नासा ने बाह्य ग्रहों और डार्क मैटर की खोज के लिए 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' का किया अनावरण
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप का अनावरण किया है। यह एक खास तरह का टेलीस्कोप है, जो सौर मंडल के बाह्य ग्रहों (एक्सोप्लैनेट) की खोज करेगा और डार्क मैटर व डार्क एनर्जी के रहस्यों को समझने में मदद करेगा।
नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने मैरीलैंड के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, रोमन टेलीस्कोप पृथ्वी को ब्रह्मांड का एक नया नक्शा देगा।
12 मीटर लंबा यह सिल्वर रंग का टेलीस्कोप बड़े सोलर पैनल के साथ बनाया गया है और इसे सितंबर में स्पेसएक्स के रॉकेट से फ्लोरिडा से लॉन्च किया जा सकता है।
इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री नैन्सी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है, जिन्हें हबल स्पेस टेलीस्कोप की मां कहा जाता है।
नासा के अनुसार, इसका व्यू एरिया हबल टेलीस्कोप से करीब 100 गुना ज्यादा होगा और यह अपने जीवनकाल में एक अरब (बिलियन) आकाशगंगाओं की रोशनी को माप सकता है।
यह टेलीस्कोप तारों की रोशनी को ब्लॉक करके सीधे एक्सोप्लैनेट और ग्रह बनने वाली डिस्क को देख सकेगा। साथ ही यह हमारी गैलेक्सी में ग्रहों की संख्या और प्रकार का बड़ा डेटा तैयार करेगा और डार्क एनर्जी, एक्सोप्लैनेट और इन्फ्रारेड एस्ट्रोफिजिक्स से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने में मदद करेगा।
रोमन टेलीस्कोप को बनाने में 10 साल से ज्यादा समय और 4 अरब डॉलर से अधिक की लागत आई है। इसे पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा, ताकि यह ब्रह्मांड के बड़े हिस्से का अध्ययन कर सके।
इसे अंतरिक्ष के एक खास स्थान, दूसरे सन-अर्थ लाग्रांज पॉइंट (एल2) पर रखा जाएगा, जहां गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित रहते हैं और वस्तुएं कम ऊर्जा में स्थिर कक्षा में बनी रह सकती हैं।
एल2 पर मौजूद रहने से टेलीस्कोप को तापमान स्थिरता मिलेगी, जिससे हबल की तुलना में डेटा की गुणवत्ता लगभग 10 गुना बेहतर होगी।
गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के सिस्टम इंजीनियर मार्क मेल्टन के अनुसार, यह टेलीस्कोप हर दिन करीब 11 टेराबाइट डेटा पृथ्वी पर भेजेगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
नेपाल के लुंबिनी प्रांत में दलित कल्याण बिल को मंजूरी; मुफ्त इलाज, सस्ते कर्ज और छात्रावास का प्रावधान
काठमांडू, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल में दलित अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए पहले से राष्ट्रीय कानून है, लेकिन अब लुंबिनी प्रांत दलित समुदाय के जीवन और भलाई को बेहतर बनाने के लिए एक बिल पास किया है। ऐसा करने वाला यह देश का पहला प्रांत बन गया है।
लुंबिनी प्रांत की इस नई पहल में खास तौर पर दलितों के लिए घर, इलाज और शिक्षा जैसी सुविधाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है।
लुंबिनी के अलावा नेपाल में छह और प्रांत-कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम हैं। नेपाल के संविधान के मुताबिक प्रांतीय और स्थानीय सरकारें अपने कानून बना सकती हैं, बस उन्हें ये ध्यान रखना होता है कि वे केंद्र के कानूनों के खिलाफ न हों।
इस बिल में दलित परिवारों के लिए घर की व्यवस्था करने की बात कही गई है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर दलित छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के दौरान हॉस्टल की सुविधा देने का भी प्रावधान है। साथ ही सरकारी, निजी और सामुदायिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में दलित छात्रों को प्राथमिकता देने की बात भी शामिल है।
इस बिल के तहत गरीब दलित नागरिकों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुफ्त सुविधा देने का वादा किया गया है, जैसा कि प्रांतीय सरकार तय करेगी। इसके अलावा, दलितों के पारंपरिक कामों को बचाने, आगे बढ़ाने और आधुनिक बनाने के लिए मशीनों, औजारों और कच्चे माल पर सब्सिडी, छूट और सस्ते कर्ज देने का भी प्रावधान है।
प्रांत के सामाजिक विकास मंत्री जनमजय तिमिल्सिना ने इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश किया था, जिसे सभी सदस्यों ने मिलकर मंजूरी दे दी।
मंत्री तिमिल्सिना ने कहा, इससे दलित समुदाय के मानव अधिकार और सामाजिक न्याय को मजबूती मिलेगी। साथ ही सरकार के हर स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक में मौका मिलेगा। इससे आर्थिक संसाधनों और अवसरों तक उनकी बराबर पहुंच भी सुनिश्चित होगी।”
लुंबिनी प्रांतीय विधानसभा के प्रवक्ता लोकमणि पांडे ने आईएएनएस को बताया कि गवर्नर की मंजूरी मिलने के बाद यह बिल कानून बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें दलित समुदाय के लिए कई तरह की सुविधाएं शामिल हैं।
2021 की जनगणना के मुताबिक, लुंबिनी प्रांत की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी 14.30 प्रतिशत है। पूरे नेपाल में यह समुदाय करीब 13.44 प्रतिशत है, जो लगभग तीन करोड़ की आबादी का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने 30 मार्च को अपनी 100-दिवसीय कार्ययोजना में घोषणा की कि वह ऐतिहासिक अन्याय के लिए दलित समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगी और इन समस्याओं को दूर करने के लिए सुधार-उन्मुख कार्यक्रम शुरू करेगी।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
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