उपराष्ट्रपति की ऐतिहासिक यात्रा, भारत-श्रीलंका रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर
कोलंबो/नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका पहुंचे हैं। यह किसी भी भारतीय उपराष्ट्रपति की श्रीलंका की पहली द्विपक्षीय यात्रा मानी जा रही है, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ती है।
पहले दिन उपराष्ट्रपति किन से मिले और किन अहम मुद्दों पर चर्चा की, इस पर विदेश मंत्रालय ने प्रकाश डाला। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि उपराष्ट्रपति रविवार सुबह कोलंबो पहुंचे और उनके साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी है।
यात्रा की शुरुआत, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की मुलाकात से हुई। फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई जिसमें दिसानायके ने भारत और श्रीलंका के बीच “मजबूत सभ्यतागत संबंधों” को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2022 के आर्थिक संकट और दिसंबर 2025 में आए ‘दितवाह’ चक्रवात के दौरान भारत ने “पहले मददगार” की भूमिका निभाई, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए।
मिस्री के अनुसार, वार्ता के दौरान बंदरगाह, ऊर्जा, डिजिटल और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत के निवेश और चल रही परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। दितवाह से हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण में भारत ने मदद करते रहने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्रपति दिसानायके ने डिजिटल, आईटी और तकनीकी क्षेत्रों में भारत से सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की साझेदारी श्रीलंका को तेजी से बढ़ते डिजिटल सेक्टर में नए अवसर तलाशने में मदद करेगी।
मिस्री के अनुसार, वार्ता के दौरान बंदरगाह, ऊर्जा, डिजिटल और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भारत के निवेश और चल रही परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। दितवाह से हुए नुकसान के बाद पुनर्निर्माण में भारत ने मदद करते रहने की प्रतिबद्धता जताई।
इस दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने हाल ही में श्रीलंका की हिरासत से रिहा किए गए भारतीय मछुआरों के मुद्दे पर श्रीलंका सरकार का आभार जताया। करीब 47 मछुआरों को हाल में ही रिहा किया गया। उन्होंने इस मुद्दे पर संवाद जारी रखने की जरूरत पर बल दिया।
भारत ने मेधावी छात्रों की मदद करने के सिलसिले को जारी रखते हुए छात्रवृत्ति बढ़ाने का निर्णय लिया। ‘सीलोन एस्टेट वर्कर्स एजुकेशन ट्रस्ट’ छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रों की संख्या को 350 से बढ़ाकर 700 करने की घोषणा भी की गई है। उप राष्ट्रपति नेता प्रतिपक्ष से भी मिले।
उप राष्ट्रपति के सम्मान में भारतीय प्रवासियों ने कोलंबो में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। जहां उन्होंने ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा की। अब श्रीलंका में ओसीआई कार्ड प्राप्त करने के लिए स्थानीय सरकार की ओर से जारी दस्तावेजों को भी मान्यता दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया आसान होगी।
विदेश सचिव ने कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की परंपरा को आगे बढ़ाती है और भारत-श्रीलंका के सदियों पुराने “लोग-से-लोग” संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
कूटनीति और संस्कृति का संगम भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया आयाम: रियाज हमीदुल्लाह
नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने कूटनीति को संस्कृति, कला और शिल्प से जोड़ा। उन्होंने पारंपरिक बुनाई और शिल्प जैसे जामदानी, तांगैल और खादी के माध्यम से भारत-बांग्लादेश के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, कूटनीति की दुनिया और समय में बहुत बदलाव आया है। जिस तरह संस्कृति, कला और शिल्प किसी समाज की पहचान होते हैं, उसी तरह कूटनीति का मकसद भी सांस्कृतिक तत्वों के जरिए लोगों के बीच मेल-जोल बढ़ाना है, ताकि लोगों को सुकून मिले, आपसी मतभेद मिटें और अलग-अलग समाजों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो। इसका मकसद कई तरह के भेदभावों को मिटाना और लोगों के बीच की दूरियों को कम करना है।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से मैं बांग्लादेश, भारत और दुनिया के किसी भी ऐसे हिस्से के कारीगरों की तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित हुआ हूं, जहां मुझे रंगों, डिजाइनों और तकनीकों को देखकर रोमांच महसूस होता है।
रियाज ने कहा कि कूटनीति और शिल्पकारी की दुनिया का आपस में गहरा जुड़ाव है। इन दोनों के केंद्र में लोग ही सबसे अहम होते हैं। यहां सिर्फ लोगों की समस्याओं को सुलझाने की बात नहीं है, बल्कि उनके जीवन की गहरी और अनकही कहानियों को सामने लाने की भी बात है।
उच्चायुक्त ने कहा कि आजकल राजनयिकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे बेहतरीन कहानीकार भी बनें। आज की इस बेहद प्रतिस्पर्धी और तेज रफ्तार दुनिया में उन्हें अपने देश और वहां के लोगों की कहानियों को सबसे दिलचस्प और रोमांचक अंदाज में पेश करना होता है।
इसी सोच ने मुझे बांग्लादेशी सांस्कृतिक तत्वों की खोज करने के लिए प्रेरित किया। और इसके लिए हमारी पारंपरिक बुनाई वाले कपड़ों जैसे कि जामदानी, तांगैल और खादी से बेहतर और क्या हो सकता था, जिन्हें दुनिया के सामने पेश किया जाए।
उच्चायुक्त ने बताया कि भारत में अपनी सेवा के पिछले 12 महीनों में मुझे यह देखकर बहुत सुकून मिला कि कैसे अलग-अलग पृष्ठभूमि और पहचान वाले लोग, कला और संस्कृति से जुड़ी चीजों के जरिए आपस में जुड़ सकते हैं और एक-दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। सबसे पहले हमने दिल्ली में जामदानी कपड़ों की एक अनोखी प्रदर्शनी का आयोजन किया (सितंबर 2025 में)। और इस हफ्ते, हम तांगैल और पाबना के हमारे अपने पारंपरिक हथकरघा (हैंडलूम) कपड़ों को दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं।
यह पूरा सफर (इसकी प्रक्रिया और तैयार उत्पाद) सच में बहुत खास रहा। जब हम किसी साड़ी या कपड़े को देखकर खुश होते हैं तो हमें उन बुनकरों को भी उतना ही याद करना चाहिए और उन्हें सम्मान देना चाहिए जिन्होंने इसे बुना है।
उन्होंने कहा कि वे अपनी करघे से कला के ऐसे अद्भुत नमूने तैयार करते हैं, जिन्हें एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी नहीं बना सकता। वे यह काम मुनाफे के लिए कम, बल्कि अपने जुनून और लगन की वजह से ज्यादा करते हैं, ताकि वे अपनी गौरवशाली पहचान को दुनिया के सामने पेश कर सकें। वे सचमुच रचनाकार हैं।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation


















