भारत-दक्षिण कोरिया ने ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ाया सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और साउथ कोरिया के बीच ऊर्जा संसाधन सुरक्षा को लेकर एक अहम संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया है। दोनों देशों ने सोमवार को जारी इस बयान में अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया है। दोनों देशों ने एक खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपने साझा दृष्टिकोण को दोहराया।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक और ऊर्जा सहयोग उनकी रणनीतिक साझेदारी का मुख्य आधार है। यह सहयोग खुले बाजार, पारदर्शिता और नियमों पर आधारित व्यापार व्यवस्था पर टिका हुआ है, जो दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी है। साथ ही, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का उद्योगों और बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता के तहत अपने सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इस समझौते के माध्यम से ऊर्जा व्यापार और निवेश को और मजबूत करने की योजना है। वर्तमान में भारत, दक्षिण कोरिया को नैफ्था और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है, जबकि दक्षिण कोरिया भारत को पेट्रोलियम उत्पाद और लुब्रिकेंट बेस ऑयल उपलब्ध कराता है।
बयान में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने और ऊर्जा संसाधनों के लिए खुले व्यापार का समर्थन करने की बात कही। इसके अलावा, प्रमुख एलएनजी उपभोक्ता देशों के रूप में बाजार की स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
भारत और दक्षिण कोरिया ने यह भी माना कि मजबूत समुद्री ढांचा और जहाज निर्माण क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस दिशा में दोनों देशों ने जहाज निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसमें भारत में शिपयार्ड स्थापित करना, मौजूदा शिपयार्ड का आधुनिकीकरण, तकनीकी सहयोग और मानव संसाधन विकास शामिल है।
संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एक-दूसरे को ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति बनाए रखने का संकल्प दोहराया। साथ ही, क्षेत्रीय साझेदार देशों से भी अपील की गई कि वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को खुला और स्थिर बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि सभी देशों की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित हो सके।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत की ग्रोथ मजबूत, लेकिन महंगी ऊर्जा बन सकती है खतरा: आईएमएफ
वॉशिंगटन, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत की आर्थिक बढ़त का नजरिया अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक बढ़ती रहीं तो इससे अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
आईएमएफ के एशिया और पैसिफिक विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने स्प्रिंग मीटिंग्स के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने अपने अनुमान में 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी की है।
उन्होंने बताया कि यह सुधार 2026 की शुरुआत में मजबूत आर्थिक गति और टैरिफ में कमी की वजह से किया गया है। उन्होंने कहा कि 2026 में प्रवेश करते समय अर्थव्यवस्था में अच्छा मोमेंटम था। टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिए गए, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
आईएमएफ ने यह भी कहा कि भारत को पहले किए गए टैक्स सुधारों का फायदा मिला है, जिसने घरेलू मांग के साथ मिलकर विकास को सहारा दिया है।
हालांकि, श्रीनिवासन ने चेतावनी दी कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष से जुड़े खतरे अभी भी बड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है और सिर्फ तेल-गैस तक सीमित न रहकर और फैलता है, तो यह भारत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
भारत, एशिया के कई अन्य देशों की तरह, ऊर्जा के लिए आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में तेल और गैस की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और बाहरी आर्थिक संतुलन बिगाड़ सकती हैं।
नीतियों को लेकर आईएमएफ ने कहा कि भारत ने अब तक समझदारी से वित्तीय नीति अपनाई है। श्रीनिवासन ने कहा कि उन्होंने अपनी फिस्कल पॉलिसी को बहुत संतुलित रखा है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने अच्छे बफर बनाए हैं और जरूरत पड़ने पर सहारा देने में सक्षम रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक हालात बिगड़ते हैं, तो ये बफर बहुत काम आएंगे। अगर स्थिति और खराब होती है, तो इसका असर सभी देशों पर पड़ेगा, भारत पर भी।
आईएमएफ ने क्षेत्र के लिए अपनी सामान्य सलाह दोहराते हुए कहा कि सरकारों को बाजार के संकेतों को काम करने देना चाहिए, लेकिन कमजोर वर्गों की सुरक्षा भी करनी चाहिए। देशों को कीमतों के संकेतों को काम करने देना चाहिए और जरूरतमंदों को सीमित समय के लिए और सही तरीके से मदद देनी चाहिए।
रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा), जो भारत के लिए एक बड़ा सहारा है, उस पर आईएमएफ ने कहा कि यह अभी भी मजबूत बना हुआ है। श्रीनिवासन ने कहा कि रेमिटेंस काफी स्थिर और मजबूत बना हुआ है, और बताया कि भारत और एशिया के दूसरे देशों के ज्यादातर कामगार अभी भी मिडिल ईस्ट में काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वहां पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्शन) का काम आगे चलकर रेमिटेंस को बनाए रखने में मदद कर सकता है। मुझे लगता है कि रेमिटेंस आगे भी मजबूत रह सकता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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