Explainer: 3 गेंद पहले ही टीम इंडिया को मिल गई थी जीत, फिर भी क्यों जारी रहा IND vs SL वॉर्म-अप मुकाबला?
IND vs SL XI: भारतीय क्रिकेट टीम ने कोलंबो में खेले गए 3 दिवसीय वॉर्म-अप मैच में श्रीलंका इलेवन को 6 विकेट से हरा दिया है. यह मैच ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, लेकिन फिर आखिरी दिन के आखिरी ओवर में भारतीय स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने लगातार 3 छक्के लगाकर टीम को जीत दिलाई. आखिरी ओवर में टीम इंडिया ने शुरुआती 3 गेंदों पर जीत दर्ज कर ली थी, लेकिन फिर भी टीम इंडिया को बल्लेबाजी जारी रखनी पड़ी, तो चलिए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ.
जीत के बाद भी टीम इंडिया को इस वजह से खेलने पड़े बचे 3 गेंद
कोलंबो में श्रीलंका क्रिकेट एकादश के खिलाफ खेले गए इस तीन दिवसीय वॉर्म-अप मैच के आखिरी दिन के आखिरी ओवर में भारत को जीत के लिए 16 रनों की जरूरत थी. मोहम्मद सिराज और सारांश जैन क्रीज पर मौजूद थे. वहीं श्रीलंका की ओर से आखिरी ओवर केशरा नुवानथा लेकर आए. सिराज ने इस ओवर की शुरुआती 3 गेंदों पर लगातार तीन गगनचुंबी छक्के जड़कर टीम को 3 गेंद पहले ही रोमांचक जीत दिला दी, लेकिन फिर भी मैच जारी रहा.
SIRAJ SMASHED 6,6,6 WHEN INDIA NEEDED 16 RUNS IN THE FINAL OVER ????
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 9, 2026
- The madness by DSP! pic.twitter.com/43jAlGnfLZ
बता दें कि वॉर्म-अप मैच का मुख्य उद्देश्य जीत-हार नहीं, बल्कि दोनों टीमों के सभी खिलाड़ियों को पूरा अभ्यास करने का मौका देना होता है, यही वजह है कि 3 गेंद पहले जीत मिलने के बाद भी टीम इंडिया को बल्लेबाजी जारी रखनी पड़ी. सामान्य मैचों में लक्ष्य हासिल होते ही खेल समाप्त हो जाता है, लेकिन यह एक प्रैक्टिस मैच था जहां नियमों में आसान बनाया गया है. दोनों टीमों के बीच पहले से ही यह तय था कि वे निर्धारित ओवरों का पूरा कोटा खेलेंगे ताकि गेंदबाज और बल्लेबाज टेस्ट सीरीज से पहले वहां की परिस्थितियों का बेहतर अनुभव कर सकें. इसी वजह से सिराज और सारांश जैन ने आखिरी ओवर की बची हुई 3 गेंदों पर भी बल्लेबाजी जारी रखी.
वॉर्म-अप मैच का मकसद जीत से ज्यादा 'प्रैक्टिस'
क्रिकेट में वॉर्म-अप मैचों का आयोजन सीरीज की तैयारियों को परखने और उसे और भी पुख्ता करने के लिए किया जाता है. इन मैचों को आधिकारिक प्रथम श्रेणी इंटरनेशनल मैचों का दर्जा प्राप्त नहीं होता, जिसके कारण इनके नियम को ज्यादा सख्त नहीं बनाया जाता है. इस प्रैक्टिस मैच में दोनों टीमों को अपनी पारियों में 45-45 ओवर खेलने का समय दिया गया था. चूंकि खेल का मकसद सिर्फ जीत हासिल करना नहीं बल्कि समय का पूरा उपयोग करना होता है, इसलिए टारगेट पूरा होने के बाद भी बचे ओवर कराए जाते हैं. टीम इंडिया के साथ भी यही हुआ.
निचले क्रम को बल्लेबाजी का मौका
भारत के लिए दूसरी पारी में टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (61 रन) और कप्तान शुभमन गिल (44 रन) ने शुरुआत में अच्छी बल्लेबाजी की थी. जायसवाल के रिटायर्ड आउट होने के बाद मिडिल और लोवर ऑर्डर के बल्लेबाजों को भी क्रीज पर समय बिताने का मौका दिया गया। आखिरी ओवर की बची हुई 3 गेंदें लोअर ऑर्डर के बल्लेबाजों के कॉन्फिडेंस को बढ़ाने और मैच परिस्थितियों में खेलने का अनुभव देने के लिए बेहद जरूरी थीं, क्योंकि जब आखिरी में टीम इंडिया को जीत के लिए कुछ रनों की जरूरत हो तो ये निचले क्रम के बल्लेबाज आकर जीत दिला सकें.
सिराज ने लगातार 3 छक्के लगाकर दिलाई जीत
मोहम्मद सिराज ने आखिरी ओवर की शुरुआती 3 गेंदों पर ही लगातार छक्के लगाकर टीम इंडिया को जीत दिला दी थी. श्रीलंका के गेंदबाज केशरा नुवानथा के खिलाफ सिराज ने पहली गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से छक्का जड़ दिया. फिर अगली गेंद पर उन्होंने सामने की तरफ सीधा छक्का लगाया. इसके बाद तीसरी गेंद पर मिडविकेट बाउंड्री के पार छक्का मारा. भारत को जीत के लिए 16 रन चाहिए थे, लेकिन इन 3 गेंदों में ही 18 रन बन गए और टीम को जीत मिल गई, लेकिन फिर भी मैच जारी रहा. चौथी गेंद का सामना सिराज ने किया और वो डॉट रही. फिर पांचवीं गेंद पर सिराज ने फिर चौका लगाया, जबकि आखिरी गेंद पर एक रन लिया. इस तरह सिराज ने इस मैच में सिर्फ 15 गेंदों पर नाबाद 32 रनों की पारी खेली, जिसमें 4 छक्के और एक चौका शामिल रहा.
Mohammed Siraj with the winning runs ????????
— BCCI (@BCCI) August 9, 2026
A successful chase in Colombo for #TeamIndia against SLC XI ????????
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श्रीलंकाई प्लेयर चेक करने लगे मोहम्मद सिराज का बल्ला
मोहम्मद सिराज की इस ताबड़तोड़ बल्लेबाजी को देख श्रीलंकाई खिलाड़ी भी हैरान रह गए. मैच खत्म होने के बाद मजाकिया अंदाज में श्रीलंकाई प्लेयर्स मोहम्मद सिराज के पास आए और हंसते हुए उनका बल्ला चेक करने लगे. इस घटना ने मैदान के माहौल को बेहद खुशनुमा बना दिया. टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ी और स्टाफ भी सिराज की इस बल्लेबाजी को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाए. सभी काफी खुश नजर आए.
SRI LANKAN PLAYERS CHECKING THE BAT OF SIRAJ ????????
— Johns. (@CricCrazyJohns) August 9, 2026
- He scored 32*(15) & won the game for India. pic.twitter.com/dAdvFe8fIY
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बांग्लादेश में खसरे का कहर, छह बच्चों की मौत, मरने वालों की संख्या 870 के पार
ढाका, 9 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। रविवार को खसरे जैसे लक्षणों वाले छह बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही वर्ष 2026 में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 873 हो गई है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की ओर से जारी बयान के अनुसार, हाल में हुई सभी छह मौतें खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतें हैं। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजा आंकड़ों के बाद प्रयोगशाला में पुष्टि की गई खसरे से मौतों की संख्या 98 पर ही बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 775 हो गई है।
पिछले 24 घंटों के दौरान देश में खसरे के 988 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,36,320 हो गई। इसी अवधि में 75 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिसके बाद लैब में पुष्टि किए गए कुल संक्रमितों की संख्या 17,115 तक पहुंच गई।
बांग्लादेश में खसरे के मामलों में लगातार तेज बढ़ोतरी के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन ने 2026 के इस प्रकोप को हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। संगठन ने इस बात पर चिंता जताई कि यह बीमारी टीकाकरण के जरिए रोकी जा सकती है।
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश्स 2026 मीजल्स आउटब्रेक’ में कहा कि आम लोगों को यह प्रकोप भले अचानक लगा हो, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संकट कई कारणों के मेल का परिणाम है। इनमें 2024-2025 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें, नियमित टीकाकरण छूट जाना, तय किए गए अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले बच्चों की समय पर पहचान न कर पाना शामिल हैं।
जीसीडीजी के अनुसार, बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से स्वीकृत टीके यूनिसेफ (यूनिसेफ) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के माध्यम से खरीदता था। लेकिन अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया लागू कर दी। रिपोर्ट में यूनिसेफ का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024 से 2026 के बीच एजेंसी ने संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को पांच से छह औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें भी कीं, लेकिन समस्या बनी रही।
बांग्लादेशी अखबार समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जीसीडीजी ने कहा कि 2025 में खसरे के टीकाकरण की कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई, जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे कम स्तर था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बाद में डब्ल्यूएचओ ने 2024-2025 के दौरान बांग्लादेश में खसरा-रूबेला (एमआर) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में आई गिरावट को बच्चों की प्रतिरक्षा कमजोर होने तथा 2026 के प्रकोप के मुख्य कारणों में शामिल बताया।
जीसीडीजी के अनुसार, देशभर में खसरे के फैलाव के पीछे प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की कई विफलताएं जिम्मेदार रहीं। इनमें अंतरिम सरकार के दौरान कार्यक्रमों में आई खाली जगह, वैक्सीन की खरीद, परिवहन और आपूर्ति में रुकावटें, वैक्सीन की कमी, रद्द किए गए ईपीआई सत्र, एमआर1 और एमआर2 टीकाकरण कवरेज में गिरावट, तय समय पर टीका न लगवा पाने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का अभाव और मौजूदा सरकार की अपर्याप्त तथा धीमी चिकित्सा प्रतिक्रिया शामिल हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि इस वर्ष सत्ता में आने के बाद मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार उन जोखिमों पर तेजी से कार्रवाई करने में विफल रही, जिनके बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध थी।
पारदर्शिता की कमी की आलोचना करते हुए जीसीडीजी ने कहा कि खसरे के प्रकोप के दौरान जानकारी को सार्वजनिक करने में कमी और स्पष्टता का अभाव वर्तमान सरकार की स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की एक गंभीर कमजोरी रही है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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