कहते हैं कि जो लोग दूसरों के लिए बारूद बिछाते हैं वो एक दिन उसी बारूद में जलकर राख हो जाते हैं। वैसा ही कुछ अब आतंकी मुल्क पाकिस्तान में भी देखने को मिल रहा है। 72 हूरों का सपना पालकर जो पाकिस्तान के जिहादी आए दिन भारत में खूनखराबा करते रहते थे। लेकिन अब यही आतंकी लगातार जहन्नुम पहुंचाए जा रहे हैं। जिस जमीन को आतंकी अपने लिए सबसे महफूज जन्नत समझते थे, अब यही जमीन उनके लिए कब्रगाह और जहन्नुम बन चुकी है। पाकिस्तान के भीतर अचानक से कुछ ऐसे बाहुबली एक्टिव हुए हैं जो चुन-चनकर पाकिस्तान के पाले हुए इन जहरीले सांपों को उसके घर में ही कुचल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों के भीतर पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों में कई ऐसे खूंखार आतंकी मारे गए हैं जो भारत के सबसे बड़े दुश्मन बने हुए थे। सबसे खास बात तो ये है कि जिस परिस्थिति में आतंकी मारे जा रहे हैं उसकी तह तक पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी भी नहीं पहुंच पा रही। इसी बीच अब पाकिस्तान में भारत का एक और बड़ा दुश्मन मारा गया है। जिसने हाफिज मसूद के खेमे में हड़कंप मचा दिया है।
दरअसल आतंकी संगठन लश्कर तैबा के एक सीनियर कमांडर की पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में संदिग्ध हालत में मौत हो गई है। कमांडर कारी सैद अब्दुल अजीज नमाज पढ़ने के लिए कुबा मस्जिद पहुंचा था। जहां वो गेट पर अचानक गिर पड़ा। अब्दुल ने नमाज पढ़ने से पहले वजू किया। वजू करने के बाद जैसे ही आतंकी अब्दुल अपना बैग वापस लेकर सीनिया चढ़कर मस्जिद के मुख हॉल में नमाज पढ़ने के लिए जाता है। वो वैसे ही चप्पल उतारने के लिए बैठता है और जमीन पर गिर जाता है। पास में मौजूद लश्कर तैबा के कैडर के अन्य लोग उसे उठाकर इसी जगह पर ले जाते हैं। जहां उसे सांस ना चलने पर सीपीआर दिया जाता है। लेकिन इसके बावजूद अब्दुल अजीज होश में नहीं आता। फिर उसे अस्पताल ले जाया जाता है। जहां पर उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि मस्जिद जाने से पहले उसने एक अनजान रेस्टोरेंट में खाना खाया था। अचानक हुई आतंकी की मौत पर पाकिस्तान के भीतर भारत पर शक जताया जा रहा है।
हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि इस तरह की घटनाओं में उसका कोई भी हाथ नहीं है। दरअसल कारी सईद लश्कर तैबा का एक प्रमुख कमांडर था। उसके पास जम्मू कश्मीर में मुडबैर में मारे गए आतंकवादियों के परिवारों की मदद करने वाले विभाग की जिम्मेदारी थी। यह भारत में मारे गए आतंकियों के परिजनों को हर महीने पेंशन देता था। अब्दुल अजीज साल 1990 से आतंकी हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था और उसका खास कमांडर था। उसके अचानक हुई मौत से हाफिज सईद को बहुत बड़ा झटका लगा है। हाल ही में लश्कर के एक बड़े मेंबर रिज़वान का एक वीडियो सामने आया था जिसमें उसने दावा किया था कि पिछले 4 साल में भारतीय एजेंट ने पाकिस्तान के अंदर उसके संगठन के 30 मेंबर को मार दिया है।
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ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा अली खामनेई का पहला वीडियो सामने आ गया है और ईरान के ही सेमी ऑफिशियल न्यूज़ एजेंसी मेहर ने 28 फरवरी को इसे जारी किया है। जब यूएस और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला हमला किया था जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयुतुल्लाह अली खामिनई की मौत हो गई थी। उसके बाद उनके बेटे मोजतबा अली खामनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। तब से लेकर अब तक वो कभी भी सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखे। उनका कोई वीडियो नहीं आया। हां, गाहे बगाहे वो संदेश देते थे। मैसेजेस उनके आते थे। लेकिन वह कभी भी पब्लिकली दिखे नहीं और अब उनका यह 12 सेकंड का वीडियो ईरान ने खुद शेयर किया है। इस वीडियो में वह समर्थकों के बीच बैठे हैं। उम्दा हालत में दिख रहे हैं। बातचीत करते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस वीडियो में कोई तारीख नहीं है। लोकेशन का कोई जिक्र नहीं है। ईरान की मेहर सेमी ऑफिशियल जो न्यूज़ एजेंसी है उसने शेयर किया है। लेकिन यह नहीं पता है कि कब की यह वीडियो है। जंग के पहले की वीडियो है या जंग के बाद की वीडियो है।
अब बात कर लेते हैं मेहर की यह सेमी ऑफिशियल न्यूज़ एजेंसी है जिसने यह वीडियो जारी किया है। इसे ईरानी गवर्नमेंट ही स्पोंसर करती है और इसे ऑपरेट करता है इस्लामिक डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन। उनकी हेल्थ रिपोर्ट को लेकर तमाम कयास लगाए जाते थे अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में और अब पहली बार इस जंग शुरू होने के बाद पहली बार यह वीडियो शेयर किया गया है ईरान की तरफ से जिसमें मोजतबा खामनेई अपने समर्थकों के बीच बैठे नजर आ रहे हैं। बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में इजराइली मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान के सुप्रीम लीडर की हालत बेहद गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इजराइली चैनल है चैनल 14 उसने सोर्सेस के हवाले से यहां तक यह दावा कर दिया था कि मोजतबा की हालत जिंदगी और मौत के बीच बनी हुई है और उनके निधन की खबर कभी भी सामने आ सकती है। इसके अलावा द जेरूसलम पोस्ट के एक सोर्स ने यह तक कह दिया था कि अगर जल्द ही मोजतबा खामनेई की शहादत की खबर आए तो हमें कोई हैरानी नहीं होगी। इससे पहले जुलाई में सऊदी न्यूज़ आउटलेट अल हदित ने एक इजराइली सुरक्षा सोर्स के हवाले से खबर दी थी कि मोजतबा खामनेई ईरान में है ही नहीं।
बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज़ को एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान का जो शीर्ष नेतृत्व है वो लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस जंग के बाद मोजतबा खामनेई की हालत ऐसी है कि वो 90% जा ही चुके हैं और काम करने में असमर्थ हैं। ऐसा ट्रंप ने दावा किया था। दूसरी ओर ईरानी सरकारी अधिकारियों ने मोजतबा खामनेई की चोट की गंभीरता को कम बताते हुए कहा था कि यह केवल मामूली चोटें हैं जो सही हो रही हैं वह दिन पर दिन रिकवर करते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोजतबा खामनेई ने अब भी बड़े फैसले की देखरेख कर रहे हैं और निर्देश जारी कर रहे हैं। हालांकि किसी भी वो सार्वजनिक कार्यक्रम में पब्लिकली नहीं दिखे हैं। देश को संबोधित करते नहीं दिखे हैं। ईरान और विदेशों में उनकी सेहत और नेतृत्व क्षमता को लेकर अफवाहें जरूर बढ़ रही थी। पश्चिमी मीडिया के रिपोर्ट सामने आ रहे थे जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि उनकी हालत ठीक नहीं है। लिखित बयानों और बिचौलियों के जरिए ही बातचीत वो कर रहे हैं। ऐसे तमाम दावों के बीच में फाइनली ईरान की तरफ से यह वीडियो शेयर किया गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में अपने पिता की मौत के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर वो बने थे। यह पद संभालने के बाद से कभी जनता के सामने नहीं आए और सिर्फ लिखित बयानों के जरिए ही उन्होंने संवाद किया है। यहां तक कि वो अपने पिता के जनाजे में भी नजर नहीं आए थे।
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