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सेंसेक्स में 100 अंक से ज्यादा की बढ़त:78,600 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 50 अंक चढ़ा; ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 10 अगस्त को शेयर बाजार में बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 78,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक ऊपर है, ये 24,600 पर कारोबार कर रहा है। ऑटो, IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में भी बढ़त 7 अगस्त को अमेरिकी बाजारों में बढ़त रही थी विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 1,966 करोड़ के शेयर खरीदे शुक्रवार को बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले पिछले शुक्रवार यानी 7 अगस्त को बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 455 की गिरावट के साथ 78,499 पर बंद हुआ था। निफ्टी में 65 अंकों की गिरावट रही, ये 24,570 के स्तर पर आ गया था।

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Sawan Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पूजा का महत्व, जानें Puja Timing और शुभ मुहूर्त

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है। सावन माह में पड़ने वाले व्रत भी पुण्यदायी व्रतों में से एक माने जाते हैं। सावन में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। वहीं प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, इसको सोम प्रदोष व्रत भी कहा जाता है। प्रदोष में व्रत रखना और भगवान शिव की पूजा-आराधना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत में प्रदोष काल में शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र और भांग-धतूरा आदि अर्पित किए जाते हैं। वहीं शिव मंत्रों के जाप से भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, संतान सुख और रोग आदि से छुटकारा मिलता है। इस बार 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। तो आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे मे...

तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 10 अगस्त को सुबह 8 बजे से होगी और इस तिथि का समापन 11 अगस्त को 4 बजकर 55 मिनट पर होगा। सावन सोम प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 05 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करना शुभ और फलदायी होता है। 

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करें और फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प करें। फिर भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद 11 या 21 बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, फल, सुपारी, इलायची, लौंग, धूप, दीप, फूल, गंध, चावल और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान घी और शक्कर से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

इसके बाद शिव मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें। प्रदोष व्रत कथा पढ़े और पूजा के अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें। पूरा दिन व्रत रखते हुए मन में भगवान शिव का स्मरण करें और शाम को फिर से स्नान आदि करके प्रदोष काल में भगवान शिव की फिर से विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।

महत्व

प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा-अर्चना का महत्व होता है। वहीं सावन में प्रदोष व्रत का महत्व बढ़ जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त प्रदोष काल होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रदोष का समय होता है, जब भगवान शिव कैलाश पर तांडव करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी आराधना करते हैं। प्रदोष व्रत रखने और प्रदोष काल में पूजा करने, दीपदान करने, शिव चालीसा और रुद्राष्टक का पाठ करने से सभी तरह के पापों का अंत हो जाता है।

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  Sports

संगीन आरोप में महीनों तक जेल में रहा, टीम ने भी सस्पेंड किया, अब वो ही बना देश का कप्तान

करीब 4 महीने तक जेल में रहने और कुछ महीने तक टीम से बाहर रहने के बाद जब इस खिलाड़ी की टीम में वापसी हुई थी, तो उस पर खासा बवाल मचा था. आखिरकार अदालत ने इस क्रिकेटर को बरी कर दिया था. Mon, 10 Aug 2026 22:19:28 +0530

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