तहसीलदार और पटवारी ने शासकीय जमीन से हटाया अतिक्रमण, बुजुर्ग ने तोड़ा दम, परिजनों के अधिकारियों पर लगाये गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के नीमच जिले में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ मुहिम के बाद भारी बवाल मच गया है। जयसिंहपुरा (नई आबादी) इलाके में तहसीलदार, पटवारी और भारी पुलिस बल ने जब बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाया, तो इसके कुछ ही देर बाद एक 60 वर्षीय बुजुर्ग नानूराम जाटव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक के परिजनों ने पुलिस और प्रशासन पर ज्यादती और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दबाव बनाने की साजिश बताया है।
जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम जयसिंहपुरा में शासकीय भूमि से कब्जा हटाने पहुंची थी। टीम के साथ बुलडोजर और भारी पुलिस बल मौजूद था। कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हुई और एक झोपड़ी में आगजनी की घटना भी सामने आई। इसी बीच, 60 वर्षीय नानूराम जाटव की मौत की खबर आई, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।
परिजनों का आरोप है “कागज फाड़कर फेंके, पुलिस ने की मारपीट, सदमे से गई जान”
मृतक के बेटे राजकुमार जाटव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। राजकुमार का आरोप है कि जब उन्होंने तहसीलदार संजय मालवीय को कोर्ट के कागजात दिखाए, तो उन्होंने कथित तौर पर कागज मुंह पर फेंक कर मार दिए और कहा, तू चाहे दिल्ली हाईकोर्ट जा या प्रधानमंत्री के पास, यह अतिक्रमण हटेगा। परिजनों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम ने उनके पिता नानूराम जाटव के साथ मारपीट की। उन्हें धमकाया गया कि “यहां दोबारा दिखे तो जान से मार देंगे और जेल में डाल देंगे।”
बेटा बोला सदमे में हुई मेरे पिता की मौत, मुझे न्याय चाहिए
बेटे के मुताबिक, पुलिस की इस धमकी और मारपीट से बुजुर्ग नानूराम गहरे सदमे और दहशत में आ गए थे। घबराहट में वे पास के गांव झांझरवाड़ा चले गए, जहां टेंशन और घबराहट के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। राजकुमार ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार संजय मालवीय, पटवारी, बघाना थाना प्रभारी (TI), सरपंच और मंत्री की मिलीभगत से यह पूरी कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मोबाइल छीन लिया गया और ड्रोन उड़ाकर उन्हें डराया गया।
प्रशासन बोला, आरोप बेबुनियाद, मृतक घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे
पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद नीमच के एसडीएम संजीव साहू ने मीडिया के सामने आकर प्रशासन का पक्ष रखा और परिवार के सभी दावों को झूठा करार दिया। एसडीएम साहू ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से की गई। मौके पर किसी भी अधिकारी या पुलिसकर्मी द्वारा कोई बल प्रयोग या मारपीट नहीं की गई। एसडीएम ने साफ कहा कि जिस 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत की बात कही जा रही है, वे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। उनकी मृत्यु अन्य कारणों से और दूसरी जगह (झांझरवाड़ा) पर हुई है, जिसका अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से कोई सीधा संबंध नहीं है।
अतिक्रमणकारियों ने खुद लगाई झोंपड़ी में आग: एसडीएम
झोपड़ी में आग लगने की घटना पर एसडीएम ने बताया कि प्रशासनिक टीम ने झोपड़ी से मुर्गियां और सामान पहले ही सुरक्षित बाहर निकाल दिया था। इसके बाद प्रेम बाई नाम की महिला की बेटी ने पीछे से जाकर खुद ही अपनी झोपड़ी में आग लगा दी। पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई कर आग बुझाई। प्रशासन के अनुसार, यह अतिक्रमण एक साल पहले भी हटाया गया था। पंचायत को वहां ‘डोम’ (Dome) निर्माण करना था, लेकिन इन लोगों ने दोबारा कब्जा कर लिया। एसडीएम ने यह भी बताया कि जिन लोगों का अतिक्रमण हटाया गया है, उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पक्के मकान पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं।
क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात
बुजुर्ग की मौत के बाद जयसिंहपुरा इलाके में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मृतक का परिवार इस घटना को हत्या बताते हुए दोषी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि बुजुर्ग की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
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