भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम, भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह पहुंचेगा वॉशिंगटन
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह वॉशिंगटन पहुंचेगा। यह हमारे द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका पिछले एक साल से भारत के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि एक पारस्परिक व्यापार ढांचा तैयार किया जा सके। इसमें कृषि क्षेत्र सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बनकर सामने आया है।
पिछले सप्ताह 17 मार्च को वित्त वर्ष 2027 के लिए बजट पर कांग्रेस सुनवाई के दौरान ग्रीर ने कहा, “हम पिछले एक साल से भारतीयों के साथ काम कर रहे हैं। मैंने इस हफ्ते उनके राजदूत से भी मुलाकात की, ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।”
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापक रणनीति के तहत टैरिफ का इस्तेमाल करके व्यापार समझौतों को अपने पक्ष में करने और व्यापार संबंधों को नए तरीके से बनाने की कोशिश कर रहा है।
ग्रीर ने सांसदों को बताया कि वॉशिंगटन अमेरिकी निर्यात के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है। अमेरिका कई देशों के साथ समझौते कर चुका है और अब अमेरिकी किसानों और उद्योगों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने पर काम कर रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि टैरिफ की बाधाएं अभी भी बड़ी समस्या हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अमेरिकी निर्यातकों की पकड़ कमजोर हुई है। उन्होंने कहा, “हमने सेब के बारे में कई बार बात की है। मैंने खुद यह मुद्दा अपने समकक्ष के सामने उठाया है।”
अमेरिकी सांसदों ने कहा कि भारत की ओर से सेब पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो एक बड़ा उदाहरण है। इस वजह से अमेरिकी सेबों की हिस्सेदारी भारत के बाजार में काफी कम हो गई है। 2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 8.5 प्रतिशत रह गई है। इस बीच ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।
ग्रीर ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि एक ऐसा संतुलित समझौता हो, जिसमें अमेरिकी निर्यातकों को भी उन बाजारों में बराबर मौका मिले जहां भारत अभी भी आयात पर निर्भर है।
उन्होंने कहा, “अगर भारत सेब आयात करता है तो हम चाहते हैं कि वह अमेरिका से भी सेब खरीदे।” साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका भारत के घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रहा है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
सान्या तैयार: एशियन बीच गेम्स 2026 से पहले अंतिम दौर में पहुंचीं भव्य तैयारियां
बीजिंग, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण चीन के खूबसूरत तटीय शहर सान्या में होने वाले छठे एशियन बीच गेम्स की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। आयोजन समिति के अनुसार, ओपनिंग सेरेमनी में कुछ ही दिन शेष हैं और पूरे क्षेत्र में खेलों का माहौल तेजी से बनता जा रहा है।
यह बहुप्रतीक्षित खेल आयोजन न केवल खेल प्रतियोगिताओं का मंच होगा, बल्कि पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। इससे पहले 2012 में हैयांग में इन खेलों का आयोजन किया गया था, और अब दूसरी बार चीन इस प्रतिष्ठित इवेंट की मेजबानी कर रहा है।
इस बार प्रतियोगिता में 14 खेलों के साथ कुल 63 इवेंट्स शामिल होंगे। पारंपरिक खेलों जैसे स्विमिंग और सेलिंग के साथ-साथ टेकबॉल और बीच कबड्डी जैसे नए खेल भी इसमें आकर्षण का केंद्र होंगे।
आयोजन को सरल, सुरक्षित और शानदार बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तकनीक इस बार गेम्स का अहम हिस्सा होगी, जिसमें स्मार्ट रजिस्ट्रेशन सिस्टम, 5जी आधारित इमरजेंसी सेवाएं, सर्विस रोबोट और ड्रोन तकनीक का उपयोग शामिल है।
साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन प्रैक्टिस पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकांश खेल स्थलों को मौजूदा ढांचे में सुधार कर तैयार किया गया है या अस्थायी संरचनाओं का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, परिवहन के लिए बड़ी संख्या में नई ऊर्जा (न्यू-एनर्जी) वाहनों का उपयोग किया जाएगा।
हाईनान प्रांत के इस रिसॉर्ट शहर में आयोजित हो रहे ये खेल क्षेत्र को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और खेल केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इस आयोजन के जरिए पूरे द्वीप के पर्यटन स्थलों- जैसे समुद्र तट, ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट, स्थानीय संस्कृति और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग को एक साथ जोड़ने की योजना है।
कुल मिलाकर, एशियन बीच गेम्स न सिर्फ खेल प्रतिस्पर्धा का मंच होंगे, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को गति देने का एक बड़ा अवसर भी साबित हो सकते हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
एबीएम/
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