तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता विजय और उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहा तलाक का मामला अब कानूनी मोड़ पर गहराता जा रहा है। सोमवार को चेंगलपेट फैमिली कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें जज ने दोनों पक्षों को 15 जून को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का कड़ा आदेश दिया है। दरअसल, 20 अप्रैल (सोमवार) को निर्धारित सुनवाई के दौरान विजय और संगीता में से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद अदालत ने अगली तारीख तय करते हुए दोनों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी। फरवरी में दायर तलाक की याचिका के अनुसार, संगीता ने दावा किया कि विजय का एक महिला अभिनेत्री के साथ अवैध संबंध था, जिसका पता उन्हें 2021 में चला। विजय द्वारा इस रिश्ते को खत्म करने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद, याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बिना किसी पछतावे के इसे जारी रखा।
दस्तावेज़ में आगे कहा गया है कि विजय ने संगीता को अपने सामाजिक और पेशेवर दायरे से बाहर कर दिया, जबकि वह उस महिला अभिनेत्री के साथ विदेश यात्राएं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। याचिका में यह भी बताया गया कि अभिनेता अक्सर सोशल मीडिया पर इन मुलाकातों की तस्वीरें साझा करते थे, जिसका विजय ने न तो खंडन किया और न ही उस पर कोई आपत्ति जताई, जिससे उन्होंने मौन रूप से उन्हें स्वीकार कर लिया। संगीता ने तर्क दिया कि इन पोस्टों के कारण उन्हें और उनके दो बच्चों—जेसन संजय और दिव्या साशा—को बार-बार अपमान का सामना करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, याचिका में विजय पर संगीता को पहले से उपलब्ध सुविधाओं को वापस लेने और वित्तीय प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया गया, जिसमें उनकी स्वतंत्र आवाजाही को सीमित करना भी शामिल है।
संगीता ने आगे आरोप लगाया कि विजय के लगातार ऐसे व्यवहार और 2024 में सोशल मीडिया पर उठे विवादों के कारण उन्हें गंभीर मानसिक आघात पहुँचा; उन्होंने दावा किया कि उनकी शादी अब पूरी तरह से टूट चुकी है और केवल कागज़ों पर ही बची है। उन्होंने कहा कि अब इस रिश्ते में सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है और इससे उन्हें मानसिक पीड़ा, अनादर, अपमान और कष्ट के अलावा कुछ नहीं मिल रहा है। ये दावे विशेष विवाह अधिनियम की धारा 27(1)(a) और 27(1)(d) के तहत उनके तलाक के आधार बनते हैं।
संगीता ने तलाक के लिए अर्जी दी है, जिसके माध्यम से वह विजय के साथ अपने 27 साल के वैवाहिक जीवन को समाप्त करना चाहती हैं।
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Hindu Rituals: धर्मशास्त्रों में मंदिर प्रवेश को एक पवित्र और आध्यात्मिक प्रक्रिया माना गया है, जहां शरीर और मन दोनों की शुद्धता का विशेष महत्व होता है. कई ज्योतिषाचार्यों ने मंदिर दर्शन के बाद घर लौटने पर तुरंत हाथ-पैर धोने से मना किया है. उनका मानना है कहा कि मंदिर में प्राप्त दिव्य ऊर्जा और सकारात्मक स्पंदन तुरंत धोने से कम हो जाते हैं. ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि परंपरा और शास्त्र वास्तव में क्या कहते हैं. आइए जानते हैं विद्वानों की राय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही दृष्टिकोण.
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