असम में नाबालिग से रेप, आरोपियों पर भड़कीं देवोलीना:कहा- ऐसे दरिंदों को फांसी दो, CM हिमंत सरमा से मांग की
असम के हैलाकांदी जिले में 16 साल की लड़की से रेप और हत्या के मामले में टीवी अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए देवोलीना ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से सभी आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी देने की अपील की है। पीड़िता के परिवार ने भी आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर फांसी की सजा देने की गुहार लगाई है। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता के प्रेमी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। CM को टैग कर कहा- अपराधियों को बख्शा न जाए अभिनेत्री देवोलीना भट्टाचार्जी ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर इस घटना को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को टैग करते हुए लिखा कि इन अपराधियों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाए जो समाज में एक कड़ा उदाहरण बने। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी दी जाए ताकि राज्य में कोई भी अपराधी बचकर न निकल सके। देवोलीना ने अपराधियों को इंसानियत के नाम पर कलंक बताया। घर में खून से लथपथ मिली नाबालिग घटना 1 अगस्त की रात की है। पीड़िता का परिवार पास ही एक रिश्तेदार के कार्यक्रम में गया हुआ था। कार्यक्रम के दौरान चचेरे भाई से कहासुनी होने के बाद लड़की रात करीब 10:30 बजे अकेले घर लौट आई। परिजन यह सोचकर रुक गए कि खाना खाकर उसके लिए भी भोजन ले जाएंगे। जब वे घर पहुंचे, तो बेटी खून से लथपथ हालत में मिली। गंभीर चोटों के कारण उसकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा था। प्रेमी ने दो साथियों के साथ रची साजिश पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आरोपी का पीड़िता के साथ प्रेम प्रसंग था। उसे शक था कि लड़की का किसी अन्य व्यक्ति से भी रिश्ता है। इसी बात का बदला लेने और सबक सिखाने के लिए उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर इस अपराध की योजना बनाई। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की उम्र 17 से 19 साल के बीच है। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें महिलाओं पर आतंकी हमले से भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी:नाइजीरिया में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं की हत्या की, एक्ट्रेस बोलीं- इन राक्षसों के लिए नरक में जगह साथ निभाना साथिया' में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के साथ काफी क्रूरता की, जिसे देखकर एक्ट्रेस ने इन हमलावरों को 'राक्षस' और 'शैतान' करार दिया है। पूरी खबर पढ़ें
मूवी रिव्यू-आर्यभट्ट का जीरो:हिमांश कोहली की दमदार परफॉर्मेंस, कहानी में सादगी; लेकिन जानिए कहां हुई चूक?
हर इंसान की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता है, जब लोग उससे पहले हार मान लेते हैं और फिर वह खुद भी अपने आप पर भरोसा खोने लगता है। 'आर्यभट्ट का जीरो' ऐसे ही एक आम लड़के की कहानी है, जिसे दुनिया बार बार नाकाम साबित करती है। निर्देशक कमल चंद्र ने आत्मविश्वास और उम्मीद जैसे मजबूत विषय को हल्के फुल्के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म दिल से बनाई गई है और उसका संदेश भी साफ है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले इसकी उड़ान को पूरी ऊंचाई तक नहीं पहुंचने देता। इसकी लेंथ 1 घंटा 54 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू (हिमांश कोहली) के इर्द गिर्द घूमती है। मध्यम वर्गीय परिवार का यह युवक जिंदगी में अपनी पहचान बनाना चाहता है, लेकिन लगातार मिल रही असफलताएं उसे अंदर से तोड़ देती हैं। परिवार की उम्मीदें, समाज के ताने और खुद पर से उठता भरोसा उसके संघर्ष को और मुश्किल बना देते हैं। हालात जैसे जैसे बदलते हैं, बग्गू भी खुद को बदलने की कोशिश करता है। आखिर कैसे एक ऐसा लड़का, जिसे हर कोई 'जीरो' समझता है, अपनी सबसे बड़ी ताकत खुद बनता है, यही फिल्म की कहानी है। अच्छी बात यह है कि फिल्म अपना संदेश बिना भाषण दिए सहज तरीके से कहती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? पूरी फिल्म हिमांश कोहली के कंधों पर टिकी है और वह इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभाते हैं। रोमांटिक भूमिकाओं से अलग इस बार उन्होंने छोटे शहर के एक ऐसे युवक का किरदार निभाया है, जो बार बार टूटता है, लेकिन हार नहीं मानता। उनके चेहरे के भाव और भावनात्मक दृश्यों में ईमानदारी साफ दिखाई देती है। यह उनके करियर की बेहतर परफॉर्मेंस में से एक कही जा सकती है। बग्गू के पिता के किरदार में नीरज सूद शानदार हैं। उनका अभिनय बेहद सहज है और पिता बेटे के कई दृश्य दिल को छू जाते हैं। रवि किशन अपने चिर परिचित अंदाज में मनोरंजन का तड़का लगाते हैं और जहां भी आते हैं, ध्यान खींचते हैं। सोनाली सहगल और दर्शना बनिक अपने किरदारों के साथ न्याय करती हैं। हालांकि राजेश शर्मा, अलका अमीन और शिल्पा शिंदे जैसे अनुभवी कलाकारों को फिल्म में और बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता था। उनके किरदारों में और गहराई और स्क्रीन स्पेस की गुंजाइश साफ महसूस होती है। डायरेक्शन, तकनीकी पक्ष और कमियां निर्देशक कमल चंद्रा ने एक अच्छा विषय चुना है और कई जगह उनकी संवेदनशीलता भी नजर आती है। फिल्म छोटे शहर की दुनिया को विश्वसनीय तरीके से पेश करती है और वास्तविक लोकेशंस इसकी खूबसूरती बढ़ाती हैं। सिनेमेटोग्राफी भी कहानी के मूड के साथ अच्छी तरह चलती है। लेकिन सबसे बड़ी कमी स्क्रीनप्ले में दिखाई देती है। कहानी कई जगह भटकती है और कुछ दृश्य ऐसे लगते हैं जिन्हें आसानी से हटाया जा सकता था। उनसे न कहानी आगे बढ़ती है और न ही किरदारों में कोई खास बदलाव आता है। एडिटिंग में थोड़ी और कसावट होती तो फिल्म ज्यादा प्रभावशाली बन सकती थी। अच्छे विषय के बावजूद प्रस्तुति कई बार उतनी मजबूत नहीं लगती, जितनी हो सकती थी। म्यूजिक कैसा है? फिल्म का संगीत कहानी के साथ चलता है। गाने जब आते हैं तो अलग से बोझ नहीं लगते और कहानी का हिस्सा बनकर सामने आते हैं। हालांकि थिएटर से बाहर निकलने के बाद ऐसा कोई गीत याद नहीं रह जाता जिसे बार बार सुना जाए। बैकग्राउंड स्कोर कई भावनात्मक दृश्यों का असर जरूर बढ़ाता है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? 'आर्यभट्ट का जीरो' एक ईमानदार कोशिश है, जो खुद पर भरोसा रखने का संदेश देती है। हिमांश कोहली का बदला हुआ अंदाज और उनका अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। नीरज सूद और रवि किशन भी अच्छा साथ देते हैं। हालांकि ढीला स्क्रीनप्ले, कुछ अनावश्यक दृश्य और कई जगह धीमी पड़ती रफ्तार फिल्म को एक बेहतर अनुभव बनने से रोक देती है। अगर आपको छोटे शहरों की जमीन से जुड़ी, हल्की फुल्की और प्रेरणादायक कहानियां पसंद हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
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