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Khatron Ke Khiladi 15: शो से एविक्ट हुए विशाल, नहीं कर पाए ये खतरनाक स्टंट, फैंस ने की वापसी की डिमांड

Vishal Aditya Singh Eviction From KKK 15: ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ (Khatron Ke Khiladi 15) में इस बार खतरे का लेवल काफी ज्यादा है. जिसे देखने में लोगों को काफी मजा आ रहा है. शुरुआत से ही कंटेस्टेंट को काफी खतरनाक टास्क दिए जा रहे हैं. बीते दिन रविवार के एपिसोड में विशाल आदित्य सिंह (Vishal Aditya Singh) का खतरों के खिलाड़ी का सफर खत्म हो गया है. वह शो से बाहर होने वाले पहले कंटेस्टेंट बन गए हैं. दरअसल, स्टंट के बाद  विशाल को रूहानिका धवन और रुबीना दिलैक के साथ एलिमिनेशन स्टंट में उतरना पड़ा था. इस स्टंट को विशाल पूरा नहीं कर सके. उनके एविक्शन से फैंस काफी निराश और नाराज हैं. फैंस का कहना है कि उन्हें इतनी जल्दी शो से बाहर नहीं जाना चाहिए था और उनकी वाइल्ड कार्ड एंट्री की जानी चाहिए. 

सांप वाले स्टंट में रहे सबसे पीछे

विशाल आदित्य सिंह का सामना एलिमिनेशन स्टंट में रूहानिका धवन और रुबीना दिलैक से हुआ था. इस स्टंट में तीनों कंटेस्टेंट को सांपों से भरे एक कांच के बॉक्स में जाना था. इसके बाद तस्वीरों की मदद से सांपों की पहचान करनी थी और अनलॉक करके खुद बाहर निकलना था. इस स्टंट में कंटेस्टेंट्स को एक साथ डर और प्रेशर दोनों का सामना करना पड़ा. विशाल ने तीन सांपों की सही पहचान की, जबकि रूहानिका ने चार और रुबीना ने पांच सांपों की पहचान की. जिससे उनका सबसे ज्यादा स्कोर रहा. वहीं, विशाल का स्कोर सबसे कम रहा तो उन्हें शो से बाहर होना पड़ा.

मोम वाले स्टंट में भी विशाल रहे पीछे

इससे पहले विशाल ने मोम वाला स्टंट किया था. जिसमें उनके साथ हर्ष गुजराल, रुबीना और रूहानिका भी थीं. इस स्टंट में चारों कंटेस्टेंट्स की हाथों पर पिघला हुआ गर्म मोम डाला गया और उन्हें मोम को इकट्ठा करना था. इस स्टंट को हर्ष गुजराल ने सबसे अच्छा किया था. वहीं, विशाल, रुबीना और रूहानिका पीछे रहे. इसके बाद विशाल के पास एक मौका था, उन्हें सांपों वाले स्टंट को करना था. अगर वह इसे जीत जाते तो वह बाहर नहीं होते. हालांकि यहां भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. शो से विदाई लेते हुए विशाल ने भी कहा कि उनका लक काम नहीं आया. 

विशाल के एविक्शन से फैंस नाराज

विशाल के एविक्शन से फैंस काफी नाराज और दुखी हैं. एक यूजर ने लिखा, 'बुरी किस्मत विशाल! मैं सच में तुम्हें इस सफर में काफी आगे तक देखना चाहता था. पहले एलिमिनेशन की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी.' वहीं, दूसरे ने कहा, 'अविनाश मिश्रा  विशाल के एलिमिनेशन से दुखी थे. उन्होंने सबसे पहले विशाल को गले लगाया. विशाल को इतनी जल्दी बाहर नहीं होना चाहिए था, लेकिन शायद वह अगले हफ्ते वापस आ रहा है.' ऐसे में समझा सकता है कि फैंस उनके एविक्शन से बहुत दुखी हैं. 

वाइल्ड कार्ड एंट्री की उठी मांग

विशाल के कई फैंस शो में उनकी वाइल्ड कार्ड एंट्री की मांग कर रहे हैं. एक नेटिजन ने लिखा, 'विशाल, आप वाइल्ड कार्ड एंट्री के हकदार हो.' विशाल की पुरानी शोल्डर इंजरी का जिक्र करते उन्होंने एलिमिनेशन को दिल तोड़ने वाला बताया. वहीं एक अन्य ने कहा, 'एलिमिनेशन स्टंट में रूहानिका की जगह शगुन शर्मा होनी चाहिए थी. उन्होंने लिखा, 'रूहानिका धवन की जगह शगुन शर्मा को एलिमिनेशन स्टंट में करना चाहिए था. शायद तब विशाल आदित्य सिंह बाहर नहीं होते. सच कहूं तो उनके लिए बुरा लग रहा है.' 

एविक्शन होने के बाद क्या बोले विशाल

शो से बाहर होने के बाद विशाल ने अपने एक्सपीरियंस को शेयर किया. टेली टॉक इंडिया संग इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'मैं खेलने गया था. लेकिन बाकी लोगों के बारे में मुझे नहीं पता. यह ऐसा शो है जहां आपको इंजरी हो सकती है. उल्टी हो सकती है और बुखार भी हो सकता है.' उन्होंने कहा, 'केप टाउन का वेदर काफी चैलेंजिंग है. वहां ठंड होती है, बारिश हो सकती है और हवा इतनी तेज होती है कि आपके फेफड़े तक साफ कर दे. हम इंडिया में इसके आदी नहीं हैं.' बता दें कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की शुरुआत 1 अगस्त 2026 को हुई थी. रोहित शेट्टी इस बार भी खतरों के खिलाड़ी को होस्ट कर रहे हैं और शो हर वीकेंड कलर्स और जियोहॉटस्टार पर आता है. 

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धनुष जैसी मुड़ी रीढ़ को डॉक्टरों ने किया सीधा, 32 साल के शिवराज को मिला नया जीवन

सोचिए, कोई इंसान छह साल तक इस तरह जिंदगी जिए कि सीधे खड़ा होना, सामने देखकर चलना और आराम से सोना भी मुश्किल हो जाए। 32 साल के शिवराज महादेव जावने के लिए यह सिर्फ कल्पना नहीं, हकीकत थी। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की वजह से उनकी रीढ़ धीरे-धीरे आगे की ओर इतनी मुड़ गई कि शरीर धनुष जैसा दिखाई देने लगा। लेकिन मुंबई में हुई एक जटिल शल्य चिकित्सा ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। डॉक्टरों ने उनकी मुड़ी हुई रीढ़ को दोबारा सीधा किया और अब शिवराज फिर सीधे खड़े होकर सामने देख सकते हैं। यह कहानी बीमारी की गंभीरता के साथ चिकित्सा विज्ञान की उस क्षमता को भी दिखाती है, जो मुश्किल हालात में किसी इंसान को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा कर सकती है।

दर्द से शुरू हुई कहानी, धीरे-धीरे छिनती गई सामान्य जिंदगी

हिंगोली के रहने वाले शिवराज ने 2020 में कमर दर्द को सामान्य परेशानी समझा था। वह बैंक में नौकरी करते रहे, लेकिन दर्द लगातार बढ़ता गया। 2021 में जांच के बाद उन्हें एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने का पता चला। इसके बाद शरीर में अकड़न बढ़ती गई और रीढ़ आगे की ओर झुकती चली गई। बैठना, सोना, चलना और सामने देखकर चलना तक मुश्किल हो गया। आखिरकार 2022 में उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। 2025 में रीढ़ पर पड़ रहे असामान्य दबाव के कारण उनका कूल्हा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और छत्रपति संभाजीनगर में कूल्हे की जगह बदलने की शल्य चिकित्सा हुई। इसी दौरान उन्हें डॉ. धीरज सोनावणे के बारे में जानकारी मिली। 15 जुलाई 2026 को वे सर जेजे समूह अस्पताल, मुंबई पहुंचे। जांच में एचएलए-बी27 और पूरी रीढ़ की एक्स-रे की गई, जिसमें गंभीर रीढ़ विकृति सामने आई।

7-8 घंटे की सर्जरी, 45 डिग्री की चुनौती

डॉक्टरों ने पाया कि बीमारी के कारण शिवराज की रीढ़ लगभग पूरी तरह कठोर हो चुकी थी और गंभीर काइफोसिस के कारण आगे की ओर धनुष जैसी मुड़ गई थी। डॉ. धीरज सोनावणे के नेतृत्व में टीम ने 17 जुलाई को रीढ़ को सीधा करने की जटिल शल्य चिकित्सा करने का फैसला लिया। यह आसान नहीं था। मुड़ी हुई रीढ़ के कारण शिवराज को शल्य चिकित्सा की मेज पर सही स्थिति में रखना भी चुनौती थी। इसके बाद कमर की रीढ़ से बेहद सटीक गणना के आधार पर करीब 45 डिग्री का त्रिकोण के आकार का हड्डी का हिस्सा हटाया गया। रीढ़ को धीरे-धीरे सीधा किया गया और फिर विशेष छड़ों और पेंचों से स्थिर किया गया। करीब 7 से 8 घंटे चली यह शल्य चिकित्सा बिना किसी बड़ी जटिलता के पूरी हुई।

फिर सामने देखकर चलने की शुरुआत

शल्य चिकित्सा के बाद शिवराज को पुनर्वास, भौतिक चिकित्सा और धीरे-धीरे चलने-फिरने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। 23 जुलाई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने उन्हें भारी वजन उठाने और ज्यादा झुकने से बचने, पैरों को मजबूत करने वाली कसरत करने और नियमित जांच के लिए आने की सलाह दी है। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में रीढ़ के जोड़ धीरे-धीरे आपस में जुड़ सकते हैं और बीमारी बढ़ने पर ऐसी गंभीर विकृति भी हो सकती है। शिवराज के मामले में इलाज ने सिर्फ उनकी रीढ़ को सीधा नहीं किया, बल्कि उन्हें फिर से सीधे खड़े होने और सामने देखने का मौका दिया। छह साल तक झुकी जिंदगी के बाद अब उनके सामने आगे देखने और अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करने का रास्ता है।

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