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धनुष जैसी मुड़ी रीढ़ को डॉक्टरों ने किया सीधा, 32 साल के शिवराज को मिला नया जीवन

सोचिए, कोई इंसान छह साल तक इस तरह जिंदगी जिए कि सीधे खड़ा होना, सामने देखकर चलना और आराम से सोना भी मुश्किल हो जाए। 32 साल के शिवराज महादेव जावने के लिए यह सिर्फ कल्पना नहीं, हकीकत थी। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की वजह से उनकी रीढ़ धीरे-धीरे आगे की ओर इतनी मुड़ गई कि शरीर धनुष जैसा दिखाई देने लगा। लेकिन मुंबई में हुई एक जटिल शल्य चिकित्सा ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। डॉक्टरों ने उनकी मुड़ी हुई रीढ़ को दोबारा सीधा किया और अब शिवराज फिर सीधे खड़े होकर सामने देख सकते हैं। यह कहानी बीमारी की गंभीरता के साथ चिकित्सा विज्ञान की उस क्षमता को भी दिखाती है, जो मुश्किल हालात में किसी इंसान को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा कर सकती है।

दर्द से शुरू हुई कहानी, धीरे-धीरे छिनती गई सामान्य जिंदगी

हिंगोली के रहने वाले शिवराज ने 2020 में कमर दर्द को सामान्य परेशानी समझा था। वह बैंक में नौकरी करते रहे, लेकिन दर्द लगातार बढ़ता गया। 2021 में जांच के बाद उन्हें एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने का पता चला। इसके बाद शरीर में अकड़न बढ़ती गई और रीढ़ आगे की ओर झुकती चली गई। बैठना, सोना, चलना और सामने देखकर चलना तक मुश्किल हो गया। आखिरकार 2022 में उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। 2025 में रीढ़ पर पड़ रहे असामान्य दबाव के कारण उनका कूल्हा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और छत्रपति संभाजीनगर में कूल्हे की जगह बदलने की शल्य चिकित्सा हुई। इसी दौरान उन्हें डॉ. धीरज सोनावणे के बारे में जानकारी मिली। 15 जुलाई 2026 को वे सर जेजे समूह अस्पताल, मुंबई पहुंचे। जांच में एचएलए-बी27 और पूरी रीढ़ की एक्स-रे की गई, जिसमें गंभीर रीढ़ विकृति सामने आई।

7-8 घंटे की सर्जरी, 45 डिग्री की चुनौती

डॉक्टरों ने पाया कि बीमारी के कारण शिवराज की रीढ़ लगभग पूरी तरह कठोर हो चुकी थी और गंभीर काइफोसिस के कारण आगे की ओर धनुष जैसी मुड़ गई थी। डॉ. धीरज सोनावणे के नेतृत्व में टीम ने 17 जुलाई को रीढ़ को सीधा करने की जटिल शल्य चिकित्सा करने का फैसला लिया। यह आसान नहीं था। मुड़ी हुई रीढ़ के कारण शिवराज को शल्य चिकित्सा की मेज पर सही स्थिति में रखना भी चुनौती थी। इसके बाद कमर की रीढ़ से बेहद सटीक गणना के आधार पर करीब 45 डिग्री का त्रिकोण के आकार का हड्डी का हिस्सा हटाया गया। रीढ़ को धीरे-धीरे सीधा किया गया और फिर विशेष छड़ों और पेंचों से स्थिर किया गया। करीब 7 से 8 घंटे चली यह शल्य चिकित्सा बिना किसी बड़ी जटिलता के पूरी हुई।

फिर सामने देखकर चलने की शुरुआत

शल्य चिकित्सा के बाद शिवराज को पुनर्वास, भौतिक चिकित्सा और धीरे-धीरे चलने-फिरने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। 23 जुलाई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने उन्हें भारी वजन उठाने और ज्यादा झुकने से बचने, पैरों को मजबूत करने वाली कसरत करने और नियमित जांच के लिए आने की सलाह दी है। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में रीढ़ के जोड़ धीरे-धीरे आपस में जुड़ सकते हैं और बीमारी बढ़ने पर ऐसी गंभीर विकृति भी हो सकती है। शिवराज के मामले में इलाज ने सिर्फ उनकी रीढ़ को सीधा नहीं किया, बल्कि उन्हें फिर से सीधे खड़े होने और सामने देखने का मौका दिया। छह साल तक झुकी जिंदगी के बाद अब उनके सामने आगे देखने और अपनी जिंदगी को फिर से शुरू करने का रास्ता है।

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रांची में छात्रों का 'महासंग्राम'! JPSC-JSSC की 5 मांगों पर सरकार से कहां फंसा पेंच?

JPSC JSSC Protest: झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का प्रदर्शन एक बार फिर सुर्खियों में है. JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से सड़कों पर हैं. आज विधानसभा की ओर मार्च का ऐलान करने के बाद देशभर के छात्र रांची में जुटे हुए हैं. वहीं, छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा लाया जा रहा है.

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र काफी समय से नाराज हैं. आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं, और जब इसकी शिकायत की गई तो उचित कार्रवाई नहीं हुई. इसी नाराजगी ने धीरे-धीरे बड़े आंदोलन का रूप ले लिया. अब यह मुद्दा किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है. छात्र चाहते हैं कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए.

रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?

-छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि परीक्षा से जुड़े आरोपों की जांच किसी भरोसेमंद एजेंसी से कराई जाए, ताकि नतीजे सबको स्वीकार्य हों.

-अभ्यर्थी चाहते हैं कि परीक्षा से लेकर नियुक्ति तक की पूरी प्रक्रिया साफ और स्पष्ट हो.

-छात्रों का कहना है कि सिर्फ जांच बैठाना काफी नहीं है, जो भी गड़बड़ी में शामिल पाया जाए, उस पर सख्त कार्रवाई हो.

-आगे होने वाली परीक्षाओं में पेपर लीक या नकल जैसी घटनाएं रोकने के लिए मजबूत सिस्टम बनाने की मांग भी उठाई जा रही है.

-छात्र चाहते हैं कि हर परीक्षा के बाद विवाद खड़ा होने के बजाय एक भरोसेमंद, स्थायी व्यवस्था बने.

सरकार ने मानी मांगें, फिर भी आंदोलन क्यों जारी?

सरकार का कहना है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं. लेकिन आंदोलन अब भी नहीं थमा है. इसकी वजह है एक अहम मांग, जो है स्वतंत्र जांच की जिस पर अभी सहमति नहीं बन पाई. छात्रों का कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर साफ फैसला नहीं होता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.

विधानसभा मार्च का क्या मतलब है?

आज का मार्च सरकार पर दबाव बनाने की एक कोशिश है. छात्र चाहते हैं कि उनकी बची हुई मांग पर सरकार जल्द फैसला ले. वहीं प्रशासन के सामने चुनौती है कि मार्च शांतिपूर्ण रहे और हालात नहीं बिगड़ें.

आगे क्या हो सकता है?

जानकारों की मानें तो अगर सरकार और छात्रों के बीच बचे हुए मुद्दे पर कोई सहमति बनती है, तो आंदोलन जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन अगर यह मांग अनसुलझी रही, तो प्रदर्शन आगे भी जारी रह सकता है.

JPSC-JSSC विवाद में ED की एंट्री, झारखंड परीक्षा केस में पैसों के लेनदेन की होगी जांच

FAQ

सवाल: रांची में छात्र किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
जवाब: JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर.

सवाल: छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
जवाब: परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराना.

सवाल: सरकार का इस पर क्या कहना है?
जवाब: सरकार का दावा है कि अधिकतर मांगें पहले ही मान ली गई हैं, बाकी पर बातचीत जारी है.

सवाल: आज छात्र क्या करने वाले हैं?
जवाब: छात्रों ने रांची में विधानसभा तक मार्च का ऐलान किया है.

सवाल: आंदोलन कब खत्म होगा?
जवाब: यह सरकार और छात्रों के बीच बची हुई मांग पर बनने वाली सहमति पर निर्भर करेगा.

98% मांगें मानीं तो फिर क्यों नहीं थमा रांची का छात्र आंदोलन? CBI जांच पर फंसा पेच

यह भी जानें

जब 98 फीसदी मांगें मान ली गईं तो आंदोलन क्यों?

यही इस पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल है. सरकार की ओर से कहा गया है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों पर सहमति बन चुकी है. लेकिन आंदोलनकारी छात्र अभी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. छात्रों के लिए CBI जांच का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है. उनका कहना है कि जब तक कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल नहीं उठता. 

 

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  Sports

Mohammed Shami का खुलासा: Yuvraj Singh के सामने कांपने लगी थी आवाज, Dressing Room का वो अनसुना किस्सा

भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन जब कोई युवा खिलाड़ी पहली बार उस ड्रेसिंग रूम में पहुंचता है, जहां उसके बचपन के पसंदीदा सितारे मौजूद हों, तो वह पल बेहद खास बन जाता है। तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का ऐसा ही किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में पहली बार पहुंचने पर वह इतने घबरा गए थे कि टीम के सामने अपना परिचय देने के अलावा कुछ बोल ही नहीं पाए थे।

मोहम्मद शमी ने बताया कि भारतीय टीम में पहली बार शामिल होने से पहले उन्हें अंदाजा नहीं था कि अंदर का माहौल कैसा होगा। मैच से एक दिन पहले टीम की बैठक हो रही थी। जैसे ही वह कमरे के अंदर पहुंचे और आसपास बैठे खिलाड़ियों को देखा, उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके बचपन के लगभग सभी पसंदीदा खिलाड़ी उनके सामने बैठे हों। इस वजह से वह चुपचाप जाकर बैठ गए और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर पाए।

इसी दौरान पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने शमी से कुर्सी पर खड़े होने के लिए कहा और टीम के सामने कुछ बोलने को कहा। शमी ने बताया कि उस समय उनके दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था। बड़े खिलाड़ियों को सामने देखकर वह इतना नर्वस हो गए थे कि उन्हें अपना भाषण तक याद नहीं रहा। आखिर में उन्होंने सिर्फ अपना नाम और अपने शहर के बारे में बताया और वहीं रुक गए।

गौरतलब है कि यह घटना शमी के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत के दौर की है। उन्होंने छह जनवरी 2013 को दिल्ली में पाकिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय मुकाबले से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। उसी साल नवंबर में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्हें टेस्ट पदार्पण का मौका मिला। इसके बाद 21 मार्च 2014 को मीरपुर में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी पदार्पण किया।

उस शुरुआती झिझक के बाद शमी ने भारतीय तेज गेंदबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने भारत के लिए 64 टेस्ट मुकाबले खेले हैं और 229 विकेट लिए हैं। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम छह बार एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड है। एकदिवसीय क्रिकेट में शमी ने 108 मुकाबलों में 206 विकेट हासिल किए हैं, जबकि इस प्रारूप में भी उन्होंने छह बार पांच विकेट लिए हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 25 मैच खेलकर 27 विकेट अपने नाम किए हैं।

शमी ने भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी बताया। उनसे जब टीम के सबसे मजाकिया खिलाड़ी का नाम पूछा गया तो उन्होंने पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को चुना। शमी के मुताबिक, धवन मुश्किल परिस्थितियों में भी टीम का माहौल हल्का रखने की कोशिश करते थे।

उन्होंने बताया कि अगर भारत कोई मुकाबला हार जाता था और सभी खिलाड़ी चुपचाप बैठते थे, तब धवन अचानक जोर से हंसने लगते थे। पूछने पर वह मजाक में कहते थे कि मैच हार गए हैं, इसलिए हंसी आ रही है। शमी के मुताबिक, धवन कभी-कभी पंजाबी गाने बजने पर मेज पर खड़े होकर नाचने भी लगते थे। ऐसी हरकतों से हार के बाद ड्रेसिंग रूम का माहौल ज्यादा भारी नहीं होता था।

बता दें कि शिखर धवन ने भारत के लिए 34 टेस्ट, 167 एकदिवसीय और 68 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। उन्होंने 2024 में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी। शमी के मुताबिक, पूरे साल क्रिकेट खेलने के दौरान जीत और हार दोनों आती रहती हैं, इसलिए खिलाड़ियों के लिए मुश्किल समय में भी माहौल को सामान्य रखना जरूरी होता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नौ मार्च 2025 को दुबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। भारत ने यह मुकाबला चार विकेट से जीतकर खिताब अपने नाम किया था। शमी के करियर की शुरुआत में जिस खिलाड़ी के सामने वह कुछ बोल नहीं पाए थे, उसी टीम के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में उनका नाम आज शामिल है।
Mon, 10 Aug 2026 21:43:21 +0530

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