बांग्लादेश में खसरे का कहर, छह बच्चों की मौत, मरने वालों की संख्या 870 के पार
ढाका, 9 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। रविवार को खसरे जैसे लक्षणों वाले छह बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही वर्ष 2026 में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 873 हो गई है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की ओर से जारी बयान के अनुसार, हाल में हुई सभी छह मौतें खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतें हैं। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजा आंकड़ों के बाद प्रयोगशाला में पुष्टि की गई खसरे से मौतों की संख्या 98 पर ही बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 775 हो गई है।
पिछले 24 घंटों के दौरान देश में खसरे के 988 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,36,320 हो गई। इसी अवधि में 75 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, जिसके बाद लैब में पुष्टि किए गए कुल संक्रमितों की संख्या 17,115 तक पहुंच गई।
बांग्लादेश में खसरे के मामलों में लगातार तेज बढ़ोतरी के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन ने 2026 के इस प्रकोप को हाल के वर्षों के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है। संगठन ने इस बात पर चिंता जताई कि यह बीमारी टीकाकरण के जरिए रोकी जा सकती है।
कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश्स 2026 मीजल्स आउटब्रेक’ में कहा कि आम लोगों को यह प्रकोप भले अचानक लगा हो, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह संकट कई कारणों के मेल का परिणाम है। इनमें 2024-2025 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें, नियमित टीकाकरण छूट जाना, तय किए गए अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का रद्द होना, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले बच्चों की समय पर पहचान न कर पाना शामिल हैं।
जीसीडीजी के अनुसार, बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से स्वीकृत टीके यूनिसेफ (यूनिसेफ) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के माध्यम से खरीदता था। लेकिन अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया लागू कर दी। रिपोर्ट में यूनिसेफ का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2024 से 2026 के बीच एजेंसी ने संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को पांच से छह औपचारिक पत्र भेजे और लगभग 10 बैठकें भी कीं, लेकिन समस्या बनी रही।
बांग्लादेशी अखबार समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जीसीडीजी ने कहा कि 2025 में खसरे के टीकाकरण की कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई, जो 2017 से 2025 के बीच का सबसे कम स्तर था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बाद में डब्ल्यूएचओ ने 2024-2025 के दौरान बांग्लादेश में खसरा-रूबेला (एमआर) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में आई गिरावट को बच्चों की प्रतिरक्षा कमजोर होने तथा 2026 के प्रकोप के मुख्य कारणों में शामिल बताया।
जीसीडीजी के अनुसार, देशभर में खसरे के फैलाव के पीछे प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था की कई विफलताएं जिम्मेदार रहीं। इनमें अंतरिम सरकार के दौरान कार्यक्रमों में आई खाली जगह, वैक्सीन की खरीद, परिवहन और आपूर्ति में रुकावटें, वैक्सीन की कमी, रद्द किए गए ईपीआई सत्र, एमआर1 और एमआर2 टीकाकरण कवरेज में गिरावट, तय समय पर टीका न लगवा पाने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या, अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों का अभाव और मौजूदा सरकार की अपर्याप्त तथा धीमी चिकित्सा प्रतिक्रिया शामिल हैं।
संगठन ने आरोप लगाया कि इस वर्ष सत्ता में आने के बाद मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार उन जोखिमों पर तेजी से कार्रवाई करने में विफल रही, जिनके बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध थी।
पारदर्शिता की कमी की आलोचना करते हुए जीसीडीजी ने कहा कि खसरे के प्रकोप के दौरान जानकारी को सार्वजनिक करने में कमी और स्पष्टता का अभाव वर्तमान सरकार की स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की एक गंभीर कमजोरी रही है।
--आईएएनएस
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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, ED चीफ राहुल नवीन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया
ED Director Tenure Extended: केंद्र सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के डायरेक्टर राहुल नवीन के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है. 8 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने राहुल नवीन का कार्यकाल 13 अगस्त 2026 के बाद एक साल यानी 13 अगस्त 2027 तक जारी रखने को मंजूरी दी है. यह विस्तार उनकी 31 जुलाई 2027 की सेवानिवृत्ति की तारीख को भी कवर करता है. इसका मतलब है कि वह अगले साल अगस्त तक एजेंसी का नेतृत्व करते रहेंगे.
30 साल से ज्यादा का अनुभव और बेहतरीन शैक्षणिक बैकग्राउंड
राहुल नवीन 1993 बैच के भारतीय राजस्व सेवा यानी IRS अधिकारी हैं. उनके पास आयकर विभाग में काम करने का 30 साल से ज्यादा का लंबा अनुभव है. उन्होंने IIT कानपुर से B.Tech और M.Tech की पढ़ाई की है, जबकि ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री प्राप्त की है. उन्हें अंतरराष्ट्रीय टैक्सेशन और सीमा पार वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों का बहुत बड़ा विशेषज्ञ माना जाता है. अपने करियर के दौरान उन्होंने मुंबई में अंतरराष्ट्रीय कराधान निदेशालय में काम करते हुए कई बड़े मामलों में टैक्स मांग तय करने में अहम भूमिका निभाई है.
FATF और OECD बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व
राहुल नवीन का अनुभव केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का पक्ष मजबूती से रखा है. उन्होंने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT में कमिश्नर ट्रांसफर प्राइसिंग और फॉरेन टैक्स एंड टैक्स रिसर्च डिवीजन में डायरेक्टर के तौर पर काम किया है. इस दौरान उन्होंने कई देशों के साथ टैक्स सूचना के आदान-प्रदान के समझौतों में भाग लिया. उन्होंने FATF, OECD और G20 जैसी बड़ी बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया है.
मनी लॉन्ड्रिंग जांच में लंबा और मजबूत अनुभव
ED में शीर्ष पद पर आने से पहले ही उन्हें वित्तीय अपराधों की गहराई से जांच का अनुभव था. नवंबर 2019 में वह ED में OSD के रूप में शामिल हुए और बाद में स्पेशल डायरेक्टर बने. इस दौरान उन्होंने देशभर में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के समन्वय और विदेशों से संपत्ति की रिकवरी जैसे बड़े कामों की निगरानी की. इसके बाद 15 सितंबर 2023 को उन्होंने ED के प्रभारी निदेशक का पद संभाला और 14 अगस्त 2024 को उन्हें पूर्णकालिक डायरेक्टर नियुक्त किया गया.
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अपराध की कमाई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
राहुल नवीन के नेतृत्व में एजेंसी का मुख्य ध्यान सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी पर ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति को ट्रैक करने पर भी रहा है. उनके कार्यकाल में फॉरेंसिक लैब, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मॉरीशस जैसी विदेशी एजेंसियों के साथ मिलकर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौते किए गए हैं. हाल के समय में बैंक फ्रॉड, फर्जी दस्तावेज और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में ED ने करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं.
भविष्य की चुनौतियां और 2027 तक का रोडमैप
मौजूदा दौर में आर्थिक अपराध के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. डिजिटल फ्रॉड, क्रिप्टो करेंसी, शेल कंपनियां और हवाला नेटवर्क जैसे मामले एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं. ऐसे में राहुल नवीन का अंतरराष्ट्रीय टैक्सेशन और फाइनेंशियल क्राइम जांच का अनुभव बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. 2027 तक अपने इस बढ़े हुए कार्यकाल में उनका मुख्य लक्ष्य ED की जांच प्रणाली को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना होगा.
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