकि तेल की सप्लाई स्थिर रखी जा सके।
उन्होंने बताया, “हम 25 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल बाजार में बनाए रखने में सफल रहे।”
बेसेंट ने कहा कि अगर यह छूट नहीं दी जाती, तो कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती थीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आज तेल की कीमत करीब 100 डॉलर है। अगर हमने यह राहत नहीं दी होती, तो यह 150 डॉलर तक जा सकती थी।” उन्होंने कहा कि यह नीति आम लोगों को राहत देने के लिए बनाई गई है। कम कीमत लोगों के लिए बेहतर है।
वहीं, डेमोक्रेट नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया। क्रिस कून्स ने कहा कि इस छूट से रूस को अरबों डॉलर मिल सकते हैं और इससे उस पर दबाव कम हो जाएगा, जो इस समय बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आम लोग आज भी महंगा पेट्रोल खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा, “डेलावेयर में लोग 4 डॉलर प्रति गैलन के हिसाब से पेट्रोल खरीद रहे हैं।”
कून्स ने सवाल उठाया कि क्या इस नीति से सच में लोगों को कोई राहत मिली है। इस पर बेसेंट ने जवाब दिया कि रूस या ईरान को इससे कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं।”
उन्होंने बताया कि इस छूट को बढ़ाने का फैसला दुनिया के कई गरीब और कमजोर देशों की मांग पर लिया गया था। उन्होंने कहा, “10 से ज्यादा गरीब देशों ने हमसे इस छूट को बढ़ाने की अपील की थी, इसलिए इसे सिर्फ 30 दिनों के लिए बढ़ाया गया।”
इसी बीच, कुछ नेताओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों पर भी चिंता जताई। जैक रीड ने कहा कि अमेरिका में लोग 4 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा कीमत पर पेट्रोल खरीद रहे हैं, जो आम परिवारों पर बोझ है।
बेसेंट ने कहा कि बाजार के हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि तेल बाजार इस समय “बैकवर्डेशन” की स्थिति में है, यानी आगे चलकर कीमतें कम हो सकती हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई, “मुझे लगता है कि यह संघर्ष खत्म होगा और पेट्रोल की कीमतें फिर पहले जैसी या उससे भी कम हो जाएंगी।”
यह पूरी बहस अमेरिका की राजनीति में मतभेद को दिखाती है। सरकार का कहना है कि थोड़ी लचीलापन रखने से बाजार स्थिर रहता है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे रूस पर दबाव कम होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध पश्चिमी देशों की नीति का अहम हिस्सा रहे हैं। कोशिश यह रही है कि रूस की कमाई कम हो, लेकिन दुनिया में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर न पड़े।
दुनिया में तेल की कीमतें अब भी अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर मध्य पूर्व की स्थिति से प्रभावित होती हैं। वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी से कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ता है।
--आईएएनएस
एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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