कूटनीति और संस्कृति का संगम भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया आयाम: रियाज हमीदुल्लाह
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने कूटनीति को संस्कृति, कला और शिल्प से जोड़ा। उन्होंने पारंपरिक बुनाई और शिल्प जैसे जामदानी, तांगैल और खादी के माध्यम से भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, कूटनीति की दुनिया और समय में बहुत बदलाव आया है। जिस तरह संस्कृति, कला और शिल्प किसी समाज की पहचान होते हैं, उसी तरह कूटनीति का मकसद भी सांस्कृतिक तत्वों के जरिए लोगों के बीच मेल-जोल बढ़ाना है, ताकि लोगों को सुकून मिले, आपसी मतभेद मिटें और अलग-अलग समाजों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो। इसका मकसद कई तरह के भेदभावों को मिटाना और लोगों के बीच की दूरियों को कम करना है।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से मैं बांग्लादेश, भारत और दुनिया के किसी भी ऐसे हिस्से के कारीगरों की तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित हुआ हूं, जहां मुझे रंगों, डिजाइनों और तकनीकों को देखकर रोमांच महसूस होता है।
रियाज ने कहा कि कूटनीति और शिल्पकारी की दुनिया का आपस में गहरा जुड़ाव है। इन दोनों के केंद्र में लोग ही सबसे अहम होते हैं। यहां सिर्फ लोगों की समस्याओं को सुलझाने की बात नहीं है, बल्कि उनके जीवन की गहरी और अनकही कहानियों को सामने लाने की भी बात है।
उच्चायुक्त ने कहा कि आजकल राजनयिकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे बेहतरीन कहानीकार भी बनें। आज की इस बेहद प्रतिस्पर्धी और तेज रफ्तार दुनिया में उन्हें अपने देश और वहां के लोगों की कहानियों को सबसे दिलचस्प और रोमांचक अंदाज में पेश करना होता है।
इसी सोच ने मुझे बांग्लादेशी सांस्कृतिक तत्वों की खोज करने के लिए प्रेरित किया। और इसके लिए हमारी पारंपरिक बुनाई वाले कपड़ों जैसे कि जामदानी, तांगैल और खादी से बेहतर और क्या हो सकता था, जिन्हें दुनिया के सामने पेश किया जाए।
उच्चायुक्त ने बताया कि भारत में अपनी सेवा के पिछले 12 महीनों में मुझे यह देखकर बहुत सुकून मिला कि कैसे अलग-अलग पृष्ठभूमि और पहचान वाले लोग, कला और संस्कृति से जुड़ी चीजों के जरिए आपस में जुड़ सकते हैं और एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। सबसे पहले हमने दिल्ली में जामदानी कपड़ों की एक अनोखी प्रदर्शनी का आयोजन किया (सितंबर 2025 में)। और इस हफ्ते, हम तांगैल और पाबना के हमारे अपने पारंपरिक हथकरघा (हैंडलूम) कपड़ों को दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं।
यह पूरा सफर (इसकी प्रक्रिया और तैयार उत्पाद) सच में बहुत खास रहा। जब हम किसी साड़ी या कपड़े को देखकर खुश होते हैं तो हमें उन बुनकरों को भी उतना ही याद करना चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए जिन्होंने इसे बुना है।
उन्होंने कहा कि वे अपनी करघे से कला के ऐसे अद्भुत नमूने तैयार करते हैं, जिन्हें एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी नहीं बना सकता। वे यह काम मुनाफे के लिए कम, बल्कि अपने जुनून और लगन की वजह से ज्यादा करते हैं, ताकि वे अपनी गौरवशाली पहचान को दुनिया के सामने पेश कर सकें। वे सचमुच रचनाकार हैं।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिलों के लिए ओसीआई दर्जे की मांग, भारत की मदद के लिए जताया आभार
कोलंबो, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। सीलोन वर्कर्स कांग्रेस के अध्यक्ष सेंथिल थोंडामन ने रविवार को कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने ‘दितवाह’ चक्रवात के दौरान श्रीलंका को मिली भारत की बड़ी आर्थिक और मानवीय सहायता के लिए खास तौर पर आभार जताया।
थोंडामन ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति से मुलाकात में श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के तमिलों को ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) का दर्जा देने की मांग की।
उन्होंने कहा, “उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करना हमारे लिए सम्मान की बात है। हमारी मुलाकात बहुत अच्छी और दोस्ताना माहौल में हुई। सीलोन वर्कर्स कांग्रेस की ओर से हमने उनके साथ बहुत अच्छी और सौहार्दपूर्ण चर्चा की। सबसे पहले हम भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने श्रीलंका में आए चक्रवात दितवाह के दौरान लगातार सहायता प्रदान की। उन्होंने 450 मिलियन डॉलर का योगदान दिया, जो श्रीलंका को मिली अब तक की सबसे बड़ी सहायता राशि थी। साथ ही भारतीय उच्चायोग की टीम और संतोष झा का भी धन्यवाद, जिन्होंने इस मदद को बहुत जल्दी लागू किया। कोविड के समय और उससे पहले भी भारत ने लगातार हमारा साथ दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत हमेशा एक अच्छे पड़ोसी की तरह हमारे साथ खड़ा रहा है। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत ने हमेशा श्रीलंका का समर्थन किया है। मैंने उनका धन्यवाद किया और ओसीआई के मुद्दे पर भी बात की। यहां एक मिलियन से ज्यादा भारतीय मूल के तमिल रहते हैं। हमें यहां बसे 200 साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अभी तक हमें ओसीआई का दर्जा नहीं मिला है। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार इस पर सकारात्मक फैसला लेगी।”
तमिल प्रोग्रेसिव अलायंस पार्टी के नेता मानो गणेशन ने उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन के साथ हुई अपनी चर्चा को सकारात्मक और उपयोगी बताया। उन्होंने मांग की कि श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी प्रांत में मूल निवासी तमिल समुदाय के लोग रहते हैं।
गणेशन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “हमने भारत के उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन से मुलाकात की और बहुत अच्छी और सकारात्मक चर्चा हुई। यह बातचीत हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हुई हमारी चर्चाओं का ही आगे का हिस्सा है। हम कई मुद्दे उठा रहे हैं, जिनमें सबसे जरूरी है श्रीलंका में भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई का दर्जा आसान तरीके से देना।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास के क्षेत्रों में भी भारत से मदद मांगी है। हमने उपराष्ट्रपति को बताया कि हम श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के लोग तमिल भाषा बोलते हैं। दुनिया के कई देशों जैसे सिंगापुर, मलेशिया, साउथ अफ्रीका, मॉरीशस और फिजी में भी भारतीय मूल के लोग रहते हैं, लेकिन हमारी स्थिति अलग है। हम यहां 200 साल से रह रहे हैं, वहीं उत्तर-पूर्व में रहने वाले तमिल हजारों साल से यहां हैं और वे आत्मनिर्णय की लड़ाई लड़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “यहां तमिल राष्ट्रवाद और सिंहला राष्ट्रवाद के बीच टकराव है, और हम बीच में फंसे हुए हैं, क्योंकि हम भी तमिल बोलते हैं, इसलिए हमारी नागरिकता पूरी तरह से मजबूत नहीं है। भारत को हमारी स्थिति को गंभीरता से समझना चाहिए। मुझे भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारी समस्याओं को समझते हैं। वे और उनकी सरकार इस दिशा में काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री और अब उपराष्ट्रपति का यहां आना इसी का संकेत है। हमें उम्मीद है कि 15 लाख भारतीय मूल के लोग ओसीआई का दर्जा पा सकेंगे। यह पूरी तरह स्वैच्छिक होगा। हम पहले श्रीलंकाई हैं, लेकिन भारत को भी अपना ‘पितृभूमि’ मानते हैं।”
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका गए हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों को दर्शाता है। इससे पहले उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री हरिणी अमरासुरिया के साथ एक बैठक की।
--आईएएनएस
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