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यूपी सरकार ने सुनी यहां के ग्रामीणों की फरियाद, गांव का नाम बदलने की दी सौगात; अधिसूचना जारी

UP News: योगी सरकार राज्य के सभी वर्गों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है. इसके साथ ही लोगों की हर परेशानी को खत्म करने की कोशिश कर रही है. यही नहीं योगी सरकार पीड़ितों की शिकायतों का भी तेजी निस्तारण कर रही है. अब योगी सरकार ने आगरा के एक गांव के ग्रामीणों की भी पुकार सुन ली और उनके गांव का नाम बदल दिया.

जिसके लिए सरकार ने अधिसूचना भी जारी कर दी. दरअसल, हम बात कर रहे हैं आगरा की किरावली तहसील के एक गांव के बारे में. जिसका नाम बदलने की पिछले लंबे समय से मांग चल रही है. योगी सरकार ने जनता की पुकार सुन ली और गांव का नाम बदल दिया.

बता दें कि आगरा की किरावली तहसील के गांव बहरावती का नाम बदलकर सरकार ने पृथ्वीपुरा कर दिया है. राज्यपाल की मंजूरी और गजट प्रकाशन के बाद अब इस गांव का नया नाम सभी राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो जाएगा. उसके बाद ये गांव आधिकारिक रूप से पृथ्वीपुरा कहलाने लगेगा.

लंबे समय से चल रही नाम बदलने की प्रक्रिया

बता दें कि आगरा के तहसील किरावली क्षेत्र के ग्राम नगला बहरावती का नाम बदलने की प्रक्रिया काफी लंबे समय से चल रही थी. जिसकी ग्रामीणों ने भी मांग की थी. आखिरकार सरकार ने ग्रामीणों की मांग सुन ली और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गांव का नाम बदलने पर अंतिम मुहर भी लगा दी. यूपी की  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने राजस्व संहिता की शक्तियों का प्रयोग करते हुए नगला बहरावती का नाम बदलकर पृथ्वीपुरा कर दिया. साथ ही इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी.

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव अपर्णा यू की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट ने नवंबर 2023 में प्रस्ताव भेजा था, जिसे आगरा के मंडलायुक्त और राजस्व परिषद ने अपनी संस्तुति प्रदान की थी. इस संबंध में भारत सरकार के गृह मंत्रालय से 22 जनवरी को अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद शासन ने गांव का नाम बदलने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया.

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भूमि प्रबंध समिति ने पारित किया था नाम बदलने का प्रस्ताव

बता दें कि ग्राम पंचायत की भूमि प्रबंध समिति ने भी पहले गांव के नाम में बदलाव का प्रस्ताव पारित किया था. वहीं शासन ने ये भी स्पष्ट किया है कि गांव का नाम बदलने का प्रभाव राजस्व ग्राम से संबंधित किसी भी न्यायालय में लंबित विधिक कार्रवाई पर नहीं पड़ेगा. सरकारी गजट में प्रकाशन के साथ ही अब सरकारी अभिलेखों में गांव का नया नाम पृथ्वीपुरा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. गांव का नाम बदलने पर ग्रामीणों ने खुशी जताई है.

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धरती की हलचल, सिस्मिक वेव्स और मापने की पूरी प्रक्रिया, जानें भूकंप का विज्ञान

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। जापान में 7.5 तीव्रता और भारत के मणिपुर में 5.2 तीव्रता के हाल ही में आए भूकंप ने एक बार फिर लोगों का ध्यान इस प्राकृतिक घटना की ओर खींचा है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि भूकंप आखिर होता क्या है, यह क्यों आता है और वैज्ञानिक इसे कैसे मापते हैं?

भूकंप दरअसल पृथ्वी की सतह यानी क्रस्ट के अचानक हिलने को कहा जाता है। जब धरती के अंदर जमा ऊर्जा एकाएक बाहर निकलती है, तो जमीन में कंपन पैदा होता है, जिसे हम भूकंप के रूप में महसूस करते हैं। यह कंपन कभी हल्का तो कभी बेहद तेज हो सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान भी हो सकता है।

पृथ्वी की संरचना को समझना भूकंप के कारणों को जानने में मदद करता है। हमारी पृथ्वी चार मुख्य परतों से बनी है- क्रस्ट, मेंटल, बाहरी कोर और आंतरिक कोर। क्रस्ट और मेंटल का ऊपरी हिस्सा मिलकर एक ठोस परत बनाते हैं, जिसे लिथोस्फीयर कहा जाता है। यह परत एकसार नहीं होती, बल्कि कई बड़े-बड़े टुकड़ों में बंटी होती है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है।

ये प्लेट्स लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं, अलग होती हैं या एक-दूसरे के पास से गुजरती हैं, तो धरती के अंदर दबाव बढ़ता है। जब यह दबाव ज्यादा हो जाता है, तो चट्टानों में दरारें पड़ती हैं, जिन्हें फॉल्ट लाइन कहा जाता है। इसी फॉल्ट पर अचानक हलचल होने से भूकंप आता है।

भूकंप जिस स्थान से शुरू होता है, उसे एपिसेंटर यानी अधिकेंद्र कहा जाता है। सबसे तेज झटके इसी क्षेत्र के आसपास महसूस होते हैं, लेकिन इनका असर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक भी पहुंच सकता है।

भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है, वह तरंगों के रूप में फैलती है, जिन्हें सिस्मिक वेव्स कहा जाता है। ये तरंगें धरती के अंदर और सतह पर यात्रा करती हैं और अलग-अलग जगहों पर कंपन पैदा करती हैं। इन्हीं तरंगों के जरिए वैज्ञानिक भूकंप का अध्ययन करते हैं।

भूकंप को मापने के लिए सीस्मोमीटर नामक यंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। यह उपकरण जमीन के भीतर होने वाली हलचल को रिकॉर्ड करता है और उसे ग्राफ के रूप में दिखाता है। इन रिकॉर्ड्स की मदद से वैज्ञानिक यह पता लगाते हैं कि भूकंप कब आया, उसका केंद्र कहां था और उसकी तीव्रता कितनी थी।

दिलचस्प बात यह है कि भूकंप सिर्फ पृथ्वी तक सीमित नहीं हैं। वैज्ञानिकों ने चंद्रमा और अन्य ग्रहों पर भी सिस्मिक गतिविधियों के संकेत पाए हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के इनसाइट मिशन ने मंगल ग्रह पर सिस्मोमीटर भेजकर वहां होने वाले ‘मार्सक्वेक’ का अध्ययन किया है। इन अध्ययनों से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि अन्य ग्रहों की आंतरिक संरचना कैसी है।

वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन इसके कारणों और पैटर्न को समझकर नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। जागरूकता और वैज्ञानिक अध्ययन ही इस प्राकृतिक आपदा से बचाव का सबसे बड़ा उपाय हैं।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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