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Rahul Gandhi को High Court से बड़ी राहत, दोहरी नागरिकता केस में FIR के आदेश पर रोक

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में एफआईआर दर्ज करने के अपने पूर्व निर्देश पर रोक लगा दी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, न्यायालय ने यह भी कहा कि आरोपी की सुनवाई के बिना कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। एक दिन पहले, उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को कांग्रेस सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 2003 में इंग्लैंड में एक कंपनी का गठन करते समय ब्रिटिश नागरिकता छिपाई थी।
 

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न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने राज्य सरकार को जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की अनुमति भी दी थी। पीठ ने कहा कि आरोपों के प्रथम दृष्टया अध्ययन से संज्ञेय अपराध प्रतीत होते हैं, जिनके लिए विस्तृत जांच आवश्यक है। यह निर्देश उप सॉलिसिटर जनरल द्वारा अदालत के अनुरोध पर प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद आया। यह याचिका कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने दायर की थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल ने अगस्त 2003 में पंजीकृत कंपनी, मेसर्स बैकॉप्स लिमिटेड, के गठन के दौरान स्वयं को ब्रिटेन का नागरिक घोषित किया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, राहुल ने स्वेच्छा से अपनी राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई थी और लंदन और हैम्पशायर के पते के साथ एक निदेशक पहचान पत्र भी प्रदान किया था।
 

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अपने पूर्व आदेश में, पीठ ने लखनऊ की एक विशेष सांसद/विधायक अदालत के 28 जनवरी, 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया था, जिसमें एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने पाया कि निचली अदालत आरोपों की पर्याप्त रूप से जांच करने में विफल रही कि क्या प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनते हैं। सुनवाई के दौरान, उप सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडे ने नागरिकता के मुद्दे से संबंधित केंद्र सरकार के रिकॉर्ड प्रस्तुत किए, जबकि राज्य सरकार के वकील वीके सिंह ने इस बात पर सहमति जताई कि आरोपों की प्रथम दृष्टया जांच की आवश्यकता है।

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दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा, द्विपक्षीय संबंधों में नए दौर का आगाज

सोल, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की रविवार से शुरू हो रही तीन दिवसीय भारत यात्रा को भारत और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है। यह दौरा आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर सुरक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के दूसरे दशक में एक नए चरण की शुरुआत के रूप में याद किया जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत की पिछली राजकीय यात्रा जुलाई 2018 में हुई थी, जबकि नरेंद्र मोदी की आखिरी दक्षिण कोरिया यात्रा फरवरी 2019 में हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच संपर्क मुख्य रूप से बहुपक्षीय मंचों तक सीमित रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह ठहराव उस समय है जब वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति तेजी से मजबूत हुई है। बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के बीच कई देश और कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही हैं। भारत फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और इस दशक के अंत तक जापान तथा जर्मनी को पीछे छोड़ तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत—जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है—ने बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में उदारीकरण के जरिए अपने कारोबारी माहौल में सुधार किया है।

हालांकि, रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत और दक्षिण कोरिया अभी तक अपने बहु-संरेखण (मल्टी एलाइनमेंट) दृष्टिकोण के बीच संभावित तालमेल को पूरी तरह नहीं तलाश पाए हैं, जबकि इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां तेजी से बन रही हैं।

19 से 21 अप्रैल तक प्रस्तावित यह यात्रा मौजूदा कूटनीतिक माहौल में बड़ा बदलाव ला सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में सत्ता में आई दक्षिण कोरिया की वर्तमान सरकार पूर्व राष्ट्रपति मून जे-इन की “न्यू सदर्न पॉलिसी” को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को मजबूत करना था।

सरकार अपने 123 नेशनल पॉलिसी एजेंडा में ग्लोबल साउथ शब्द का इस्तेमाल करते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की तैयारी का संकेत दे रही है। इस संदर्भ में भारत—जो ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज माना जाता है—के साथ संबंध मजबूत करना सियोल की प्राथमिकता बनता दिख रहा है।

रिपोर्ट में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पूरक क्षमताओं पर भी जोर दिया गया है। खासकर रक्षा और शिपबिल्डिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के जरिए वैल्यू-चेन को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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