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Parshuram Jayanti 2026: झारखंड का वो चमत्कारी मंदिर, जहां सदियों से जमीन में गड़ा है परशुराम का फरसा, जानिए पौराणिक कथा

Parshuram Jayanti 2026: आज 19 अप्रैल 2026, रविवार को देशभर में परशुराम जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है. भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है. उनका वर्णन रामायण और कई पुराणों में मिलता है. मान्यता है कि उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था. ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बावजूद वे महान योद्धा थे. उन्हें शस्त्र विद्या में महारत हासिल थी. उनका सबसे खास अस्त्र ‘परशु’ यानी फरसा था. इसी कारण उनका नाम परशुराम पड़ा.

टांगीनाथ धाम से मशहूर है ये जगह

झारखंड के गुमला जिले में स्थित टांगीनाथ धाम से ये जगह काफी मशहूर है. यहां से जुड़ी मान्यताएं इसे और भी रहस्यमयी बनाती हैं. कहा जाता है कि यहां आज भी भगवान परशुराम का फरसा जमीन में धंसा हुआ है. लोग इसे देखने और पूजा करने दूर-दूर से आते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां भगवान परशुराम ने कठोर तपस्या की थी. इस जगह की खास बात यह भी है कि यहां मौजूद फरसा देखने में भगवान शिव के त्रिशूल जैसा लगता है. इसी वजह से भक्त इसे शिव और परशुराम दोनों की शक्ति का प्रतीक मानते हैं.

रामायण से जुड़ी है पौराणिक कथा (Lord Parshuram Katha In Hindi) 

टांगीनाथ धाम का संबंध रामायण काल से भी जोड़ा जाता है. कथा के अनुसार, राजा जनक ने माता सीता के स्वयंवर का आयोजन किया था. इसमें एक शर्त रखी गई थी. जो शिवजी के धनुष को उठाकर तोड़ देगा, वही सीता से विवाह करेगा. भगवान श्रीराम ने यह कार्य पूरा किया और धनुष भंग कर दिया. जब यह बात भगवान परशुराम को पता चली तो वे क्रोधित हो गए. वे तुरंत स्वयंवर स्थल पर पहुंच गए. वहां उनकी लक्ष्मण से तीखी बहस भी हुई, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें अहसास हुआ कि श्रीराम कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं. वे स्वंय भगवान विष्णु के अवतार हैं. यह जानकर उनका गुस्सा शांत हो गया. उन्होंने श्रीराम से क्षमा मांगी और वहां से चले गए. 

आज भी टांगीनाथ धाम में मौजूद है परशुराम का फरसा 

कहते हैं कि इसके बाद भगवान परशुराम एक शांत और घने जंगलों वाले क्षेत्र में चले गए. यह स्थान पहाड़ियों से घिरा हुआ था. वहीं उन्होंने भगवान शिव की स्थापना की और तपस्या शुरू की. तपस्या के दौरान उन्होंने अपना प्रिय अस्त्र, यानी फरसा, जमीन में गाड़ दिया. माना जाता है कि वही फरसा आज भी टांगीनाथ धाम में मौजूद है. यही वजह है कि यह स्थान भक्तों के लिए बेहद खास बन गया है।

108 शिवलिंग के साथ देवी-दवताओं की मूर्तियां

टांगीनाथ धाम सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि इतिहास और कला के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां कई प्राचीन मूर्तियां बिखरी हुई दिखाई देती हैं. इस स्थान पर खुले आसमान के नीचे भोलेनाथ के 108 शिवलिंग के साथ-साथ मां दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, लक्ष्मी, गणेश, सूर्यदेव और हनुमान जी की सुंदर प्रतिमाएं मौजूद हैं. साथ ही अर्धनारीश्वर और विष्णु की मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं. यहां पत्थरों पर बनी वृषभ, सिंह और हाथी की आकृतियां भी खास आकर्षण का केंद्र हैं. इसके अलावा यहां पुराने समय के कई अवशेष भी पाए जाते हैं. जैसे पत्थर की नालियां, सिलबट्टा, प्राचीन ईंटें और पुराने ढांचे. इनसे पता चलता है कि यह स्थान कभी बहुत समृद्ध रहा होगा.

स्थापत्य कला भी है खास

टांगीनाथ धाम की मूर्तियों की बनावट काफी अनोखी है. कुछ मूर्तियां ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित मंदिरों की शैली से मिलती-जुलती बताई जाती हैं. यह समानता इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को और भी बढ़ा देती है.

यह भी पढ़ें: Parshuram Jayanti 2026: भगवान परशुराम की जयंती आज , नोट कर लें पूजन का शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. न्यज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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शरीर की गर्मी और पित्त को शांत करने में मदद करेंगे ये प्राकृतिक पेय, शरीर को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। गर्मियों के मौसम में शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। गर्मी की वजह से सिर दर्द, पाचन का खराब होना और त्वचा से संबंधित रोग परेशान करने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है?

गर्मी में शरीर में पित्त तेजी से बढ़ता है। शरीर बाहर के वातावरण से प्रभावित होता है, जिससे शरीर के अंदर से गर्मी बढ़ती रहती है। आज हम आपके लिए ऐसे घरेलू पेय पदार्थों की जानकारी लेकर आए हैं, जो शरीर के पित्त को शांत करने में मदद करेंगे।

पित्त के असंतुलन से शरीर को बहुत सारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। शरीर बेवजह थकान महसूस करने लगता है, गर्मी बहुत तेज महसूस होती है, मुंह और जीभ पर छाले निकलने लगते हैं, पेट में अधिक मात्रा में एसिड बनने लगते हैं, और अचानक चिड़चिड़ापन महसूस होता है। यह सभी पित्त के बढ़ने के लक्षण होते हैं, जिन्हें आहार से संतुलित किया जा सकता है।

पान और गुलकंद का शरबत पित्त को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह पेट को ठंडा रखता है, पाचन को सुधारने में मदद करता है और शरीर की ऊर्जा को बनाए रखता है। इसके अलावा खजूरादी मंथ का भी सेवन कर सकते हैं, जो एक आयुर्वेदिक और शीतलता प्रदान करने वाला पेय पदार्थ है। इसके सेवन से कमजोरी दूर होती है, एनीमिया को दूर करता है, और अगर गर्मियों में अधिक प्यास लगती है तो इस परेशानी से भी छुटकारा मिल जाता है।

आंवला और सब्जा सीड का मिश्रण भी पित्त को संतुलित करने में सहायक है। यह सिर्फ शरबत नहीं, बल्कि टॉनिक की तरह काम करता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है और हृदय रोगों के होने की संभावना भी कम होती है। इसके साथ यह मिश्रण पाचन और डिटॉक्स में भी सहायक होता है। नारियल और कोकम पेय भी शरीर में हार्मोन को संतुलित कर गर्मी को कम करता है। यह पेट की समस्याओं से राहत देता है और गैस बनने और सीने में जलन की परेशानी को कम करता है। इसके सेवन से शरीर को ठंडा रखता है।

इसके अलावा, सीबकथॉर्न का जूस भी गर्मियों में संजीवनी की तरह काम करता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोक्षक क्षमता को मजबूती देता है और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

--आईएएनएस

पीएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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