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योग निद्रा : तनाव और थकान भगाकर खुद को रिचार्ज करने का आसान तरीका, ऐसे करें अभ्यास

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की तेज भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, थकान और मानसिक बोझ हर किसी को परेशान कर रहा है। काम का प्रेशर, नींद की कमी और लगातार चिंताएं शरीर और मन दोनों को दिन-ब-दिन कमजोर बनाती जा रही हैं। ऐसे में योग निद्रा खुद को रिचार्ज करने का सबसे आसान, प्रभावी और वैज्ञानिक तरीका है।

योग निद्रा को ‘योगिक निद्रा’ भी कहा जाता है। यह न तो पूरी नींद है और न ही जागने की स्थिति। यह दोनों के बीच की गहरी विश्राम की अवस्था है, जिसमें शरीर पूरी तरह आराम में रहता है लेकिन मन पूरी तरह जागरूक और सतर्क रहता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, योग निद्रा का नियमित अभ्यास शरीर को नई ऊर्जा देता है और मन को शांत करता है। यह कोई कठिन योगासन नहीं है, बल्कि डीप रिलैक्सेशन की विधि है जिसे कोई भी व्यक्ति, किसी भी उम्र का हो, आसानी से कर सकता है।

योग निद्रा अभ्यास के लिए सबसे पहले शवासन पोज में आएं। इसमें पीठ के बल सीधे लेट जाएं, हाथ-पैर ढीले छोड़ दें, आंखें बंद करें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। एक प्रशिक्षक या गाइडेड ऑडियो की मदद से अभ्यास किया जाता है। इसमें क्रमवार शरीर के हर अंग पर ध्यान केंद्रित किया जाता है- पैरों की उंगलियों से लेकर सिर तक। सांस पर फोकस किया जाता है और मन को विचारों से मुक्त किया जाता है। पूरा सेशन आमतौर पर 20 से 40 मिनट तक चलता है।

योग निद्रा अभ्यास के लिए शुरुआत में किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में सीखना बेहतर होता है। योग निद्रा तनाव और चिंता को तेजी से कम करता है। अनिद्रा की समस्या दूर कर गहरी नींद लाता है। एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाता और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। तनाव हार्मोन (कोर्टिसोल) कम करता और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। भावनात्मक संतुलन बनाए रखता है।

योग निद्रा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बहुत कम समय में शरीर और मन दोनों को रिचार्ज कर देता है। बस 20-30 मिनट का अभ्यास दिन भर की थकान को दूर कर सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना एक निश्चित समय पर योग निद्रा का अभ्यास करें। शाम को या दोपहर के बाद करना सबसे अच्छा रहता है। इसके लिए शांत और आरामदायक जगह चुनें जहां कोई आवाज या व्यवधान न हो।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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नासा का क्यूबसैट कैनवास : स्पेस में रेडियो तरंगों का अध्ययन शुरू, जानें क्या है यह मिशन

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण सैटेलाइट को हाल ही में लॉन्च किया है, जो पृथ्वी से निकलने वाली प्राकृतिक और मानव-निर्मित रेडियो तरंगों का अध्ययन कर रहा है। यह मिशन वैज्ञानिकों को पृथ्वी के आसपास के अंतरिक्ष वातावरण को बेहतर समझने और अंतरिक्ष मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने में मदद करेगा।

कैनवास (क्लाइमेटोलॉजी ऑफ एंथ्रोपोगेनिक एंड नेचुरल वीएएफ वेव एक्टिविटी इन स्पेस) नामक यह क्यूबसैट 7 अप्रैल 2026 को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से मिनोटौर IV रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। यह अमेरिकी रक्षा विभाग के स्पेस टेस्ट प्रोग्राम एस29ए (एसटीपी-एस29ए) मिशन का हिस्सा रहा। वहीं, नासा की क्यूबसैट लॉन्च इनिशिएटिव (सीएलआई) के तहत इसकी लॉन्च व्यवस्था की गई थी।

कैनवास एक 4यू क्यूबसैट है, जिसे कोलोराडो यूनिवर्सिटी, बोल्डर ने विकसित किया है। इसका मुख्य काम पृथ्वी की निचली कक्षा से बहुत कम आवृत्ति वाली (वीएलएफ) रेडियो तरंगों को मापना है। ये तरंगें बिजली गिरने और जमीन पर स्थित ट्रांसमीटर्स से उत्पन्न होती हैं। यह मापता है कि ये तरंगें पृथ्वी के आयनमंडल (वायुमंडल का ऊपरी विद्युत आवेशित हिस्सा) से गुजरकर मैग्नेटोस्फीयर तक कितनी मात्रा में पहुंचती हैं। वीएलएफ तरंगें अंतरिक्ष में फंसे हाई एनर्जी वाले इलेक्ट्रॉन्स के रास्ते को थोड़ा बदल सकती हैं। इससे कभी-कभी ये इलेक्ट्रॉन विकिरण पट्टियों से निकलकर वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं।

कैनवास इन तरंगों के प्रभाव को समझकर स्पेस वेदर के मॉडलों को मजबूत बनाएगा। इससे स्पेसक्राफ्ट, सैटेलाइट्स और पृथ्वी पर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सुधार होगा। मिशन के दौरान कैनवास दो मुख्य उपकरणों का उपयोग करेगा एक त्रि-अक्षीय सर्च कॉइल मैग्नेटोमीटर और एक द्वि-अक्षीय एसी विद्युत क्षेत्र सेंसर। इनकी मदद से यह वीएलएफ तरंगों की शक्ति और दिशा का पता लगाएगा। बिजली गिरने की घटनाओं की तुलना विश्वव्यापी बिजली नेटवर्क के डेटा से करके यह जलवायु संबंधी अध्ययन करेगा कि ये तरंगें आयनमंडल से कैसे गुजरती हैं।

बता देंं, नासा ने साल 2021 में सीएलआई के तहत कैनवास को चुना था। यह कम लागत वाला मिशन छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष हार्डवेयर डिजाइन करने, विकसित करने और बनाने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है। नासा का लॉन्च सर्विसेज प्रोग्राम इस पहल को संचालित करने में अहम योगदान दे रहा है। कैनवास ईलाना 55 लॉन्च ग्रुपिंग का भी हिस्सा है।अगले एक वर्ष तक कैनवास निरंतर डाटा एकत्र करेगा। यह डाटा पृथ्वी से अंतरिक्ष में ऊर्जा के प्रवाह को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

--आईएएनएस

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