कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को बताया ‘आतंकवादी’, मचा बवाल, भाजपा ने बोला हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिससे सियासी बवाल मच गया है। मंगलवार, 21 अप्रैल को मल्लिकार्जुन खरगे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कह दिया। इतना ही नहीं खरगे ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सरकारी मशीनरी और केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करके राजनीतिक पार्टियों और लोगों को डरा-धमका रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ये एआईएडीएमके के लोग, जो खुद अन्नादुरई की फोटो लगाते हैं, वे मोदी के साथ कैसे जुड़ सकते हैं? वह एक आतंकवादी हैं। उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करेगी। ये लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने बयान पर सफाई भी दी।
खरगे के बयान पर भड़की भाजपा
बता दें कि खरगे के बयान के बाद भाजपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कांग्रेस की गिरती राजनीति की पराकाष्ठा है। यह सिर्फ़ एक व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि उन 140 करोड़ देशवासियों के जनादेश का भी अपमान है, जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए उन पर भरोसा जताया है।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जब भी कांग्रेस विकास और तथ्यों के सवालों पर घिरती है, तो राहुल गांधी, सोनिया गांधी और उनके चेले मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसी बयानबाज़ी करते हैं। जब देश की महिला शक्ति कांग्रेस से अपने अधिकारों का हिसाब मांग रही है, तो ऐसे घटिया बयानों का आना उसकी हताशा दिखाता है।
उन्होंने कहा, कांग्रेस और राहुल गांधी को ऐसे बयान के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। जब भी राहुल गांधी और उनके साथियों ने शब्दों की मर्यादा की हदें पार की हैं, जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया है। इस बार भी देश की जनता जरूर जवाब देगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के लिए ‘आतंकवादी’ जैसे शब्दों का प्रयोग कांग्रेस की गिरती हुई राजनीति की पराकाष्ठा है। यह केवल एक व्यक्ति पर टिप्पणी नहीं, बल्कि उन 140 करोड़ देशवासियों के जनादेश का भी अनादर है, जिन्होंने लोकतांत्रिक… https://t.co/DX3SWrl0v6
— Nitin Nabin (@NitinNabin) April 21, 2026
RBI का बड़ा कदम, डिजिटल पेमेंट से जुड़े कई नियम बदले, नया ई-मैंडेट फ्रेमवर्क लागू
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने 21 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट के लिए ई-मैंडेट फ्रेमवर्क 2026 लागू कर दिया है। इससे संबंधित दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं, जो सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइड और पेमेंट सिस्टम पार्टिसिपेंट पर लागू होंगे। इसी के साथ-साथ रेकरिंग ट्रांजैक्शन, डोमेस्टिक या क्रॉस बॉर्डर लेनदेन (यूपीपी/पीपीआई/कार्ड के जरिए) लागू होंगे। इसकी जानकारी ग्राहकों को होनी चाहिए।
नए नियमों के तहत जो कस्टमर ई-मैंडेट की सुविधा लेना चाहता है, उसे एक बार रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करना होगा। मैंडेट का रजिस्ट्रेशन तभी होगा जब जारीकर्ता द्वारा जरूरी सामान्य प्रक्रिया के अलावा अतिरिक्त प्रमाणीकरण कारक (AFA) का सफल सत्यापन पूरा किया पूरा होगा। जारीकर्ता द्वारा पंजीकृत हर ईमेल पर इसकी वैधता अवधि भी बताएंगे। कस्टमर को किसी भी समय वैधता अवधि बदलने या मैंडेट वापस लेने की सुविधा भी मिलेगी। जिसकी जानकारी जारीकर्ताओं को रजिस्ट्रेशन के दौरान ही देनी होगी।
ई-मैंडेट में बदलाव के लिए AFA सत्यापन जरूरी
ई-मैंडेट निश्चित राशि या कुल सीमा के अधीन एक परिवर्तनशील राशि के लिए हो सकता है। परिवर्तनशील लिमिट के मामले में जारीकर्ता कस्टमर को किसी भी आवर्ती लेनदेन का अधिकतम मूल्य तय करने की सुविधा भी देंगे। कस्टमर को सूचना पाने के लिए उपलब्ध विकल्पों एसएमएस, ईमेल आदि में से कोई एक तरीका चुनने या बदलने की सुविधा दी जाएगी। किसी मौजूदा ई-मैंडेट में कोई भी बदलाव या उसे वापस लेने के लिए भी जारीकर्ता एएफए सत्यापन करेंगे।
आवर्ती भुगतान के लिए लिमिट तय
रेकरिंग ट्रांजेक्शन यानी आवर्ती लेनदेन के लिए भी सीमा निर्धारित की है। बिना ओटीपी प्रति लेनदेन की सीमा 15,000 रुपये होगी। एएफए सत्यापन अनिवार्य नहीं होगा। वहीं यदि इससे अधिक अमाउंट का ट्रांजेक्शन किया जाता है, तो AFA अनिवार्य होगा। इंश्योरेंस प्रीमियम, म्युचुअल फंड सब्सक्रिप्शन, क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट का भुगतान भी बिना एएफए किया जा सकता है, हालांकि प्रति ट्रांजेक्शन की सीमा एक लाख रुपये होगी।
इन नियमों को भी जान लें
असल चार्ज/डेबिट से 24 घंटे पहले लेनदेन जारीकर्ताओं को लेनदेन से संबंधित नोटिफिकेशन भेजना होगा। नोटिफिकेशन में ग्राहकों कर मर्चेंट का नाम, लेनदेन की रकम, डेबिट की तारीख, समय, ई-मैंडेट का रिफरेंस नंबर, डेबिट का कारण इत्यादि की जानकारी देनी होगी। जारीकर्ता लेनदेन के बाद भी सूचना भेजेंगे, जिसमें शिकायत निवारण की जानकारी भी दी जाएगी।
रेकरिंग ट्रांजेक्शन के लिए के लिए ई-मैंडेट सुविधा पर ग्राहकों को कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। आरबीआई के निर्देशों का पालन करते हुए फिर से जारी गए कार्ड से मौजूदा ई-मैंडेट को जोड़ा जा सकता है। शिकायतों के समाधान के लिए जारीकर्ता एक उचित विवाद प्रणाली स्थापित करेंगे। ताकि ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने में आसानी हो सके।
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