अमेरिका में पिता बना हत्यारा: 8 मासूमों की ली जान, याद दिला दिया 'फैमिलिसाइड' का खौफनाक इतिहास
नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस) अमेरिका के लुइसियाना राज्य के शरेवपोर्ट में 19 अप्रैल को जो हुआ, वह सोच से परे था। दिल दहला देने वाले मामले ने एक बार फिर उस दुर्लभ लेकिन भयावह अपराध की याद दिला दी, जिसे आपराधिक भाषा में फैमिलिसाइड कहा जाता है—यानी किसी व्यक्ति का अपने ही परिवार के कई सदस्यों की हत्या करना। इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत दुर्लभ होती हैं, लेकिन जब भी घटती हैं, समाज को झकझोर देती हैं।
शरेवपोर्ट मामले में जिस तरह एक पिता पर अपने ही बच्चों की हत्या का आरोप सामने आया है, उसने इतिहास के कुछ कुख्यात मामलों की याद ताज़ा कर दी है, जहाँ पारिवारिक रिश्ते हिंसा में बदल गए।
ऐसा ही एक शुरुआती और सबसे घातक मामला 1927 में अमेरिका के मिशिगन राज्य में सामने आया था, जब एंड्रयू किओहो ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद एक स्कूल में बम विस्फोट कर दिया था। इस हमले में 38 बच्चों सहित कुल 45 लोगों की मौत हुई थी। यह घटना आज भी अमेरिका के सबसे घातक स्कूल हमलों में गिनी जाती है और इसे पारिवारिक हिंसा तथा सार्वजनिक नरसंहार दोनों का मिश्रित उदाहरण माना जाता है।
इसके बाद 1971 में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया, जब जॉन लिस्ट ने न्यू जर्सी में अपनी पत्नी, मां और तीन बच्चों की गोली मारकर हत्या कर दी। लिस्ट ने इस अपराध के पीछे आर्थिक तंगी और कथित धार्मिक कारणों को जिम्मेदार बताया। वह लगभग 18 वर्षों तक फरार रहा और बाद में 1989 में गिरफ्तार किया गया।
हाल के वर्षों में, 2018 का क्रिस वॉट्स मामला भी दुनिया भर में चर्चा का विषय बना। कोलोराडो में रहने वाले वॉट्स ने अपनी गर्भवती पत्नी और दो छोटी बेटियों की हत्या कर दी थी। बाद में उसने अपराध स्वीकार किया और आजीवन कारावास की सजा पाई। इस मामले ने सोशल मीडिया युग में घरेलू हिंसा की जटिलता को भी उजागर किया।
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन और अन्य शोध संस्थानों के अध्ययन बताते हैं कि फैमिलिसाइड अत्यंत दुर्लभ होते हुए भी अत्यधिक घातक श्रेणी के अपराध हैं, जिनमें अक्सर अपराधी पहले अपने परिवार को ही निशाना बनाता है, क्योंकि वहां उसे सबसे अधिक नियंत्रण या भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है।
शरेवपोर्ट की हालिया घटना भी इसी संदर्भ में जांच के दायरे में है, जहां पुलिस अभी सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
--आईएएनएस
केआर/
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खड़े-खड़े सोते व्यक्ति का वीडियो वायरल, महाराष्ट्र के बाद अब चंडीगढ़ में जॉम्बी ड्रग का आतंक. जानिए सच्चाई
chandigarh Zombie Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों अजीब और चौंकाने वाले वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग सड़कों पर खड़े-खड़े सोते या बिल्कुल स्थिर दिखाई दे रहे हैं. कुछ दिन पहले महाराष्ट्र से एक वीडियो सामने आया था, जिसे बेंगलुरु का बाताया जा रहा था कि वहां पर जॉम्बी ड्रग्स (Zombie Drugs) के केस बढ़ रहे हैं. वहीं, इसी बीच अब चंडीगढ़ से सामने आए ऐसे ही वीडियो ने लोगों के बीच डर और भ्रम पैदा कर दिया है. इन वीडियो को कथित तौर पर 'जॉम्बी ड्रग' से जोड़कर पेश किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि क्या है, इन वीडियो की सच्चाई और जॉम्बी ड्रग्स क्या होता है.
क्या है वायरल वीडियो का सच
कथित तौर पर चंडीगढ़ के इस वायरल वीडियो में शख्स एक स्थिथि में आंखे बंद किए हुए दिखाई दे रहा है. जब वहां पर मौजूद लोगों को लगा कि ये काफी देर से एक ही सिचुएशन में आंखें बंद करके खड़ा तो उसका वीडियो बना लिया, जो अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जॉम्बी के आतंक के तौर पर पेश किया जा रहा है. हालांकि, अभी इस मामले की सच्चाई सामने नहीं आई है कि इस शख्स ने किसी तरह का जॉम्बी ड्रग्स लिया है या उस वह जॉम्बी जैसी हरकत कर रहा है.
बहरहाल इस मामले में अभी यही कहा जा रहा है कि ये मामला कोई जॉम्बी से जुड़ा नहीं है क्योंकि अभी तक इस तरह का मामला कही से भी सामने नहीं आया है क्योंकि इससे पहले भी महाराष्ट्र के एक ऐसे ही वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा था, लेकिन पुलिस ने उसकी पुष्टि कर इसे फेक बताया था.
जॉम्बी ड्रग क्या होता है?
जॉम्बी ड्रग असल में एक प्रकार की जाइलाजीन (Xylazine) दवा होती है, जो पशुओं को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. विदेशों में इसके मिस यूज को लेकर भी खबरें सामने आती रहती हैं. जहां इसे नशीले पदार्थों के साथ मिलाकर लिया जाता है. इसी कारण यह शब्द सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड करने लगा. भारत में भी जब इस तरह के वीडियो सामने आए तो लोगों ने बिना जांच के इसे उसी ड्रग से जोड़ दिया. हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इस पदार्थ के इस्तेमाल के ठोस सबूत नहीं हैं और केवल वीडियो के आधार पर ऐसा कहा जा रहा है.
पुलिस जांच में क्या सामने आया
बेंगलुरु पुलिस ने इन वायरल वीडियो की जांच की और साफ किया कि 'जॉम्बी ड्रग' के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने बताया था जिस वीडियो को बेंगलुरु का बताया जा रहा था वो असल में महाराष्ट्र का है और इसमें जब उन्होंने जांच की तो पता चला कि वह व्यक्ति शराब के नशे में था, साथ ही उसे कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी थीं. पुलिस ने यह भी बताया कि वीडियो को भ्रामक तरीके से वायरल किया गया, जिससे लोगों में डर फैल गया. इतना ही नहीं, कुछ मामलों में गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है. पुलिस ने लोगों से अपील की बिना जानकारी केकिसी भी वीडियो को शेयर न करें.
अफवाहों से बचना जरूरी
बता दें कि इस तरह के मामलों में सबसे बड़ा खतरा अफवाहों का तेजी से फैलना होता है. जब लोग बिना सच्चाई जाने किसी भी दावे को सच मान लेते हैं, तो लोगों के बीच अनावश्यक डर और घबराहट फैल जाती है. सोशल मीडिया की ताकत जितनी बड़ी है, उतनी ही हमारी जिम्मेदारी भी बनती है. इस मामले में ऐसे किसी भी तरह के वीडियो की जांच करना बहुत जरूरी होता है. फिलहाल यह साफ है कि वायरल वीडियो को 'जॉम्बी ड्रग' (Zombie Drugs) से जोड़ना सही नहीं है और लोगों को सतर्क रहते हुए अफवाहों से दूर रहना चाहिए.
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