मध्य और पूर्वी समुद्री क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां अमेरिका ने एक संदिग्ध तेल टैंकर पर कार्रवाई करने का दावा किया है। इस घटना ने पहले से ही संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय माहौल को और गंभीर बना दिया है।
बता दें कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने जानकारी दी है कि उसके बलों ने एक “बिना पहचान वाले” और प्रतिबंधित तेल टैंकर पर समुद्री रोकथाम अभियान चलाया। मौजूद जानकारी के अनुसार, इस टैंकर का नाम एम टी टिफानी बताया जा रहा है, जिस पर बिना किसी टकराव के सवार होकर जांच की गई है।
गौरतलब है कि यह कार्रवाई हिंद-प्रशांत क्षेत्र में की गई है, जहां अमेरिका ने वैश्विक समुद्री प्रतिबंधों को लागू करने के तहत यह कदम उठाया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अवैध नेटवर्क को तोड़ना और उन जहाजों को रोकना है, जो ईरान को सामग्री सहयोग पहुंचा रहे हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह जहाज हिंद महासागर में श्रीलंका और इंडोनेशिया के बीच तेल लेकर जा रहा था। हालांकि, इसके माल, चालक दल या मूल स्थान के बारे में अभी तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
बता दें कि अमेरिका ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र किसी भी प्रतिबंधित जहाज के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है और वह ऐसे जहाजों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी बीच एक दिन पहले ईरान का एक अन्य तेल टैंकर सफलतापूर्वक अपने देश के जलक्षेत्र में पहुंच गया, जिसे लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ईरान का दावा है कि उसका जहाज अमेरिकी नौसैनिक दबाव के बावजूद सुरक्षित तरीके से अपने बंदरगाह तक पहुंचा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा है कि उनका देश धमकी के साये में किसी भी तरह की बातचीत स्वीकार नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर नए कदम उठाने के लिए तैयार है।
वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ लागू समुद्री नाकेबंदी फिलहाल जारी रहेगी और युद्धविराम की अवधि भी आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। गौरतलब है कि इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों पर बढ़ती यह सख्ती वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकती है। खास तौर पर हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां आने वाले समय में बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय हालात और जटिल हो सकते हैं।
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पाकिस्तान की नैया डूबाने के लिए भारत ने निकाल लिया है शेषनाग और पाकिस्तान बॉर्डर के ठीक पास जब यह शेषनाग मंडराता दिखा तो इस्लामाबाद और कराची की धरती हिलने लगी। बेचैनी बढ़ गई। कहावत है कि जब नाग फन फैलाता है तो सामने वाले के होश उड़ जाते हैं। वो बिल्कुल बौखला जाता है और इस बार भारत का यह शेषनाग कोई कहानी नहीं बल्कि एक ऐसा आधुनिक हथियार है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर घंटों मंडराएगा और फिर सटीक वार करके खुद को ही खत्म कर देगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इसकी रेंज में पूरा पाकिस्तान आता है। बता दें कि राजस्थान के पोखरण की रेत में सफल परीक्षण भी हो चुका है और अब सवाल यही है कि क्या शेषनाग 150 वाकई इतना खतरनाक है? क्या यह भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा?
बता दें कि यह कोई साधारण ड्रोन नहीं है। यह एक लोटरिंग म्यूशन है। यानी देखो, इंतजार करो और सही समय पर खत्म कर दो। इसे तैयार किया है बेंगलुरु के स्टार्टअप न्यू स्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी ने और इसका मकसद आपको बता दें कि इसका मकसद एकदम साफ है कि दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसना है और लंबे समय तक हवा में रहना है और फिर सही मौके पर सटीक हमला कर देना है। राजस्थान के पोखरण टेस्ट रेंज में इसके टेस्ट के दौरान बता दें कि ड्रोन ने तय रूट्स फॉलो किए। करीब 720 कि.मी. की दूरी तय भी की और लगभग बता दें कि 5 घंटे तक यह हवा में भी रहा और अंत में अपने लक्ष्य पर सटीक हमला भी इसने किया। इसकी अधिकतम रेंज बता दें कि 1000 कि.मी. तक बताई जा रही है। और सबसे बड़ा सवाल। क्या सच में इसके रेंज में पूरा पाकिस्तान है? सीधा जवाब है काफी हद तक। हां, इसकी रेंज का मतलब यह है कि सीमा से उड़ान भरकर यह ड्रोन पाकिस्तान के बड़े शहरों तक पहुंच सकता है। लेकिन यहां पर असली बात यह है कि यह हमला नहीं डिट्रेस है। यानी कि दुश्मन को पता है कि आपके पास ऐसी ताकत है जो कहीं भी पहुंच सकती है।
ईरान के चर्चित ड्रोन शहीद 136 से इसकी तुलना भी इस वक्त बता दें कि जमकर की जा रही है सोशल मीडिया पर। जिसने हाल के संघर्षों में दिखाया कि सस्ते ड्रोन भी युद्ध का रुख एकदम बदल सकते हैं। लेकिन भारत का जो शेषनाग 150 है यह भारतीय जरूरतों के हिसाब से एकदम तैयार किया गया है। इसकी ताकत एक नए तौर पर उभरी है। रेंज इसकी 1000 कि.मी. तक है। एंडोरेंस 5 घंटे वॉर हेड 25 किलो सटीकता 10 मीटर से कम। यानी यह सिर्फ डराने के लिए नहीं सीधा टारगेट खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह किन टारगेट्स पर हमला कर सकता है आप उसे भी जान लीजिए। रडार सिस्टम, हथियार डिपो, कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम और अगर दुश्मन जीपीएस जाम कर दे तब भी यह ड्रोन अपने ऑनबोर्ड सेंसर से मिशन पूरा कर सकता है। और इसे देखते हुए एक कहावत याद आती है कि जिसके पास तकनीक की ताकत हो उसके सामने दुश्मन की हर चाल कमजोर पड़ जाती है।
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