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लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा: वह जनरल जो सेना प्रमुख बन सकता था, लेकिन चुकानी पड़ी असहमति की कीमत
Lt Gen SK Sinha: असहमति और विरोध में बहुत बारीक अंतर होता है. यह कहानी लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा की है. उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिसकी कीमत देश को चुकानी पड़ी. एक बेहतरीन जनरल सेना प्रमुख नहीं बन पाया. दरअसल, जरनल सिन्हा की पहचान एक स्पष्टवादी जनरल की रही. वह सेना और देश के हितों को सबसे ऊपर मानते थे. इस कारण कई दफा देश के राजनीतिक नेतृत्व के साथ कुछ मुद्दों पर उनकी असहमति रही, जिसकी कीमत उनको सेना प्रमुख के पद से दूर रहते हुए चुकानी पड़ी थी.
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