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क्या रोबोट इंसानों से आगे निकल सकते हैं?

बीजिंग, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। 19 अप्रैल, 2026 को चीन की राजधानी पेइचिंग में यिचुआंग हाफ मैराथन में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया, मानवाकार रोबोट लाइटनिंग ने 21 किमी. की दौड़ 50 मिनट और 26 सेकंड में पूरी कर ली।

इस उपलब्धि ने न केवल हाफ मैराथन में रोबोटों का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि पुरुषों की हाफ मैराथन में मानव रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। यह खबर तेजी से फैल गई। कुछ लोग उत्साहित थे, इसे प्रौद्योगिकी में एक बड़ी छलांग मान रहे थे। वहीं, कुछ लोग चुपचाप सोचने लगे: आखिर एक मशीन का इंसान से आगे निकलना क्या मायने रखता है?

एक इंसान 21 किमी. की दौड़ अपने दिल, फेफड़ों, मांसपेशियों और लाखों वर्षों के विकास से विकसित शारीरिक क्षमताओं के सहारे दौड़ता है। वहीं, लाइटनिंग बैटरी, मोटर, एल्गोरिदम और हल्के पदार्थों पर निर्भर करता है। हर कदम पर, यह गणनाओं का उपयोग करके यह निर्धारित करता है कि कैसे उतरना है, कितना बल लगाना है और ऊर्जा का संरक्षण कैसे करना है। इसने दौड़कर जीत हासिल नहीं की; इसने गणना करके जीत हासिल की। यह केवल एक मशीन द्वारा मनुष्य का स्थान लेना मात्र नहीं है; बल्कि, एक विशिष्ट कार्य में, एक इंजीनियरिंग प्रणाली एक जैविक प्रणाली से कहीं बेहतर प्रदर्शन करती है।

निस्संदेह, यह उपलब्धि उल्लेखनीय है, लेकिन हमें इसके पीछे की परिस्थितियों को भी समझना होगा। सबसे पहले, प्रतियोगिता उत्कृष्ट परिस्थितियों में हुई: एक सुगम सड़क, अच्छा मौसम और पूरी प्रक्रिया के दौरान एक तकनीकी टीम की उपस्थिति। यदि यह पहाड़ी इलाका होता, बारिश का मौसम होता या मशीन में अचानक कोई खराबी आ जाती, तो परिणाम पूरी तरह से भिन्न हो सकता था। दूसरा, प्रतियोगिता के मानक मनुष्यों और मशीनों के बीच भिन्न होते हैं।

मानव विश्व रिकॉर्ड के लिए सख्त नियम और प्रमाणन होते हैं, लेकिन रोबोट प्रतियोगिताओं में वर्तमान में एकीकृत मानकों का अभाव है। विभिन्न मशीनें अलग-अलग बैटरी, मोटर और एल्गोरिदम का उपयोग करती हैं; इस प्रकार की प्रतियोगिता एक खेल आयोजन की तुलना में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन की तरह अधिक है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मशीन की गति का अर्थ यह नहीं है कि वह मनुष्य से बेहतर है। मैराथन का प्रेरक पहलू कभी भी गति नहीं होती, बल्कि उस व्यक्ति का दृढ़ संकल्प होता है जो थकावट, दर्द और हार मानने की इच्छा होने पर भी दौड़ता रहता है। रोबोटों को न तो खुद को चुनौती देनी होती है और न ही दर्द का सामना करना पड़ता है।

लाइटनिंग का उदय हमें इस बात पर चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है कि “मशीनें मनुष्यों की जगह कैसे ले लेंगी” के बजाए “भविष्य में मनुष्य और मशीनें एक साथ कैसे काम करेंगी”। उच्च-प्रदर्शन वाले रोबोट उन स्थानों पर अत्यंत उपयोगी होंगे, जहां मनुष्यों की पहुंच कठिन है, जैसे आपदा राहत, खतरनाक वातावरण और सैन्य टोही। खेल के क्षेत्र में, हम एक स्पष्ट विभाजन रेखा देख सकते हैं: मानव मैदान मानव शरीर, भावनाओं और इच्छाशक्ति के लिए है; रोबोट ट्रैक तकनीकी नवाचार के लिए एक परीक्षण स्थल बन जाता है।

यिचुआंग हाफ मैराथन में लाइटनिंग मानव एथलेटिक्स का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह हमें याद दिलाता है कि जैसे-जैसे मशीनें मनुष्यों के समान होती जा रही हैं, हमें खुद से पूछना चाहिए - मानवता का वह कौन सा पहलू है जिसे प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है? इसका जवाब शायद दौड़ने की गति में नहीं, बल्कि फिनिश लाइन पार करते ही हर कदम के साथ धड़कते दिल में छिपा हो।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कूलर के पानी में डालें ये छोटी सी चीज, बदबू और मच्छरों से मिलेगी राहत

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मी में तेज धूप और उमस भरे मौसम में कूलर लोगों को राहत देने का सबसे आसान और सस्ता तरीका माना जाता है, लेकिन अक्सर लोग कूलर चलाने से पहले उसमें भरे पानी की सफाई पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में एक घरेलू उपाय से आप इस पानी को साफ रख सकते हैं।

कूलर में कई दिनों तक एक ही पानी भरा रहने से उसमें गंदगी जमा होने लगती है। धीरे-धीरे पानी से बदबू आने लगती है और वही जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह भी बन जाता है। यही वजह है कि गर्मियों और बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया और वायरल संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

फिटकरी को वैज्ञानिक भाषा में एलम कहा जाता है। इसका इस्तेमाल लंबे समय से पानी साफ करने के लिए किया जाता रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, फिटकरी पानी में मौजूद छोटे गंदे कणों को आपस में जोड़ देती है। जब ये कण आपस में मिलकर भारी हो जाते हैं, तो नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर का पानी ज्यादा साफ दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि कूलर के पानी में छोटा सा फिटकरी का टुकड़ा डालने से पानी जल्दी गंदा नहीं होता।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कूलर में जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह बनता है। मादा मच्छर अक्सर रुके हुए साफ पानी में अंडे देती है। अगर पानी लंबे समय तक बिना बदले पड़ा रहे तो उसमें लार्वा तेजी से बढ़ने लगते हैं। फिटकरी पानी की गुणवत्ता को बदलने में मदद करती है, जिससे मच्छरों के लार्वा के पनपने की संभावना कुछ हद तक कम हो सकती है।

कई बार कूलर से अजीब सी बदबू आने लगती है। इसका कारण पानी में पैदा होने वाले सूक्ष्म जीव और गंदगी हो सकते हैं। फिटकरी में हल्के एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो बैक्टीरिया की संख्या कम करने में मदद करते है जिसके चलते पानी से आने वाली बदबू भी कम होती है। जब पानी साफ रहता है तो कूलर के पैड भी ज्यादा समय तक ठीक रहते हैं और हवा भी ताजा महसूस होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फिटकरी का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। बहुत ज्यादा फिटकरी डालने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए कूलर के बड़े टैंक में सिर्फ छोटा सा टुकड़ा ही काफी है। साथ ही हर कुछ दिनों में कूलर का पानी पूरी तरह बदल देना चाहिए। टैंक और पैड्स की सफाई भी जरूरी है, ताकि फंगस और गंदगी जमा न हो।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

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