सीजीटीएन सर्वे : व्यापक नेटीजनों ने जापान की कार्रवाई की आलोचना की
बीजिंग, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। जापान सरकार ने 21 अप्रैल को औपचारिक रूप से रक्षा उपकरण के हस्तांतरण के तीन सिद्धांत और इसके प्रयोग गाइड में संशोधन किया। इसके अनुसार, सैद्धांतिक रूप से नरसंहारक हथियारों के निर्यात की अनुमति दी जाएगी। जापान की दक्षिणपंथी ताकतों ने युद्ध के बहाने तस्करी शुरू कर दी है।
इसको लेकर चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीन चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (सीजीटीएन) ने वैश्विक नेटीजनों में एक ऑनलाइन सर्वेक्षण किया। इसमें शामिल 82.5 प्रतिशत नेटीजनों ने कहा कि जापान की दक्षिणपंथी ताकतों की पुनः सैन्यीकरण की कुचेष्टा करने की कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध से पहले जापानी सैन्यवाद के विस्तार तर्क के बिलकुल समान है। इससे जापान एक बार फिर बेहद खतरनाक रास्ते पर अग्रसर हो जाएगा।
सर्वेक्षण में शामिल 86.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जापान सरकार से काहिरा घोषणा पत्र, पॉट्सडैम घोषणा पत्र व जापान का आत्मसमर्पण पत्र आदि अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रभाव वाले दस्तावेजों के नियमों और जापान के संविधान व मौजूदा घरेलू नियमों का उल्लंघन करने की आलोचना की।
वहीं, 85.1 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि जापान की कार्रवाई एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा बनेगी।
उधर, सर्वेक्षण में शामिल 87.9 प्रतिशत नेटीजनों ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध शुरू करने वाले देश होने के नाते जापान को शांति संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानून के मानदंड का पालन करना होगा, ताकि ठोस कदम से पड़ोसी एशियाई देशों की सुरक्षा संबंधी चिंता का सम्मान किया जा सके।
बताया जाता है कि यह सर्वेक्षण सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफॉर्म पर जारी किया गया। 24 घंटों में 4,495 नेटीजनों ने इसमें भाग लिया।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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ईडी ने करोड़ों रुपए के वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ब्रिटेन बेस्ड कारोबारी को नामजद किया
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजधानी में एक विशेष न्यायालय (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के समक्ष ब्रिटेन निवासी सचिन देव दुग्गल के खिलाफ करोड़ों रुपए के वीडियोकॉन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित संलिप्तता के लिए पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है।
यह शिकायत 18 दिसंबर, 2024 को वेणुगोपाल धूत और 12 अन्य लोगों के खिलाफ दाखिल की गई मूल आरोप पत्र के सिलसिले में दायर की गई है। विशेष पीएमएलए न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान इस वर्ष 10 फरवरी को लिया था।
ईडी ने 23 जून, 2020 को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग्स लिमिटेड (वीएचएचएल) ने भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से 2,773.60 मिलियन डॉलर की स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा का लाभ उठाया था, जिसका कथित उद्देश्य मोजाम्बिक, ब्राजील और इंडोनेशिया में विदेशी तेल और गैस संपत्तियों का विकास करना था।
जांच में कथित तौर पर वीडियोकॉन समूह के प्रमोटरों द्वारा विदेशी संस्थाओं के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से लगभग 2.03 बिलियन डॉलर की इन धनराशि का व्यवस्थित रूप से गबन करने का खुलासा हुआ।
ईडी ने कहा कि स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए के चेयरमैन और भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों निवियो टेक्नोलॉजीज और इंजीनियर.एआई के वास्तविक मालिक सचिन देव दुग्गल एक कथित योजना के प्रमुख लाभार्थी थे, जिसके तहत वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज से धन का गबन किया गया और कई विदेशी संस्थाओं के माध्यम से उसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए वैध बनाया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह योजना 2008 में शुरू हुई जब वीआईएल ने दुग्गल के नियंत्रण वाली निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बिना किसी औपचारिक ऋण समझौते के 17.32 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त ऋण देना शुरू किया।
आरोप है कि 24 मई, 2011 को जल्दबाजी में एक ऋण समझौता किया गया था, और अगले ही दिन, एक विदेशी वीडियोकॉन इकाई ने दुग्गल की स्विस कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए में 37.9 लाख सीएचएफ का निवेश किया, जिसे ईडी ने कंपनी के घाटे में होने के बावजूद बढ़ा-चढ़ाकर किए गए मूल्यांकन पर किया गया निवेश बताया। 2011 और 2014 के बीच, वीडियोकॉन ने कथित तौर पर पांच विदेशी इकाइयों के एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से एनहोल्डिंग्स एसए और सीधे सचिन देव दुग्गल को 37.07 लाख डॉलर (लगभग 20.12 करोड़ रुपए) हस्तांतरित किए।
निविओ टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान, कंपनी को एनहोल्डिंग्स एसए से 35 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, उसी अवधि में जब वीडियोकॉन समूह कथित तौर पर स्विस इकाई को धनराशि हस्तांतरित कर रहा था। उसी वर्ष, निविओ टेक्नोलॉजीज की स्वामित्व संरचना में परिवर्तन किया गया था।
दुग्गा की कंपनी एनहोल्डिंग्स एसए, निवियो टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परम मूल कंपनी बन गई, जबकि निवियो क्लाउड कंप्यूटिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को एक मध्यवर्ती होल्डिंग कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। ईडी ने आरोप लगाया कि इस पुनर्गठन के माध्यम से दुग्गल ने यह सुनिश्चित किया कि भारत और विदेश में स्थित सभी संस्थाएं उनके सीधे नियंत्रण में रहें।
हालांकि, इन निधियों के अंतिम उपयोग के बारे में अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। 31 मार्च, 2013 को समाप्त हुए वर्ष के लिए एनहोल्डिंग्स एसए के वित्तीय विवरण के अनुसार, निवियो में किए गए निवेश को पूरी तरह से बट्टे खाते में डाल दिया गया था।
जनवरी 2022 से पीएमएलए की धारा 50 के तहत कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद, ईडी ने कहा कि दुग्गल एजेंसी के सामने पेश होने में विफल रहे और उन्होंने केवल ईमेल के माध्यम से आंशिक और कथित तौर पर टालमटोल वाले दस्तावेज जमा किए।
--आईएएनएस
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