'लेस इज मोर': क्रेप से लेकर टिश्यू तक, ये 5 साड़ियाँ आपको बिना मेहनत के देंगी 'बोल्ड लुक', जानें इनकी खासियत
Saree Fashion Trends: भारी साड़ियों का फैशन अब पुराना हो चुका है. क्रेप से लेकर टिश्यू तक, ये 5 डिजाइनर साडि़यां आपको बिना किसी मेहनत के एक बोल्ड लुक दे सकती हैं. 'लेस इज मोर' के इस ट्रेंड को अपनाएं और जानें इन हल्की साड़ियों की खासियत, जो आपको हर पार्टी की जान बना देंगी.
देवास में दर्दनाक हादसा: गेंद निकालने उतरे दो मासूम, कुएं में डूबकर मौत, जन्मदिन पर बुझा घर का चिराग
देवास जिले से सामने आई यह खबर हर किसी को अंदर तक झकझोर देने वाली है। जहां कुछ बच्चे हंसी-खुशी क्रिकेट खेल रहे थे, वहीं पल भर में यह खेल मातम में बदल गया। देवास कुएं हादसा उस समय हुआ जब एक गेंद निकालने के लिए कुएं में उतरे दो मासूम बच्चे पानी में डूब गए। एक बच्चे को बचाने के लिए दूसरा उतरा, लेकिन दोनों ही जिंदगी की जंग हार गए।
कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम
देवास कुएं हादसा एक साधारण खेल के दौरान हुआ, लेकिन इसकी परिणति बेहद दुखद रही। बच्चे खेत के पास बने मैदान में क्रिकेट खेल रहे थे। खेल के दौरान गेंद पास के एक खुले कुएं में गिर गई। एक बच्चा गेंद निकालने के लिए कुएं में उतरा, लेकिन उसका पैर फिसल गया और वह सीधे पानी में गिर गया।
दोस्ती की मिसाल, लेकिन जानलेवा साबित हुई कोशिश
देवास कुएं हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दोस्ती की मिसाल भी है, जो अंत में दर्दनाक बन गई। पहले बच्चे को डूबता देख उसका दोस्त उसे बचाने के लिए तुरंत कुएं में उतर गया। लेकिन संतुलन बिगड़ने के कारण वह भी पानी में गिर गया। दोनों बच्चे गहरे पानी में फंस गए और बाहर नहीं निकल सके।
ग्रामीणों की कोशिशें भी नहीं बचा पाईं जान
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने काफी कोशिश के बाद दोनों बच्चों को कुएं से बाहर निकाला और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। देवास कुएं हादसा यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि इसके बाद पूरे इलाके में मातम छा गया।
मृतकों की पहचान और परिवार का दर्द
देवास कुएं हादसा में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान देवेंद्र गोस्वामी (15) और राजवीर नायक (16) के रूप में हुई है। दोनों बच्चे एक ही इलाके के रहने वाले थे और अच्छे दोस्त भी थे। राजवीर की मां को अपने बेटे की मौत पर यकीन ही नहीं हुआ। परिजन उसे मंदिर लेकर गए, इस उम्मीद में कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन सच वही रहा जो सबसे दर्दनाक था।
जन्मदिन बना मौत का दिन
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि देवेंद्र का उसी दिन जन्मदिन था। जिस दिन घर में खुशियां होनी चाहिए थीं, उसी दिन घर का इकलौता बेटा हमेशा के लिए चला गया। देवेंद्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनें हैं। पिता का साया पहले ही सिर से उठ चुका था, अब यह हादसा पूरे परिवार को तोड़ गया।
खुले कुएं और लापरवाही
देवास कुएं हादसा एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर ऐसे खुले कुएं बिना सुरक्षा के क्यों छोड़े जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर कुएं खुले रहते हैं, जिन पर न तो ढक्कन होता है और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था। यह हादसा दिखाता है कि छोटी-सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
देवास कुएं हादसा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। खुले मैदान, खेत और कुएं जैसे स्थान बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं, लेकिन अक्सर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। जरूरत है कि अभिभावक और प्रशासन दोनों इस दिशा में गंभीरता से काम करें।
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