तमिलनाडु सरकार ने अपने नागरिकों के हितों का ध्यान में रखकर कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं। हर राज्य सरकार अपने राज्य के नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी होती है। ऐसे में राज्य सरकार ने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने नान मधुलवन योजना शुरू की है। जिसका लाभ राज्य के लाखों युवाओं ने उठाया है। तो आइए जानते हैं कि नान मुधलवन योजना किस तरह से युवाओं के काम आती है।
जानिए क्या है नान मुधलवन योजना
यह एक कौशल विकास योजना है, जिसका मुख्य लक्ष्य युवाओं को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग देना और उनको रोजगार के काबिल बनाकर रोजगार प्रदान करवाना है। इस योजना के तहत युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें तकनीकी और गैर तकनीकी दोनों ही तरह की स्किल्स डेवलप किया जाता है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और उद्योग के क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है।
क्या लाभ मिलते हैं
इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य राज्य के 10 लाख बच्चों को लाभ पहुंचाना है। इसमें छात्रों को इंग्लिश बोलने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जिससे वह इंटरव्यू देने के समय अपनी बात को अच्छे से रख सकें। इस योजना में रोबोटिक और कोडिंग भी सिखाया जाएगा। वहीं युवा यदि विदेश में जाकर नौकरी करना चाहता है, तो उसको विदेशी भाषा सिखाई जाएगी। वहीं पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ऐसे करें आवेदन
इसमें आवेदन के लिए ऑफिशियल वेबसाइट https://naanmudhalvan.tnschools.gov.in/home पर जाकर अकाउंट बनाएं। फिर लॉगिन करने पर आपको ऑनलाइन फॉर्म दिख जाएगा। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। इस तरह से आपका आवेदन पूरा हो जाएगा।
जानिए कौन कर सकता है आवदेन
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को तमिलनाडु का स्थाई निवासी होना चाहिए। आवेदक की उम्र 20 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। वहीं मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन होना चाहिए। वहीं 60% मार्क्स होना जरूरी है।
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तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने चुनाव कैंपेन का थीम बदल दिया है। पहले डीएमके के कैंपेन में क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रवाद, भाषा और विकास जैसे मुद्दे छाए हुए थे। लेकिन अब यह सारे मुद्दे पीछे छूट गए हैं। लेकिन अब सत्ताधारी डीएमके का पूरा फोकस अब परिसीमन के मुद्दे पर आ टिका है। दरअसल, परिसीमन के मुद्दे पर एमके स्टालिन कड़ा विरोध पहले ही कर चुके हैं। स्टालिन ने काला झंडा फहराकर परिसीमन के प्रस्ताव का विरोध किया है। डीएमके के साथ कांग्रेस पार्टी का तमिलनाडु में चुनावी गठबंधन तो है, वहीं सपोर्ट में राहुल गांधी भी परिसीमन का विरोध कर रहे हैं।
परिसीमन का मुद्दा
इस बीच परिसीमन का मुद्दा सामने आया है। वहीं संसद के विशेष सत्र के समय ने राज्य के कई विश्लेषकों को चौंकाया है। क्योंकि संसद की घटनाएं तमिलनाडु के चुनावी नैरेटिव को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगी। यह मुद्दा डीएमके के अनुकूल है। वहीं डीएमके ने इस मुद्दे को राज्य के खिलाफ भेदभाव के सबसे बड़े सबूत के तौर पर पेश करने की रणनीति में बड़ी महारत हासिल कर ली है।
बता दें कि केंद्र सरकार की तरफ से लाया गया रहा यह बिल लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। लेकिन बिल में लिखित रूप से किसी फॉर्मूले या फिर अनुपात की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन केंद्र ने संसद में यह आश्वासन देने की बात कही है कि प्रदेशों के लिए एक समान 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। न कि जनसंख्या के आधार पर। लेकिन इस तरह का आश्वासन भी विवादास्पद है। क्योंकि यह सभी नागरिकों के समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के उद्देश्य को कमजोर करता है।
लेकिन यह बढ़ोतरी क्यों की जा रही है और इतनी जल्दबाजी किस लिए है, यह अभी तक पहेली है। यह तर्क इतने जटिल हैं कि चुनाव के शोर में जनता के लिए इनको समझ पाना मुश्किल है। वहीं यह मुद्दा संतुलित बहस की जगह भावनाओं और प्रचार को बढ़ावा देगा। जबकि यह ऐसा विषय है, जो भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को आकार देने वाला है।
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