Dhurandhar 2 Success: रणबीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर 2: द रिवेंज' ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर ₹1,750 करोड़ की कमाई के साथ 'पुष्पा 2' को पीछे छोड़ते हुए इतिहास की तीसरी सबसे सफल भारतीय फिल्म का स्थान हासिल कर लिया है। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म अब 'बाहुबली 2' (₹1,788 करोड़) के रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब है, हालांकि 'दंगल' का ₹2,000 करोड़ का आंकड़ा पार करना इसके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है और हालात एक बार फिर टकराव की ओर जाते नजर आ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है, जिससे वैश्विक चिंता और गहरी हो गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अब “नरम रवैया” खत्म हो चुका है और अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
बता दें कि यह बयान ऐसे समय आया है जब होरमुज स्ट्रेट को लेकर तनाव चरम पर है। ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरतलब है कि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस विवाद में दोनों पक्षों की ओर से सख्त रुख अपनाया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक कार्रवाई जारी रखी हुई है, जबकि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक यह कार्रवाई खत्म नहीं होती, तब तक वह समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य नहीं होने देगा।
इस बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। जानकारी के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान में मुलाकात करने वाले हैं, जहां समझौते की संभावनाओं पर चर्चा होगी। हालांकि, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने संकेत दिया है कि अभी अंतिम समझौता काफी दूर है और कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में एक अस्थायी युद्धविराम लागू किया गया था, जिससे कुछ समय के लिए हालात सामान्य होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन ट्रंप के सख्त रुख और ईरान की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर साफ दिख सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत इस पूरे संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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