सही पोषण से रोका जा सकता है हेयर फॉल, समय पर पहचान है जरूरी
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में बालों का झड़ना और पतला होना महिलाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। कई लोग इसे प्रदूषण, हेयर प्रोडक्ट्स या तनाव से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार, बालों की सेहत सिर्फ बाहरी देखभाल पर नहीं, बल्कि शरीर के अंदर मौजूद पोषण पर भी निर्भर करती है। जब शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलते, तो इसका असर सीधे बालों की जड़ों पर पड़ता है, जिससे धीरे-धीरे बाल पतले होने लगते हैं और उनका झड़ना बढ़ जाता है।
पोषण की कमी को अगर सही समय पर पहचाना जाए तो ठीक किया जा सकता है। खासतौर पर मासिक धर्म, गर्भावस्था, अनियमित खानपान और तनाव जैसी स्थितियों में शरीर कुछ जरूरी तत्वों की कमी के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
सबसे अहम पोषक तत्वों में आयरन का नाम सबसे पहले आता है। शरीर में आयरन की कमी होने पर बालों की जड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। इससे बालों की ग्रोथ धीमी हो जाती है और झड़ना बढ़ जाता है। कई बार ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन सामान्य दिखता है, लेकिन शरीर में आयरन का स्टोर कम होता है, जिसे फेरिटिन कहा जाता है। रिसर्च बताती है कि बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए पर्याप्त स्तर का आयरन जरूरी होता है।
इसके अलावा विटामिन डी भी बालों की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बालों के ग्रोथ साइकिल को संतुलित रखने में मदद करता है। जो लोग धूप में कम निकलते हैं, उनमें इसकी कमी ज्यादा देखी जाती है। वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, इसकी कमी से बालों का दोबारा उगना धीमा हो सकता है और घनापन कम हो सकता है। हालांकि, इसका स्तर सुधारने में समय लगता है, लेकिन सही मात्रा में मिलने पर यह बालों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
विटामिन बी12 भी बालों के लिए जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे बाल कमजोर और बेजान हो सकते हैं।
जिंक बालों की जड़ों की मरम्मत और स्कैल्प को स्वस्थ रखने में मदद करता है। यह प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल होता है। इसकी कमी से बालों का झड़ना बढ़ सकता है और स्कैल्प में जलन या सूखापन महसूस हो सकता है। खराब पाचन भी इसके अवशोषण को प्रभावित कर सकता है।
प्रोटीन की बात करें तो बाल मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं। जब शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो बालों की ग्रोथ धीमी हो जाती है और वे कमजोर होकर टूटने लगते हैं। कई बार डाइटिंग या व्यस्त जीवनशैली के कारण महिलाएं पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पातीं, जिसका असर बालों पर साफ दिखता है।
--आईएएनएस
पीके/पीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अब भीम यूपीआई ऐप पर भी चेक कर पाएंगे क्रेडिट स्कोर, एनपीसीआई ने सिबिल के साथ किया करार
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने सोमवार को कहा कि उसकी इकाई भीम सर्विसेज और ट्रांसयूनियन सिबिल के बीच करार हुआ है। इसके बाद अब यूजर्स भीम ऐप पर अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर पाएंगे।
इस एकीकरण के साथ, यूजर्स सीधे भीम ऐप पर अपना सिबिल स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट देख सकते हैं, जिससे वे प्लेटफॉर्म छोड़े बिना अपनी क्रेडिट स्थिति पर आसानी से नजर रख सकते हैं।
एनपीसीआई ने बताया कि क्रेडिट डेटा तक पहुंच सहमति-आधारित मॉडल द्वारा नियंत्रित होगी, जिसके तहत जानकारी केवल यूजर्स की स्पष्ट स्वीकृति के बाद ही प्राप्त की जाएगी।
यह फीचर भीम ऐप के वर्जन 4.0.19 और उससे ऊपर के वर्जनों पर उपलब्ध है।
क्रेडिट स्कोर की जानकारी जोड़ने का उद्देश्य ऐप की उपयोगिता को रोजमर्रा के भुगतानों से आगे बढ़ाकर व्यापक वित्तीय जागरूकता तक फैलाना है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा, जैसे-जैसे भारत क्रेडिट के लिए लेन-देन आधारित दृष्टिकोण से अधिक योजनाबद्ध दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, यह उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है।
एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड की एमडी और सीईओ ललिता नटराज ने कहा कि यह सहयोग ऐप के मूल सिद्धांत, यानी सरलता और उपयोगकर्ता नियंत्रण को क्रेडिट क्षेत्र में आगे बढ़ाता है।
इससे पहले मार्च में, एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड ने ऐप पर यूपीआई भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू किया था, जिससे उपयोगकर्ता फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान का उपयोग करके 5,000 रुपए तक के लेनदेन को स्वीकृत कर सकते हैं।
एनपीसीआई भीम सर्विसेज लिमिटेड द्वारा विकसित भारत का स्वदेशी यूपीआई भुगतान ऐप, भीम, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से अधिक भारतीय भाषाओं में उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है। ऐप में खर्च विभाजन, फैमिली मोड और खर्च विश्लेषण जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
हाल ही में, भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) को 10 वर्ष पूरे हो गए हैं और इसकी ग्लोबल रियल टाइम लेनदेन में हिस्सेदारी 49 प्रतिशत हो गई है।
--आईएएनएस
एबीएस/
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