Suleman Khatib Dakhni Poet: 'केवड़े का बन' से अमर हुआ हैदराबादी लहजा, जानें उस शायर की कहानी जिसने बदल दिया मुशायरों का मिजाज
Suleman Khatib Dakhni Poet: दकनी उर्दू के महान शायर सुलेमान खतीब ने अपनी शायरी के जरिए हैदराबादी लहजे को वैश्विक पहचान दिलाई. 26 दिसंबर 1922 को जन्मे खतीब साहब ने 'केवड़े का बन' जैसी महान कृति के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार किया. हास्य और व्यंग्य के उस्ताद माने जाने वाले खतीब साहब ने स्वास्थ्य विभाग में काम करते हुए भी साहित्य साधना जारी रखी. उन्हें कर्नाटक सरकार ने राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित किया था. उनकी शायरी आज भी दकनी तहजीब और मानवीय संवेदनाओं का सबसे सशक्त उदाहरण मानी जाती है.
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