खाड़ी में शुरू हुआ ड्रोन वॉर: अमेरिका ने पकड़ा जहाज तो ईरानी ड्रोनों ने दहला दी ओमान की खाड़ी, अमेरिकी जहाजों पर हमला
ओमान की खाड़ी में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान का झंडा लगे एक मालवाहक जहाज को कब्जे में लिए जाने के बाद ईरान ने 'जैसे को तैसा' वाली रणनीति अपनाई है। ईरानी सेना (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी जहाजों पर आत्मघाती ड्रोनों से हमला बोल दिया है।
इस कार्रवाई को ईरान के 'बदलापुर' अवतार के रूप में देखा जा रहा है, जिसने मिडिल ईस्ट में एक बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
US CENTCOM released footages showing US Marines seizing an Iranian-flagged cargo vessel in the Arabian Sea on Sunday. The destroyer Spruance disabled the ship’s propulsion system after six hours of unanswered warnings before troops boarded by rope from a helicopter, CENTCOM said. pic.twitter.com/Zxnir2ccpi
— Iran International English (@IranIntl_En) April 20, 2026
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने आधुनिक ड्रोनों के बेड़े का इस्तेमाल कर अमेरिकी नेवी के साथ-साथ वहां से गुजर रहे कुछ व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाने की कोशिश की है। इन ड्रोनों ने अमेरिकी जहाजों के संचार तंत्र और ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुँचाया है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा है कि उनकी 'एंटी-ड्रोन' डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया है, लेकिन समुद्र के बीचों-बीच इस तरह का सीधा हमला दशकों में पहली बार देखा गया है।
इस ताज़ा हमले के बाद पूरे क्षेत्र में 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी, जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग हैं, अब रणक्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक उसके जब्त किए गए जहाज को नहीं छोड़ा जाता और अमेरिका अपनी नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक उसके ड्रोन हमला जारी रखेंगे। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपनी पांचवीं फ्लीट को हाई अलर्ट पर रखकर जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में छिड़ी इस जंग का सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ना शुरू हो गया है। जहाजों पर ड्रोन हमलों की खबर से समुद्री बीमा दरों में भारी बढ़ोतरी हुई है और शिपिंग कंपनियों ने अपने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं।
अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट सकती है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस 'बदलापुर' कूटनीति के कारण हलचल मच गई है।
New Labour Code: नए लेबर कोड से सैलरी स्ट्रक्चर बदलेगा, किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा, जानें पूरा गणित
New Labour Code: देश में लागू हुए नए लेबर कोड अब कर्मचारियों की वेतन संरचना को पूरी तरह बदलने वाले। 21 नवंबर 2025 से लागू इन चार कोड- कोड ऑन वेजेस, इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड का सबसे बड़ा असर वेतन की नई परिभाषा पर पड़ा है।
नए नियम के अनुसार, किसी भी कर्मचारी के कुल वेतन (सीटीसी) में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता मिलाकर कम से कम 50% होना जरूरी। यानी अब कंपनियां मकान किराया भत्ता, बोनस, कमीशन या अन्य भत्तों के जरिए हाथ में मिलने वाली सैलरी को ज्यादा दिखाकर मूल वेतन कम नहीं रख पाएंगी। अगर ये भत्ते 50% से ज्यादा होते हैं, तो अतिरिक्त हिस्सा वेतन में जोड़ दिया जाएगा।
पीएफ और ग्रेच्यूटी बढ़ जाएगी
इस बदलाव का असर अलग-अलग आय वर्ग पर अलग तरीके से दिखेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन अभी 50% से कम है, उनका मूल वेतन बढ़ेगा। इससे भविष्य निधि (पीएफ) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, लेकिन हाथ में मिलने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती। हालांकि, लंबी अवधि में यही कर्मचारी ज्यादा फायदा पाएंगे।
करियर शुरुआत करने वालों को ज्यादा फायदा
शुरुआती करियर वाले पेशेवर इस बदलाव के सबसे बड़े लाभार्थी माने जा रहे। इन कर्मचारियों की वेतन संरचना ज्यादा स्थिर होती है, इसलिए बढ़ा हुआ पीएफ और ग्रेच्युटी उनके लिए लंबी अवधि में बड़ी बचत तैयार करेगा। चक्रवृद्धि का फायदा भी इसी वर्ग को सबसे ज्यादा मिलेगा।
मध्यम स्तर के कर्मचारियों के लिए यह बदलाव वेतन को ज्यादा व्यवस्थित बनाएगा। हालांकि भत्ते कम होने से हाथ में मिलने वाली सैलरी थोड़ी घट सकती है लेकिन पीएफ और ग्रेच्युटी जैसी बचत में सुधार होगा।
हाई इनकम वालों पर सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा असर उच्च आय वर्ग या वरिष्ठ कर्मचारियों पर पड़ सकता है। ये लोग आमतौर पर ज्यादा परिवर्तनीय वेतन और भत्तों पर निर्भर रहते हैं, जिससे हाथ में सैलरी ज्यादा रहती है। नए नियम के बाद उनका एक बड़ा हिस्सा तय वेतन में शामिल होगा, जिससे नकद आय घट सकती है। हालांकि इनके लिए भी एक विकल्प मौजूद है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत अपवर्जित कर्मचारी का विकल्प उन्हें यह तय करने की छूट देता है कि वे पीएफ में ज्यादा योगदान करें या हाथ में मिलने वाली सैलरी को प्राथमिकता दें।
यह सुविधा खासकर उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी सैलरी तय सीमा (15000 रुपये प्रति माह) से अधिक है और जिनका पहले से पीएफ खाता नहीं है। कुल मिलाकर, नए लेबर कोड अल्पकाल में हाथ में मिलने वाली सैलरी को थोड़ा प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में यह कर्मचारियों के लिए मजबूत रिटायरमेंट फंड और बेहतर आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
(प्रियंका कुमारी)
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