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गोल ही क्यों होते हैं प्लैनेट, चौकोर या पिरामिड क्यों नहीं? जानें कैसे काम करती है ग्रैविटी

नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आपने कभी सोचा है कि हमारी पृथ्वी के साथ ही स्पेस में मौजूद सभी ग्रह गोल ही क्यों होते हैं? वे क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार के क्यों नहीं होते? इसका सीधा संबंध गुरुत्वाकर्षण से है, जो ब्रह्मांड में हर वस्तु के आकार और संरचना को तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

गुरुत्वाकर्षण हर ग्रह को सभी तरफ से बराबर खींचता है, जिसकी वजह से उनका आकार गेंद जैसा गोल हो जाता है। सौर मंडल के सभी ग्रह अलग-अलग आकार और आकृति के हैं। कुछ छोटे चट्टानी हैं तो कुछ विशाल गैसीय। लेकिन एक बात सभी में समान है, वे सभी गोल हैं। फिर चाहे वे छोटे हों या बड़े।

गुरुत्वाकर्षण ही वह शक्ति है जो ग्रहों को क्यूब, पिरामिड या किसी अन्य आकार में नहीं, बल्कि गोल बनाने पर मजबूर करती है। बिना गुरुत्वाकर्षण के ब्रह्मांड में कोई भी बड़ा पिंड गोल नहीं हो पाता।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस बारे में विस्तार से जानकारी देता है, जिसके अनुसार, स्पेस में धूल, गैस और छोटे-छोटे पत्थर आपस में टकराते रहते हैं। धीरे-धीरे ये टुकड़े एक साथ जुड़ते जाते हैं। जब इनमें काफी मात्रा में पदार्थ इकट्ठा हो जाता है, तो उनमें अपना खुद का गुरुत्वाकर्षण पैदा हो जाता है। यह गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत हो जाता है कि वह आसपास के सभी छोटे टुकड़ों को अपनी ओर खींच लेता है। जब ग्रह पर्याप्त बड़ा हो जाता है, तो वह अपने रास्ते में आने वाले सभी कणों को साफ कर लेता है।

गुरुत्वाकर्षण ग्रह के केंद्र से हर दिशा में बराबर खींचता है। ठीक उसी तरह जैसे साइकिल के पहिये की तीलियां केंद्र से किनारों को खींचती हैं। इस बराबर खिंचाव की वजह से ग्रह का आकार तीन आयामी गोले जैसा हो जाता है। अगर कोई हिस्सा बाहर निकला हुआ होता है, तो गुरुत्वाकर्षण उसे अंदर की ओर खींच लेता है। इसी प्रक्रिया से ग्रह गोलाकार बनते हैं।

खास बात है कि सभी ग्रह पूरी तरह गोल नहीं होते हैं। ज्यादातर ग्रह काफी हद तक गोल होते हैं, लेकिन कुछ में थोड़ा अंतर होता है। बुध और शुक्र सबसे ज्यादा गोल हैं, लगभग कंचे जैसी पूर्ण गोलाकारता रखते हैं। बृहस्पति और शनि जैसे विशाल गैसीय ग्रहों में थोड़ा अंतर दिखता है। ये अपनी धुरी पर बहुत तेजी से घूमते हैं। घूमने की वजह से इनकी भूमध्य रेखा के पास का हिस्सा थोड़ा बाहर की ओर उभर आता है। इसे ‘इक्वेटोरियल बल्ज’ या भूमध्यरेखीय उभार कहते हैं। जब कोई चीज तेज घूमती है, तो उसके बाहरी हिस्से को ज्यादा तेजी से चलना पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण इसे अंदर खींचता रहता है, लेकिन घूमने का बल इसे बाहर की ओर धकेलता है। शनि सबसे ज्यादा उभरा हुआ है, उसकी भूमध्य रेखा ध्रुवों से 10.7 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है।

वहीं, बृहस्पति में यह 6.9 प्रतिशत है। ये बास्केटबॉल की तरह थोड़े चपटे दिखते हैं। पृथ्वी और मंगल छोटे हैं और धीरे घूमते हैं, इसलिए इनमें उभार बहुत कम है। पृथ्वी में भूमध्य रेखा सिर्फ 0.3 प्रतिशत ज्यादा चौड़ी है, जबकि मंगल में 0.6 प्रतिशत है। यूरेनस 2.3 प्रतिशत और नेपच्यून 1.7 प्रतिशत इनके बीच की स्थिति में हैं।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Doping test: 69 इंटरनेशनल मैच खेल चुके दिग्गज पर लगा 2 साल का बैन, कोकीन टेस्ट में पाया गया पॉजिटिव

न्यूज़ीलैंड के पूर्व तेज-मध्यम गेंदबाज डग ब्रेसवेल पर काउंटी क्रिकेट खेलने से दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के क्रिकेट नियामक ने उन्हें कोकीन का इस्तेमाल करने के मामले में दोषी पाया। यह दूसरी बार है जब ब्रेसवेल प्रतिबंधित पदार्थ जांच में फंसे। इस फैसले के बाद वह नवंबर 2027 तक किसी भी अधिकृत क्रिकेट गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

यह मामला सितंबर में खेले गए काउंटी मुकाबले से जुड़ा है। 25 सितंबर को चेल्म्सफोर्ड में एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब और समरसेट के बीच डिवीजन एक मैच खेला गया था। इसी मुकाबले के दौरान ब्रेसवेल का नमूना लिया गया था।

लंदन की विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी से मान्यता प्राप्त लैब में जांच के बाद नमूने में कोकीन और उसके मेटाबोलाइट बेंजोयलेक्गोनिन की मौजूदगी पाई गई। ये दोनों पदार्थ टूर्नामेंट के दौरान प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेसवेल के पास इस पदार्थ के इस्तेमाल के लिए किसी तरह की चिकित्सीय मंजूरी नहीं थी। बाद में उन्होंने माना कि 24 सितंबर की शाम से लेकर 25 सितंबर की सुबह तक उन्होंने कोकीन का सेवन किया था। यानी मैच शुरू होने से ठीक पहले उन्होंने प्रतिबंधित पदार्थ लिया था।

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने उनके खिलाफ डोपिंग नियमों के अनुच्छेद 2.1 और 2.2 के तहत कार्रवाई की। इसमें शरीर में प्रतिबंधित पदार्थ पाए जाने और उसके उपयोग दोनों को उल्लंघन माना गया। क्रिकेट नियामक ने माना कि यह सेवन खेल प्रदर्शन बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि नशे की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर नियमों के तहत उन्हें दो साल का प्रतिबंध दिया गया।

ब्रेसवेल ने इस सजा को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद मामले की सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी। उनका निलंबन 24 नवंबर से प्रभावी माना गया है, जिस दिन उन पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। यह प्रतिबंध 23 नवंबर 2027 तक चलेगा। जांच अवधि के दौरान 25 सितंबर से 24 नवंबर के बीच उनके सभी परिणाम रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि एसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

डग ब्रेसवेल ने 2011 से 2023 के बीच न्यूज़ीलैंड के लिए 69 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे। उन्होंने दिसंबर में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी थी। बावजूद इसके यह प्रतिबंध लागू रहेगा और वह इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड या विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के अधीन किसी भी क्रिकेट गतिविधि से दूर रहेंगे। यह मामला क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ा संदेश है कि संन्यास के बाद भी नियम उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

Fri, 24 Apr 2026 18:27:25 +0530

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