मध्य पूर्व में गहराते संकट और अनिश्चितता के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि उन पर शांति समझौते के लिए समय का कोई दबाव नहीं है, जिससे यह साफ हो गया है कि क्षेत्र में तनाव अभी लंबे समय तक बना रह सकता है। ट्रंप ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वे आगामी मध्यावधि चुनाव (midterms) को देखते हुए युद्ध को जल्द खत्म करना चाहते हैं।
फॉक्स न्यूज़ की मार्था मैककैलम के साथ एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "कोई 'समय सीमा' तय नहीं थी और न ही कोई जल्दबाजी थी।" "लोग कहते हैं कि मैं मध्यावधि चुनावों (midterms) की वजह से इसे जल्द खत्म करना चाहता हूँ, लेकिन यह सच नहीं है।"
ट्रंप का यह स्पष्टीकरण उन कई रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें दावा किया गया था कि युद्धविराम सिर्फ एक अल्पकालिक विस्तार है। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया था कि कोई ऐसी समय सीमा तय नहीं की गई है जिसके भीतर ईरान को शांति प्रस्ताव पेश करना ही हो।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बुधवार को कहा, "राष्ट्रपति ने ईरान का प्रस्ताव प्राप्त करने के लिए कोई पक्की समय सीमा तय नहीं की है, जैसा कि मैंने आज कुछ रिपोर्टों में देखा है। आखिरकार, समय सीमा कमांडर-इन-चीफ ही तय करेंगे।"
ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी
भले ही ट्रंप ने युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया हो, लेकिन अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी है; इस कदम की तेहरान ने बार-बार आलोचना की है। अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को साफ करने की भी तैयारी कर रहा है, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को साफ करने में संभवतः कई महीने लग जाएँगे, जिससे दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा कच्चा तेल गुज़रता है।
इस घटनाक्रम से परिचित एक व्यक्ति का हवाला देते हुए AP ने कहा कि अमेरिकी सेना को बारूदी सुरंगों को साफ करने में कम से कम छह महीने लगेंगे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंगलवार को हाउस आर्म्ड सर्विसेज़ कमेटी में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग के दौरान सांसदों को भी इस बारे में जानकारी दी गई थी।
ईरान ने दो जहाज़ ज़ब्त किए
इसी बीच, ईरान ने दो जहाज़ भी ज़ब्त कर लिए हैं, लेकिन व्हाइट हाउस ने कहा है कि इससे युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन नहीं होता, क्योंकि ये जहाज़ न तो अमेरिकी थे और न ही इज़राइली। फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए, लेविट ने इस बात को भी दोहराया कि ईरान की नौसेना 'पूरी तरह से तबाह' हो चुकी है और इस्लामिक रिपब्लिक ने 'तेज़ रफ़्तार गनबोट' की मदद से इन जहाज़ों को ज़ब्त किया है।
ईरान की तुलना "डाकुओं के एक झुंड" से करते हुए, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि ट्रंप द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी उन जहाज़ों पर जारी है जो ईरान के बंदरगाहों पर आ रहे हैं और वहाँ से जा रहे हैं।
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मिडिल ईस्ट से एक बड़ी खबर है जहां एक बार फिर से तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी कि आईआरजीसी ने हॉर्मुज स्टेट में भारत आ रहे एक कंटेनरशिप को रोक कर अपने कब्जे में ले लिया है। यह वही हॉर्मोच स्टेट है जिसे दुनिया की सबसे अहम ऑयल सप्लाई लाइफलाइन माना जाता है और यहीं पर इस कारवाही ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। जिस जहाज को जब्त किया गया है, उसका नाम है एपामिनोस। यह जहाज लाइबेरिया के फ्लैग के तहत रजिस्टर्ड था। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था। ईरानी नौसेना का दावा है कि इस जहाज के नेविगेशन सिस्टम से छेड़छाड़ की गई थी जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था और इसी आधार पर आईआरजीसी ने जहाज को इंटरसेप्ट किया और उसे अपने नियंत्रण में लेकर तट की ओर ले गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। खबर यह भी है कि इजराइल से जुड़े फ्रांसिस्का नाम के एक दूसरे जहाज को भी ईरान ने जब्त कर लिया है। इसके अलावा यूफोरिया नाम के जहाज पर हमला भी किया है। जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
पिछले 24 घंटे में घटनाओं की रफ्तार इतनी तेज हो रही है कि पूरा मिडिल ईस्ट इस बार फिर संभावित टकराव के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है।
इससे पहले भी खबरें आई थी कि एक जहाज पर ईरान की ओर से फायरिंग हुई है। जबकि दूसरा जहाज ओमान के तट के पास हमले में क्षतिग्रस्त हो गया है। अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान ऐसा क्यों कर रहा है? दरअसल स्टेट ऑफ हॉर्मुज स्टेट सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की धड़कन है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है और ऐसे में यहां कोई भी तनाव सीधे ग्लोबल इकॉनमी को प्रभावित करता है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश करता रहा है और जब भी उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है वह हॉर्मोन स्टेट को अपने दबाव के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ आ गया है और वह जुड़ा है अमेरिका से। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे सीज फायर को आगे बढ़ा रहा है।
हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया है कि ये सीज फायर कितने समय के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि ईरान में एक समय नेतृत्व और सरकार के भीतर एकजुटता की कमी है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने उनसे अपील की थी कि ईरान को कुछ समय दिया जाए ताकि वह एक साझा प्रस्ताव तैयार कर सकें। ट्रंप ने कहा कि इसी अपील को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमले रोकने के आदेश दिए हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना पूरी तरह अलर्ट पर है। किसी भी आदेश के लिए तैयार है। यानी एक तरफ सीज फायर है तो दूसरी तरफ युद्ध की पूरी तैयारी भी जारी है। इतना ही नहीं अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी यानी कि ब्लॉकेट जारी रखने का फैसला लिया। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान की ओर से कोई ठोस और एकजूट प्रस्ताव नहीं आता तो यह सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं चलेगा।
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